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गुरुकुल के छात्रों का प्रदर्शन देख प्रभावित हुईं राष्ट्रपति, कुरुक्षेत्र में बोलीं- आज की युवा पीढ़ी इनसे लें प्रेरणा

Published: Sun, 01 Nov 2026 07:04 PM (IST)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। ...और पढ़ें

कुरुक्षेत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु। फोटो जागरण

कुरुक्षेत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु। फोटो जागरण

HighLights

  1. राष्ट्रपति मुर्मु ने गुरुकुल शिक्षा को विकसित भारत का आधार बताया।

  2. स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थीं।

  3. गुरुकुल चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के केंद्र हैं।

जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को साकार करने में गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। गुरुकुल केवल किताबी ज्ञान देने वाले शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और नैतिक मूल्यों को मजबूत आधार प्रदान करने वाले केंद्र हैं।

वह रविवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित स्वतंत्रता सेनानी एवं अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान दिवस शताब्दी समारोह को बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थी। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का संपूर्ण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से हजारों लोगों की घर वापसी कराई और समाज में एकता एवं समरसता स्थापित करने के लिए आजीवन कार्य किया।

100 से अधिक उच्च सैन्य अधिकारी देश को समर्पित 

जामा मस्जिद से वैदिक मंत्रों का उपदेश देना उनके उदार चिंतन, सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का अद्भुत उदाहरण है। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र ने पिछले 10 वर्षों में एनडीए के माध्यम से 100 से अधिक उच्च सैन्य अधिकारी देश को समर्पित किए हैं। प्रदेश के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का जीवन अदम्य साहस, त्याग, तपस्या और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरक गाथा है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वामी श्रद्धानंद को सामाजिक जागरण का महान् अग्रदूत बताया। मंच संचालन वैदिक विद्वान् डा. राजेंद्र विद्यालंकार ने किया। इस अवसर पर पद्मश्री डा. पूनम सूरी, धर्मवीर सिंह आर्य, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली के प्रधान सुरेंद्र कुमार आर्य, विनय आर्य, अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानंद, गुरुकुल प्रधान राजकुमार गर्ग, निदेशक ब्रिगेडियर डा. प्रवीण कुमार शर्मा व प्राचार्य सूबे प्रताप उपस्थित रहे।

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