जागरण संवाददाता, करनाल :

हरियाणा बाल कल्याण परिषद के मानद महासचिव कृष्ण ढुल ने निजी स्कूलों के संचालकों का आह्वान किया कि वे झुग्गी-झोपड़ी जैसी मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों को स्कूलों में दाखिला देकर उन्हें शिक्षित करें। क्योंकि देश का हर बच्चा बेशकीमती है।

उन्होंने पंचायत भवन में बाल कल्याण परिषद एवं प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन करनाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम समन्वय में बोल रहे थे। उन्होने कहा कि बाल भवन में पढ़ने वाले बच्चों की पुस्तकों से मदद की जा सकती है। ऐसी पुस्तकें उन बच्चों से लें, जो बच्चा एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाता है। दानवीर कर्ण की नगरी का वास्ता देते हुए महासचिव ने कहा कि स्कूलों में बच्चों से ली जाने वाली फीस के साथ बाल कल्याण परिषद के लिए भी कुछ अंश दान लिया जाता है, उसे परिषद में जमा करवा दें, क्योंकि परिषदों की वित्तीय स्थिति इतनी अच्छी नही है। उन्होने प्राइवेट स्कूलों को कॉर्पोरेट मेंबरशिप से जुड़ने का सुझाव दिया और कहा कि जिन स्कूलों में बच्चो की संख्या 500 तक है, वह 1100 रुपये, 500 से 1 हजार तक की संख्या वाले स्कूल 2100 रुपये तथा 1 हजार से ऊपर की संख्या वाले स्कूल 5100 रुपये से बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य बन सकते हैं। ऐसी राशि को आयकर अधिनियम की धारा 80-सी के तहत छूट प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि राज्य बाल कल्याण परिषद की मंशा है कि प्राईवेट स्कूलों के साथ एक बेहतर समन्वय स्थापित हो। इसके तहत ऐसे स्कूल जिनका शिक्षा व खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन रहता है, उन्हें राज्यपाल से सम्मानित कराएंगे। मेधावी बच्चों व स्कूल प्रबंधन को सम्मानित किया जाएगा। उन्होने कहा कि स्कूलो में हैल्प डैस्क स्थापित करें, जिनका संबंध बाल कल्याण से हो।

कृष्ण ढुल ने राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा बच्चों के कल्याणार्थ, वेलफेयर स्कीमों का भी जिक्र किया। इस दौरान एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक, जिला बाल कल्याण अधिकारी शिवानी सूद, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के जिला प्रधान राजन लांबा, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान सुरजीत सुभरी, महासचिव सुशील शर्मा व बाल कल्याण परिषद से जुड़ी सरोज मलिक उपस्थित थी।

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