नारनौल में पहले गंभीर केस में फंसाने का डर दिखाकर किया डिजिटल अरेस्ट, फिर FD से निकलवाए 23 लाख ठगे
नारनौल में एक महिला 'डिजिटल अरेस्ट' से साइबर ठगी का शिकार हुई, जिसमें उसने 23 लाख रुपये गंवा दिए। पुलिस ...और पढ़ें

पीड़ित महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसके पास व्हाट्सएप पर वीडियो काॅल आई थी।
HighLights
नारनौल में महिला से 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 23 लाख ठगे गए।
आरोपी गोविंद जांगिड़ ने ठगों को बैंक खाता और सिम कार्ड दिया था।
पुलिस ने साइबर ठगी से बचने के लिए हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की अपील की।
जागरण संवाददाता,नारनौल। पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार के निर्देशानुसार जिला महेंद्रगढ़ पुलिस द्वारा साइबर अपराधों में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में साइबर थाना नारनौल पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर नारनौल निवासी एक महिला से 23 लाख रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपित गोविंद जांगिड़ निवासी जयपुर, राजस्थान को गिरफ्तार किया है।
फंडिंग की झूठी कहानी से डराया
डीएसपी डाॅ. कविता ने बताया कि पीड़ित महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसके पास व्हाट्सएप पर वीडियो काॅल आई। काॅल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को पुलिस अधिकारी बताते हुए महिला को डराया कि उसका नाम एक गंभीर आपराधिक मामले में सामने आया है और उसकी जांच व वेरिफिकेशन की जानी है।
आरोपितों ने महिला को वीडियो कॉल पर अपनी बातों में उलझाए रखा और 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर उसे किसी अन्य व्यक्ति से इस संबंध में बात न करने का दबाव बनाया। इसके बाद आरोपियों ने महिला को उसके नाम से कथित बैंक खाते में बड़ी रकम एवं संदिग्ध फंडिंग होने की झूठी कहानी बताकर भयभीत किया।

एफडी से 23 लाख रुपये निकलवाए
आरोपितों ने जांच एवं वेरिफिकेशन के नाम पर महिला को अपनी जमा राशि एक बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा। आरोपितों की बातों और दबाव में आकर महिला ने अपनी एफडी से 23 लाख रुपये निकलवाकर बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में महिला को अपने साथ साइबर ठगी होने का पता चला, जिस पर उसने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम नारनौल में नियमानुसार मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस टीम ने बैंकिंग एवं तकनीकी तथ्यों का विश्लेषण करते हुए मामले में गोविंद जांगिड़ निवासी जयपुर की संलिप्तता पाई और उसे गिरफ्तार किया।
स्कैमरों को अपना सिम कार्ड भी दिया
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी गोविंद जांगिड़ ने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता साइबर स्कैमरों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। ठगी की राशि का हिस्सा उसके बैंक खाते में आना पाया गया। आरोपी ने स्कैमरों को अपना सिम कार्ड भी उपलब्ध कराया हुआ था। पुलिस द्वारा आरोपित से मामले से संबंधित पूछताछ की गई।
आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में अन्य आरोपितों की संलिप्तता, ठगी की राशि के लेन-देन तथा पूरे साइबर नेटवर्क के संबंध में आगे की जांच लगातार जारी है।
किसी बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर करवाता
पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी, आरबीआई अथवा अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करता और न ही जांच या वेरिफिकेशन के नाम पर किसी बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर करवाता है।
तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें
उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या संदेश के दबाव में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड अथवा धनराशि साझा या ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें अथवा नजदीकी साइबर थाना/पुलिस थाना में शिकायत दर्ज करवाएं। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की राशि को फ्रीज करवाने और उसकी रिकवरी के प्रयास शीघ्र शुरू किए जा सकते हैं।
