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हरियाणा में IPU-IVF तकनीक से बछिया 'बद्री' का हुआ जन्म, देसी नस्ल के संरक्षण को मिली नई ताकत

Published: Sat, 12 Sep 2026 11:16 AM (IST)

एनडीआरआई करनाल और पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पहली बार ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित कर स्वस्थ बद्री बछिया का जन्म कराया है।

करनाल की एनडीआरआइ में जन्मी बछिया बद्री l सौजन्य संस्थान।

करनाल की एनडीआरआइ में जन्मी बछिया बद्री l सौजन्य संस्थान।


HighLights

  1. एनडीआरआई और पंतनगर ने ओपीयू-आईवीएफ से बद्री बछिया का जन्म कराया

  2. यह तकनीक देसी बद्री गाय के आनुवंशिक उन्नयन में सहायक होगी

  3. साहीवाल गाय की कोख में बद्री भ्रूण का सफल प्रत्यारोपण हुआ

जागरण संवाददाता,करनाल। उत्तराखंड की देसी बद्री गाय के संरक्षण और आनुवंशिक उन्नयन की दिशा में करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआइ) और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर के वैज्ञानिकों ने पहली बार अंडाणु संग्रहण व प्रयोगशाला निषेचन (ओपीयू-आइवीएफ) तकनीक से तैयार बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय की कोख में प्रत्यारोपित कर स्वस्थ बद्री बछिया का जन्म कराया।

साहीवाल गाय ने पंतनगर में 11 सितंबर की सुबह तीन बजकर 10 मिनट पर बछिया को जन्म दिया। बद्री उत्तराखंड की देसी पशु नस्ल है और राज्य पशु का दर्जा प्राप्त है।

एनडीआरआइ के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि इस तकनीक से उत्कृष्ट आनुवंशिक गुणों वाली बद्री गायों के अंडाणु ले भ्रूण तैयार किए जा सकते हैं।

एनडीआरआइ व पंतनगर विव के वैज्ञानिकों की उपलब्धि, खास तकनीक से तैयार बद्री भ्रूण साहीवाल गाय की कोख में किया प्रत्यारोपित 

तीन साल में विकसित हुई ओपीयू-आइवीएफ तकनीक

बद्री नस्ल के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए दोनों संस्थानों ने वर्ष 2023 में संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम शुरू किया था। पंतनगर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. एमएस चौहान की पहल से शुरू हुए इस कार्यक्रम में तीन वर्षों के दौरान बद्री गाय में अंडाणु संग्रहण, प्रयोगशाला निषेचन, भ्रूण उत्पादन और भ्रूण प्रत्यारोपण की तकनीक विकसित की गई।

ऐसे पूरी हुई प्रत्यारोपण प्रक्रिया

कार्यक्रम के तहत चयनित बद्री दाता गायों से अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडाणु एकत्र किए गए। प्रयोगशाला में इन्हें परिपक्व कर उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से प्राप्त उत्कृष्ट बद्री सांड के वीर्य से निषेचित किया गया। तैयार भ्रूण को समकालिक की गई प्राप्तकर्ता गाय में प्रत्यारोपित किया गया। इसी प्रक्रिया से साहीवाल गाय की कोख से बद्री बछिया का जन्म हुआ।

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