नारनौल और चरखी दादरी के 1000 किसानों को रियायती दर पर मिलेगा 'आर्यावर्ती फास्फेट'
आर्यव्रत सेवा न्यास ने नारनौल और चरखी दादरी के 1000 किसानों को रियायती दरों पर आर्यावर्ती फास्फेट उपलब्ध कराने की पहल की है।

आर्यव्रत सेवा न्यास की बड़ी पहल (AI-Generated Image)
जागरण संवाददाता, नारनौल। किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और कृषि भूमि को रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों से मुक्त करने के उद्देश्य से आर्यव्रत सेवा न्यास ने सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। न्यास के संस्थापक विनीत पिलानिया ने घोषणा की है कि नारनौल और चरखी दादरी के कम से कम 500-500 किसानों को रियायती दरों पर आर्यावर्ती फास्फेट उपलब्ध कराया जाएगा।
इस विशेष फास्फेट उर्वरक का निर्माण न्यास के मुख्य साइंटिफिक सलाहकार सुदल कुमार के तकनीकी मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
यह पोषक तत्वों का एक कंपोजिट मिश्रण है, जिसमें फास्फेट के अलावा नाइट्रोजन, जिंक, सल्फर, कॉपर और अन्य चिलेटेड सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल हैं। यह समग्र पोषण पौधों का सर्वांगीण विकास करता है, जिससे खेती की लागत कम होती है और किसानों का मुनाफा कई गुना बढ़ता है।
फल उत्पादक किसानों के लिए फायदा
यह उर्वरक न केवल पारंपरिक फसलों जैसे ज्वार, बाजरा, सरसों और गेहूं के लिए लाभकारी है, बल्कि फल उत्पादक किसानों और टमाटर, प्याज व मिर्च जैसी सब्जियों की खेती करने वाले किसान भी रियायती दरों पर इस उत्पाद का लाभ उठा सकेंगे।
इस सब्सिडी योजना के तहत, किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला फास्फेट सस्ती दर पर प्रदान किया जाएगा, जिससे खेती की लागत कम होगी। यह पहल स्थानीय स्तर पर कृषि सुधार लाने और अन्नदाताओं को सस्ती दर पर जैविक व प्राकृतिक खाद तक पहुंच दिलाने के लिए शुरू की गई है।
किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक करना
इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए नारनौल और चरखी दादरी के इच्छुक किसान आर्यावर्त सेवा न्यास के संपर्क केंद्रों पर जाकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। विनीत पिलानिया ने बताया कि न्यास का लक्ष्य केवल खाद उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों को जैविक खेती के आधुनिक तरीकों और मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति भी जागरूक करना है।
