कुत्ते से लेकर गधे-घोड़े तक... देश में 16 नई स्वदेशी पशु नस्लों को मिली राष्ट्रीय पहचान, 262 नस्लों तक पहुंचा पशुधन
देश में 16 नई स्वदेशी पशु नस्लों को राष्ट्रीय पहचान मिली है, जिससे कुल पंजीकृत नस्लों की संख्या 262 हो गई है।

दाएं- राजस्थान की तोतापुरी बकरी। सौजन्य इंटरनेट मीडिया।
HighLights
16 नई स्वदेशी पशु नस्लों को राष्ट्रीय पहचान मिली
कुल पंजीकृत पशुधन नस्लों की संख्या 262 हुई
एनबीएजीआर ने पशु संरक्षण को बढ़ावा दिया
अश्विनी शर्मा, करनाल। देश के अलग-अलग राज्यों में पीढ़ियों से पाली जा रही स्वदेशी पशु नस्लों की अब अपनी राष्ट्रीय पहचान बढ़ेगी। किसी क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल ढली गाय तो कहीं पहाड़ी परिस्थितियों में पनपने वाला याक, कहीं विशिष्ट गुणों वाली भेड़-बकरी तो कहीं स्थानीय पहचान बना कुत्ता और घोड़ा।
इनकी आनुवंशिक विशेषताओं को संरक्षित करने की दिशा में राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
संस्थान के प्रयासों से 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की नौ पशु प्रजातियों की 16 नई स्वदेशी नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत किया गया है। इसके साथ ही देश में पंजीकृत पशुधन एवं कुक्कुट नस्लों की संख्या बढ़कर 262 हो गई है।
यह पहल केवल पशु नस्लों को पहचान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके संरक्षण, विज्ञानी प्रजनन और स्थानीय पशुपालकों की आजीविका को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इन नस्लों को पशुपालन, उत्पादन, प्रजनन, संरक्षण, उपयोग, उपभोग और व्यापार के उद्देश्यों के लिए पूरे देश में अधिसूचित नस्लों के रूप में मान्यता दी गई है।
जानिये, किस राज्य की कौन सी प्रजाति
नई सूची में गाय की चार नस्लें शामिल हैं। कर्नाटक की कोप्पल, मध्य प्रदेश की महाकौशली, केरल की पेरियार व महाराष्ट्र की उमर्दा नस्ल को पंजीकृत किया है। भैंस की गोमांचली नस्ल गोवा से संबंधित है।
बकरियों में राजस्थान की तोतापुरी और उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली बत्तीसी नस्ल को जगह मिली है। भेड़ की चार नस्लों में असोमी असम, कोउ देबर उत्तराखंड, मडग्याल महाराष्ट्र और कर्नाटक तथा सीमांचली बिहार से संबंधित है।
अन्य प्रजातियों में उत्तर प्रदेश का ब्रज गधा, जम्मू-कश्मीर की कश्मीरी घोड़ा नस्ल यानी पोनी, नगालैंड का नागल सुअर, सिक्किम का सिक्किमी याक और तमिलनाडु का कोंबई कुत्ता शामिल है।
नौ प्रजातियों की 16 नस्लों का पंजीकरण
संस्थान के निदेशक डॉ. एनएच मोहन ने बताया कि इन नस्लों को पंजीकरण के बाद अलग-अलग परिग्रहण संख्या (एक्सेशन नंबर) भी आवंटित की गई है।
इससे इनकी विज्ञानी पहचान, दस्तावेजीकरण और भविष्य में अनुसंधान एवं संरक्षण का काम आसान होगा। नई नस्लों के जुड़ने के बाद देश में पंजीकृत पशुधन एवं कुक्कुट नस्लों की कुल संख्या 262 हो गई है। इनमें 258 स्वदेशी और चार सिंथेटिक नस्लें हैं। एनबीएजीआर देश में पशुधन और कुक्कुट नस्लों के पंजीकरण के लिए नोडल संस्थान है।
स्थानीय पशुपालकों को मिलेगा विशेषताओं का लाभ
नई पंजीकृत नस्लों की पहचान से पशुपालकों को क्षेत्रीय जलवायु के अनुकूल पशुओं के संरक्षण में मदद मिलेगी। गाय की कोप्पल, महाकौशली, पेरियार और उमर्दा नस्लों के गुणों का अध्ययन दुग्ध उत्पादन और स्थानीय पशुपालन को बेहतर बनाने में उपयोगी होगा।
गोमांचली भैंस, तोतापुरी व बत्तीसी बकरी और मडग्याल, असोमी, सीमांचली व कोउ देबर भेड़ की नस्लों का प्रजनन और संरक्षण को बढ़ावा देगा। इसी तरह ब्रज गधा, कश्मीरी पोनी, नागल सुअर, सिक्किमी याक और कोम्बई कुत्ते की पहचान से इनके विशिष्ट आनुवंशिक गुणों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
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