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दक्षिण-पश्चिम हरियाणा में बदलेगी खेती की तस्वीर, आलू की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

Published: Thu, 27 Aug 2026 01:56 PM (GMT+05:30)

दक्षिण-पश्चिम हरियाणा के किसान अब पारंपरिक फसलों के बजाय आलू की व्यावसायिक खेती अपना रहे हैं। बागवानी विभाग और अंतरराष्ट्रीय ...और पढ़ें

बागवानी विभाग और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) ने मिलकर एक बड़ी शुरुआत की है। प्रतीकात्मक तस्वीर

बागवानी विभाग और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) ने मिलकर एक बड़ी शुरुआत की है। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. दक्षिण-पश्चिम हरियाणा में आलू की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग शुरू।

  2. किसानों को बड़ी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों से जोड़ा गया।

  3. कम पानी में अधिक आय का नया मॉडल।

जागरण संवाददाता, महेंद्रगढ़। सूखे और कम पानी की चुनौती से जूझने वाले दक्षिण-पश्चिम हरियाणा का मिजाज अब बदलने लगा है। पारंपरिक फसलों से इतर, अब इस अंचल के किसान आलू की व्यावसायिक खेती के जरिए अपनी तकदीर लिखने की तैयारी में हैं। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की दूरदर्शी सोच और फसल विविधीकरण की पहल को धरातल पर उतारते हुए बागवानी विभाग और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) ने मिलकर एक बड़ी शुरुआत की है।

देश की बड़ी प्रोसेसिंग कंपनियों से जोड़ा

सुंदरह (महेंद्रगढ़) स्थित आईएचडीसी में आयोजित एक दिवसीय किसान–उद्योग संवाद कार्यक्रम में इस बदलाव की पहली सीधी झलक देखने को मिली। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद क्षेत्र में आलू की कान्ट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देना और किसानों को सीधे देश की बड़ी प्रोसेसिंग कंपनियों से जोड़ना था।

इस संवाद में पेप्सिको, बालाजी और हाइफन/मंत्रा जैसी देश की जानी-मानी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के नुमाइंदों ने सीधा हिस्सा लिया। महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी और रेवाड़ी से पहुंचे लगभग 150 प्रगतिशील किसानों से सीधे रूबरू होते हुए कंपनियों ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का माडल समझाया।

50 एकड़ में किए गए ट्रायल सफल

विशेषज्ञों ने किसानों को आश्वस्त किया कि अगर वे तय गुणवत्ता मानकों का पालन करेंगे, तो कंपनियां उनकी उपज की सीधे खेत से तय दरों पर खरीद करेंगी। इससे न सिर्फ बिचौलियों का खेल खत्म होगा, बल्कि किसानों को मंडी के उतार-चढ़ाव वाले जोखिम से भी राहत मिलेगी। पिछले साल महज 50 एकड़ में किए गए ट्रायल की अपार सफलता के बाद इस साल किसानों में गजब का उत्साह दिखा।

तकनीक और वैज्ञानिक मार्गदर्शन का मिला भरोसा

कार्यक्रम में विशेषज्ञ डाॅ. सरदार सिंह, डाॅ. अजय और सीआईपी के कंट्री मैनेजर डॉ. नीरज शर्मा ने क्षेत्र में आलू उत्पादन की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम हरियाणा की आबोहवा और मिट्टी आलू की प्रोसेसिंग किस्मों के लिए बहुत मुफीद है।

सीआईपी की वैज्ञानिक टीम (डाॅ. निर्मल और डा. दीपा) तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के डाॅ. नरेश यादव, डाॅ. बलबीर सिंह व डॉ. नरेंद्र यादव ने किसानों को आलू की आधुनिक किस्मों, रोग-कीट प्रबंधन और स्वस्थ बीजों के इस्तेमाल की बारीकियां सिखाईं।

वहीं, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम यादव, डॉ. नेहा यादव और डॉ. मुकेश ने विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।

आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम

मुख्य अतिथि एवं उपनिदेशक उद्यान डाॅ. मनदीप यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी से लेकर तकनीकी सहायता तक हर मोर्चे पर किसानों के साथ खड़ी है।

बागवानी विभाग, सीआईपी, केवीके और निजी उद्योग का यह साझा प्रयास निश्चित रूप से दक्षिण-पश्चिम हरियाणा के किसानों के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है। जहां पानी की बचत भी होगी और उपज का दाम भी सही मिलेगा।

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