विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कूड़े के ढेर से घर में ही बनेगी खाद, करनाल के 600 घर दिखाएंगे नई राह; नगर निगम का बड़ा प्लान

Published: Sun, 18 Oct 2026 01:12 PM (IST)

करनाल नगर निगम छह वार्डों के 600 घरों को मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है, जहां घर पर ...और पढ़ें

करनाल में 600 घर बनेंगे स्वच्छता मॉडल।

करनाल में 600 घर बनेंगे स्वच्छता मॉडल।

HighLights

  1. करनाल के 600 घरों में अब घर पर ही बनेगी खाद

  2. गीला, सूखा, सैनिटरी और हानिकारक कचरा अलग-अलग होगा

  3. आरडब्ल्यूए और वार्ड कमेटियां स्वच्छता अभियान में देंगी सहयोग

जागरण संवाददाता, करनाल। घर से निकलने वाला कचरा अब सिर्फ कूड़ेदान में डालने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसे अलग-अलग करके उपयोगी बनाने की दिशा में भी काम होगा।

रसोई से निकलने वाले सब्जियों के छिलके, बचा हुआ भोजन और अन्य गीले कचरे से घर पर ही खाद बनाई जा सकेगी, जबकि सूखे कचरे को पुनर्चक्रण के लिए अलग रखा जाएगा।

600 घर दिखाएंगे स्वच्छता की नई राह

सैनिटरी और हानिकारक कचरे को भी सामान्य कचरे से अलग रखने की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए नगर निगम करनाल शहर के छह वार्डों में 600 घरों को मॉडल के रूप में तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। प्रत्येक वार्ड से 100-100 घरों को चिन्हित किया गया है।

चार श्रेणियों में बंटेगा घरों से निकलने वाला कचरा

अभी कई घरों में रसोई का कचरा, प्लास्टिक, कागज, सैनिटरी वेस्ट और अन्य अपशिष्ट एक ही डस्टबिन में डाल दिए जाते हैं। इससे उपयोगी कचरे को दोबारा इस्तेमाल करने या उससे खाद बनाने में परेशानी आती है।

नगर निगम की प्रस्तावित पहल में लोगों को चार तरह के कचरे की पहचान कर उन्हें अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पहली श्रेणी में गीला कचरा होगा, जिसमें सब्जियों और फलों के छिलके, चायपत्ती और भोजन के अवशेष शामिल होंगे।

इससे घर पर कंपोस्ट तैयार करने की पहल की जाएगी। दूसरी श्रेणी में सूखा कचरा रखा जाएगा, जैसे कागज, गत्ता, प्लास्टिक, धातु और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री। तीसरी श्रेणी सैनिटरी कचरे की होगी, जिसमें इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड और डायपर जैसे अपशिष्ट शामिल हैं।

चौथी श्रेणी में घरेलू हानिकारक कचरा रखा जाएगा, जिसमें बैटरियां, इस्तेमाल किए गए बल्ब और अन्य निर्धारित हानिकारक अपशिष्ट शामिल हो सकते हैं। इन्हें सामान्य कचरे में मिलाने के बजाय उचित तरीके से अलग रखना जरूरी होगा।

रसोई के कचरे से घर में ही बनेगी खाद

इस माडल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी घरों में कंपोस्ट तैयार करने की पहल होगी। रसोई से रोज निकलने वाले गीले कचरे को अलग इकट्ठा कर उचित विधि से खाद बनाई जा सकती है।

इससे घरों में निकलने वाले कचरे की मात्रा घटेगी और तैयार खाद का इस्तेमाल गमलों, किचन गार्डन तथा पौधों में किया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए लोगों को यह भी समझना होगा कि कंपोस्ट में प्लास्टिक, सैनिटरी वेस्ट या हानिकारक सामग्री नहीं मिलानी है।

खाद बनाने की सही विधि और कचरे को अलग रखने के बारे में जागरूकता इस योजना की सफलता के लिए अहम होगी।

आरडब्ल्यूए और वार्ड कमेटियों की होगी भागीदारी

छह वार्डों में चयनित 600 घरों को मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और वार्ड कमेटियों की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी है।

स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, घरों में कचरा पृथक्करण की आदत विकसित करने और कंपोस्ट बनाने के लिए प्रेरित करने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

यह भी पढ़ें- श्रीनगर जा रही वोल्वो बस पर नीलोखेड़ी में पथराव: यात्री घायल, CM उमर अब्दुल्ला की हरियाणा सरकार से कार्रवाई की मांग