नारनौल में मिलावट का खेल: 15 महीने में 21 पर सिर्फ 10 हजार का जुर्माना, 30 सैंपलों की रिपोर्ट अब भी पेंडिंग
महेंद्रगढ़ में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कम जुर्माने वाले मामले अधिक सामने आए हैं। एक अप्रैल 2025 से ...और पढ़ें
-1792990096642_m.webp)
कैसे रुकेगा जहरीली मिठाइयों का धंधा?
HighLights
महेंद्रगढ़ में खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पर कम जुर्माने।
2025-26 अवधि में 36 मामलों पर जुर्माना लगा।
60 सैंपलों में से 10 फेल, 30 रिपोर्ट लंबित।
विपिन कुमार, नारनौल। त्योहारों पर मिलावटखोरी रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई कितनी प्रभावी है, इसका आकलन केवल सैंपल लेने और नोटिस जारी करने से नहीं, बल्कि दोषियों पर हुई कार्रवाई और लगाए गए जुर्माने से भी किया जा सकता है।
जिले में एक अप्रैल 2025 से 30 जून 2026 तक खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के 36 मामलों में जुर्माना लगाया गया। इनमें 21 मामलों में जुर्माना 10 हजार रुपये तक रहा। वहीं, छह मामलों में 10 से 20 हजार, पांच में 20 से 50 हजार और चार मामलों में 50 हजार रुपये से अधिक जुर्माना लगाया गया।
जुर्माने के आंकड़े बताते हैं कि कार्रवाई के मामलों में कम राशि के दंड वाले प्रकरणों की संख्या अधिक रही। ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जांच, प्रयोगशाला रिपोर्ट और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है।
60 सैंपल लिए, 10 की रिपोर्ट फेल
जिले में 15 सितंबर से 23 अक्टूबर तक खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न खाद्य पदार्थों के करीब 60 सैंपल लिए। इनमें से 10 सैंपल जांच में फेल हो चुके हैं, जबकि करीब 30 सैंपलों की प्रयोगशाला रिपोर्ट लंबित है। फेल पाए गए सैंपलों के मामलों में संबंधित विक्रेताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब इन मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट आने के बाद तय होगी कार्रवाई
खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने के बाद प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर ही गुणवत्ता संबंधी उल्लंघन की प्रकृति स्पष्ट होती है। रिपोर्ट लंबित रहने से संबंधित मामलों में अंतिम कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट होने में समय लगता है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के बीच जांच के साथ रिपोर्ट और कार्रवाई की प्रक्रिया को समयबद्ध रखना भी जरूरी है।
