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NGT के आदेश के बावजूद हर 3-4 दिन में रात को जलता है कूड़ा, नारनौल में निगरानी व्यवस्था पर सवाल

Published: Fri, 02 Oct 2026 05:45 PM (IST)

नारनौल में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों की अनदेखी करते हुए रात के अंधेरे में खुलेआम कूड़ा जलाया जा ...और पढ़ें

एनजीटी के आदेश कचरे की आग के धुएं में धड़ल्ले से उड़ाए जा रहे हैं।

एनजीटी के आदेश कचरे की आग के धुएं में धड़ल्ले से उड़ाए जा रहे हैं। 

HighLights

  1. नारनौल में एनजीटी आदेशों के बावजूद खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है।

  2. रात के अंधेरे में कूड़ा जलाने से शहर में प्रदूषण बढ़ रहा है।

  3. नगर परिषद नारनौल की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

जागरण संवाददाता, नारनौल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश कचरे की आग के धुएं में धड़ल्ले से उड़ाए जा रहे हैं। शहर में कुछ दुकानदारों द्वारा रात के अंधेरे में कूड़े में आग लगाकर खुलेआम प्रदूषण फैलाया जा रहा है। कई बार आग इतनी भयंकर होती है कि इससे आगजनी की घटना होने का अंदेशा भी बन जाता है। किसी भी दिन किसी बड़े हादसा होने के अंदेशे से इंकार नहीं किया जा सकता है।

संस्थाएं नारनौल में सुप्त अवस्था में

एनजीटी के आदेशों के तहत स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे खुले में कचरा जलाने वालों की पहचान करें और उन पर तुरंत कार्रवाई करें,लेकिन दोनों ही संस्थाएं नारनौल में सुप्त अवस्था में दिखाई दे रही हैं।

कूड़े में आग के हवाले कर दिया

शहर में वैसे तो जगह-जगह कचरे के ढेरों में आग लगाने की घटनाएं आए दिन देखी जा रही हैं। महेंद्रगढ़ रोड पर बिजली निगम कार्यालय के पास खाली प्लाट में डाले जा रहे कचरे का कोई उठान नहीं किया जाता है और यहां पर डाले जाने वाले कचरे को हर तीन या चार दिन में रात के समय आग के हवाले कर दिया जाता है। इसी तरह महेंद्रगढ़ रोड पर ही गुरुवार रात्रि राजस्थानी स्टोर के सामने आम दुकानदारों द्वारा कूड़े में आग के हवाले कर दिया।

निगरानी व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

कूड़े से निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के वातावरण को प्रदूषित करता रहा । इससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

हैरानी की बात है कि कूड़े में आग लगाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना नगर परिषद की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद यदि इस तरह की गतिविधियां जारी हैं, तो यह निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

अब सवाल यह है कि आखिर नगर परिषद नारनौल ऐसे लोगों के खिलाफ कब कार्रवाई करेगी? क्या आम दुकानदारों को खुलेआम कूड़ा जलाकर प्रदूषण फैलाने की छूट मिली हुई है?

नगर परिषद को तुरंत मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि शहर में इस तरह प्रदूषण फैलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

एनजीटी के नियमों और जुर्माने का विवरण

  • व्यक्तिगत जुर्माना : यदि कोई आम व्यक्ति खुले में छोटा- मोटा कूड़ा-कचरा जलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 5,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा (जुर्माना) लगाया जाता है।
  • बड़े पैमाने पर जुर्माना : यदि कोई व्यक्ति, संस्था, या निकाय बड़ी मात्रा में कचरा या लैंडफिल साइट पर आग लगाता है, तो प्रत्येक घटना पर 25,000 रुपये का जुर्माना वसूला जाता है।
  • बार-बार उल्लंघन पर : यदि कोई व्यक्ति या निकाय दोबारा यह गलती करता है, तो जुर्माने की राशि और बढ़ सकती है।

"कर्मचारियों की रात्रि ड्यूटी लगाई जाएगी। रात सात बजे से दो कर्मचारी निगरानी करेंगे। वीडियो बनाएंगे और चालान किए जाएंगे। हमारा पहला प्रयास लोगों को समझाने का होता है, लेकिन फिर भी यदि नहीं मान रहे तो कार्यवाही की जाएगी।"

-जोगेंद्र सिंह कालीरमण, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, नारनौल।

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