प्रेम विवाह करने पर घरवालों ने तोड़ा रिश्ता, युवती ने अनिरुद्धाचार्य के सामने सुनाई आपबीती; कथावाचक ने क्या दी सलाह?
तरावड़ी में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान एक युवती ने अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के सामने प्रेम विवाह और परिवार की नाराजगी की आपबीती सुनाई।
HighLights
युवती ने प्रेम विवाह पर परिवार की नाराजगी बताई
अनिरुद्धाचार्य जी ने धार्मिक दृष्टिकोण से सलाह दी
पति के साथ रहने और परिवार से रिश्ते सुधारने को कहा
जागरण संवाददाता, तरावड़ी (करनाल)। तरावड़ी मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी में उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब एक युवती ने प्रेम विवाह और परिवार की नाराजगी से जुड़ी अपनी आपबीती अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के सामने रखी।
युवती ने बताया कि उसने परिवार की इच्छा के विपरीत दूसरी जाति के युवक से विवाह किया है। युवती का कहना था कि शादी से पहले उसकी मां ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वह नहीं मानी तो उसे कथित तौर पर करीब एक महीने तक कमरे में बंद रखा गया और नौकरी पर जाने से भी रोक दिया गया।
युवती ने कहा कि अब उसकी इच्छा अपने परिवार और पति के बीच रिश्ते सामान्य कराने की है। प्रश्नोत्तरी के दौरान युवती ने बताया कि वह नौकरी करती थी और एक युवक से प्रेम करती थी। उसने अपनी मां को भी इस रिश्ते के बारे में बताया और कहा था कि वह उसी युवक से विवाह करना चाहती है। युवती के अनुसार, परिवार ने युवक की जाति को लेकर इस रिश्ते का विरोध किया।
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युवती ने बताया कि एक दिन उसकी मां उसे ऑफिस से घर लेकर आईं और इसके बाद उसे कमरे में बंद कर दिया गया। उसका मोबाइल फोन भी ले लिया गया तथा उसे नौकरी पर जाने की अनुमति नहीं दी गई। युवती के मुताबिक, करीब एक महीने तक वह इसी स्थिति में रही।
युवती ने कहा कि उसने अपनी मां से कई बार आग्रह किया था कि वह युवक से मिलें, उसके परिवार और संस्कारों को जानें तथा इसके बाद शादी को लेकर फैसला करें। युवती के अनुसार, उसने मां से यह भी कहा था कि यदि उन्हें लड़का पसंद नहीं आता तो वह उनकी बात मान लेगी। लेकिन उसके मुताबिक, परिवार ने युवक से मिलने तक की कोशिश नहीं की।
युवती ने कहा कि लगातार मानसिक दबाव और घर में बंद रखे जाने के बाद उसने युवक से विवाह करने का फैसला लिया। शादी के बाद भी परिवार की नाराजगी खत्म नहीं हुई और अब परिजन चाहते हैं कि वह पति को छोड़कर वापस घर आ जाए।
अनिरुद्धाचार्य बोले-फैसला लेने से पहले परिवार और संस्कारों को समझना चाहिए
युवती की बात सुनने के बाद अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने विवाह और प्रेम को लेकर अपने धार्मिक दृष्टिकोण की बात रखी। उन्होंने कहा कि विवाह का निर्णय केवल भावनाओं के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। व्यक्ति को सामने वाले के परिवार, संस्कार और भविष्य के जीवन के बारे में भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने शास्त्रों का संदर्भ देते हुए जाति आधारित विवाह संबंधी अपनी धार्मिक मान्यता भी बताई और कहा कि उनकी दृष्टि में युवती ने धर्म के अनुसार सही निर्णय नहीं लिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार देती है।
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अब शादी कर ली है तो पति के साथ निभाओ
अनिरुद्धाचार्य जी ने युवती से कहा कि अब जब विवाह हो चुका है तो उसे अपने पति के साथ जीवन को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने परिवार से संबंध पूरी तरह समाप्त करने के बजाय मां से बातचीत कर रिश्ते सुधारने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि मां फिलहाल बेटी और उसके पति को स्वीकार नहीं कर रही हैं तो युवती को अपने वैवाहिक जीवन को समझदारी से चलाने और ससुराल में सम्मानपूर्वक रहने का प्रयास करना चाहिए।
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बातचीत के दौरान युवती ने कहा कि किसी से प्रेम करना गुनाह तो नहीं है। इस पर अनिरुद्धाचार्य जी ने प्रेम और आकर्षण के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि विवाह से पहले व्यक्ति को यह भी देखना चाहिए कि जिस व्यक्ति के साथ जीवन बिताने का फैसला लिया जा रहा है, उसके संस्कार और पारिवारिक वातावरण कैसे हैं। उन्होंने युवती से प्रेम की परिभाषा पूछी। युवती ने कहा कि उसने युवक से निस्वार्थ प्रेम किया है।
आचार्य बोले- मां के प्यार को भी समझना चाहिए
अनिरुद्धाचार्य जी ने युवती को उसकी मां के त्याग और प्रेम की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि जिस मां ने जन्म दिया, पालन-पोषण किया, पढ़ाया-लिखाया और बेटी को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया, उसके भावनाओं को भी समझना चाहिए।
उन्होंने युवती के प्रेम को लेकर अपनी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार आकर्षण को लोग प्रेम समझ लेते हैं। उनके अनुसार सच्चे प्रेम में जिम्मेदारी, संस्कार और त्याग भी शामिल होना चाहिए।
आपकी मां भी विवाह के बाद परिवार के साथ रहीं’
बातचीत के दौरान अनिरुद्धाचार्य जी ने युवती से उसकी मां के वैवाहिक जीवन को लेकर भी सवाल किया। युवती ने बताया कि उसकी मां अपने पति से प्रेम करती हैं। इस पर उन्होंने कहा कि उसकी मां ने भी विवाह के बाद परिवार के साथ जीवन बिताया और रिश्तों को निभाया। उन्होंने युवती को सलाह दी कि वह अपनी मां से दोबारा शांतिपूर्वक बातचीत करे और पुराने विवाद को बढ़ाने के बजाय रिश्ते सुधारने का प्रयास करे।
प्रश्नोत्तरी के अंत में अनिरुद्धाचार्य जी ने विवाह को लेकर संवैधानिक अधिकार और धार्मिक मान्यताओं के बीच अंतर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह करने की अनुमति देता है, जबकि उनकी बताई धार्मिक मान्यताओं में विवाह के लिए अलग दृष्टिकोण है।
उन्होंने युवती से कहा कि अब विवाह हो चुका है तो वह अपने पति के साथ जिम्मेदारीपूर्वक जीवन बिताए और साथ ही अपने मायके से रिश्ते सुधारने की कोशिश करे। पूरे संवाद में युवती की सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार को खोना नहीं, बल्कि पति और परिवार दोनों के बीच संबंध सामान्य कराना रही। कथा के मंच से हुए इस सवाल-जवाब ने प्रेम विवाह, पारिवारिक भावनाओं, व्यक्तिगत निर्णय और धार्मिक मान्यताओं को लेकर एक गंभीर चर्चा को जन्म दिया।
