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महेंद्रगढ़ में महिला-बाल विकास विभाग ही कुपोषण का शिकार, 8 CDPO और DPO के पद खाली

Published: Wed, 12 Aug 2026 11:03 AM (IST)

महेंद्रगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग में सभी 8 सीडीपीओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद रिक्त हैं। अधिकारियों ...और पढ़ें

महेंद्रगढ़ में महिला एवं बाल विकास की जिम्मेदारियों को निभाने वाले कर्मियों में काफी कमी है। एआई इमेज

महेंद्रगढ़ में महिला एवं बाल विकास की जिम्मेदारियों को निभाने वाले कर्मियों में काफी कमी है। एआई इमेज

HighLights

  1. महेंद्रगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में अधिकारियों की भारी कमी।

  2. जिले में सभी 8 सीडीपीओ और डीपीओ पद खाली हैं।

  3. पोषण व बाल विकास कार्यक्रम प्रभावित, रेवाड़ी DPO को अतिरिक्त प्रभार।

बलवान शर्मा, नारनौल। जिले की महिलाओं और बच्चों के विकास की कमान संभाल रहे महिला एवं बाल विकास विभाग को खुद सहारे की आवश्यकता है। जिले के सभी आठ ब्लाॅकों में सीडीपीओ (चाइल्ड डवलपटमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर) के पद रिक्त हैं। वहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी का भी पद रिक्त है। ऐसे में विभाग में अधिकारी ही नहीं होंगे तो बच्चों और महिलाओं के कल्याण की जिम्मेदारी कैसे निभ रही हो रही है?

रेवाड़ी ने संभाल रखी है जिम्मेदारी

हालांकि, काम चलाने के लिए रेवाड़ी डीपीओ को महेंद्रगढ़ जिले का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा हुआ है। दो जिलों का चार्ज संभावना एक अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती तो है ही। साथ ही, सीडीपीओ के पद होने की वजह से व्यवस्था क्लर्कों के हवाले की चलानी पड़ रही है।

राशन भी गुणवत्ता में कम और मात्रा भी अपर्याप्त

जिले में एक हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्रों में शिशुओं को परोसी जाने वाली सामग्री गुणवत्तायुक्त है, इसकी निगरानी करने वाला अधिकारी ही नहीं है तो हालात भगवान भरोसे ही होंगे। पिछले दिनों सीएम फ्लाइंग ने नांगल चौधरी एरिया की आंगनबाड़ियों में छापा मारा था तो अधिकांश में राशन या तो कम मिला था या फिर राशन में कीड़े मिले हुए थे। जिले के अन्य ब्लाॅक में भी चैकिंग की जाती तो धरातल की सच्चाई और सामने आ जाती।

महिला एवं बाल विकास विभाग का क्या है काम?

महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास, सुरक्षा, पोषण और कल्याण के लिए नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने वाला प्रमुख सरकारी विभाग है। यह विभाग बच्चों में कुपोषण दूर करने, महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने तथा बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने का मुख्य कार्य करता है।

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महिला एवं बाल विकास विभाग के ये हैं प्रमुख कार्य

महिलाओं का सशक्तिकरण और सुरक्षा

  • मिशन शक्ति: महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं चलाना
  • कौशल विकास: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारपरक और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • वित्तीय सहायता: गर्भवती महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आश्रय व पुनर्वास सेवाएं देना।

बच्चों का विकास और पोषण

  • पोषण अभियान: आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों को पूरक पोषण आहार देना।
  • स्वास्थ्य शिक्षा: बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य व शुरुआती बाल्यावस्था की देखभाल में सुधार करना
  • वित्तीय सहायता: गर्भवती महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आश्रय व पुनर्वास सेवाएं देना।

अधिकारियों की कमी और चुनौतियां

इसमें अधिकारी ही नहीं होंगे तो महिलाओं और बच्चों का विकास कैसे होगा, यह सवाल उठना तो लाजिमी है। कितने बच्चे कुपोषित हैं। इन बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जिले में कैसे योजनाएं बनाई जा रही हैं। ये सब कार्य कैसे हो रहे हैं, यह सब भगवान भरोसे है। महिलाएं कैसे आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह भी अपने आप में बड़ा सवाल है। जरूरतमंद महिलाओं के लिए आश्रय व पुनर्वास सेवाएं कैसे चल रही हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी?

मेरे पास महेंद्रगढ़ जिले का अतिरिक्त चार्ज है। हम सभी योजनाओं को बेहतर तरीके से चला रहे हैं। हालांकि अधिकारियों की कमी से थोड़ी परेशानी तो होती है।

शालू यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, रेवाड़ी।

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