कुरुक्षेत्र, [सतीश चौहान]। देश में असहिष्णुता पर बहस के बीच यहां स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनअाइटी) भी इस तरह के आरोप की चपेट में आ गया है। आराेप है कि बुधवार को संस्था में एक दलित छात्र को चोर घोषित कर दिया गया और इसके लिए नोटिस बोर्डों पर सूचना तक लगा दी। हालांकि, जब इस पर हंगामा हुआ तो इसे हटा लिया गया। अब संस्थान का कोई अधिकारी इस मामले पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है। हर कोई इस मामले को एक-दूसरे पर टालने में जुटा है।

दलित छात्र को चोर घोषित करता नोटिस लगाया संस्थान में

हुआ यह कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के परिसर में कुछ सामान इधर-उधर होने के मामले में इस छात्र को पकड़ा गया था। मामला स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी के डीन के पास चला गया। उन्होंने छात्र के अभिभावकों को बुलाया और पूरे मामले पर उनसे जवाब तलब किसा और छात्र को चेतावनी दी।

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संस्थान प्रशासन की ओर से छात्र पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभिभावकों ने अपने बच्चे की ओर से माफी मांगी और जुर्माना भर दिया। इसके बावजूद, संस्थान के नोटिस बोर्ड पर एक नोटिस लगा दिया गया कि 'फलां छात्र जो इस कक्षा का विद्यार्थी है और उसका... रोल नंबर यह है, को चोरी के मामले में पकड़ा गया है। नोटिस को डीआर अकाउंटस, छात्र के अभिभावक, चीफ वार्डन को भेजा गया। साथ ही नोटिस बोर्ड पर भी लगाया गया।

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छात्र पर मीडिया से बात न करने का दबाव

बोर्ड पर नोटिस चस्पां होते ही छात्र ने इसका पर विरोध जताया और मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद एनआइटी प्रशासन की आंख खुली और आनन-फानन में नोटिस को बोर्ड से हटा दिया गया। अधिकारियों ने छात्र को बहलाने का प्रयास किया। उस पर मीडिया से बात न करने का दबाव भी बनाया। छात्र का पक्ष लेने पहुंचे पत्रकारों को उससे नहीं मिलने दिया गया। उसके मोबाइल पर कई अधिकारियों ने फोन कर दबाव बनाया।

मामले के खुलासे के दूसरे दिन भी एनआइटी के अधिकारी इस मामले पर कुद भी बोलने से बचते रहे। डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर ने संपर्क करने पर कहा कि इस मामले में प्रवक्ता ही आधिकारिक पक्ष रख सकते हैं। संपर्क करने पर प्रवक्ता से बात नहीं हो पाई। के डीन और शिक्षक ने पीडि़त छात्र पर मामले को बाहर न ले जाने का दबाव भी बनाया।

एनआईटी प्रशासन इसे पूरा दबाने का प्रयास कर रहा है। किसके कहने पर छात्र को चोर ठहराते हुए नोटिस बोर्ड पर चिपकाया गया तथा इस मामले में क्या कार्रवाई हुई, इस बारे में एनआईटी प्रशासन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। इस बारे में जब एनआईटी के प्रवक्ता डा. आशुतोष कुमार सिंह से बात की गई तो उन्होंने क्या कि एनआईटी प्रशासन की तरफ से इस मामले में अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यदि कोई कार्रवाई होगी तो इसकी जानकारी देंगे। उधर एनआईटी प्रशासन छात्र को मीडिया से नहीं मिलने दे रहा है।