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हरियाणा में 45 घंटे के ब्लैकआउट का अंत: उद्योगपतियों को 10 हजार करोड़ का नुकसान, आश्वासन के बाद काम पर लौटे कर्मचारी

Published: Sat, 24 Oct 2026 09:10 AM (IST)

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की 45 घंटे की हड़ताल से गहरा संकट छा गया, जिससे लाखों परिवारों की दिनचर्या प्रभावित ...और पढ़ें

फोटो: AI तकनीक की सहायता से तैयार की गई है।

फोटो: AI तकनीक की सहायता से तैयार की गई है।

HighLights

  1. 45 घंटे की हड़ताल से हरियाणा में बिजली संकट

  2. उद्योगों को 10 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान

  3. अस्पतालों में सर्जरी टली, पानी की किल्लत बढ़ी

जागरण टीम, हिसार। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल शुक्रवार देर शाम करीब साढ़े सात बजे भले ही समाप्त हो गई, लेकिन समझौते की मेज सजने से पहले के 45 घंटों ने पूरे प्रदेश को गहरे संकट में झोंक दिया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बीच पंचकूला स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई दूसरे दौर की वार्ता के बाद हड़ताल वापसी का एलान हुआ, मगर तब तक लाखों परिवारों की दिनचर्या पटरी से उतर चुकी थी।

दावे के अनुसार अकेले उद्योग जगत को इस दौरान 10 हजार करोड़ रुपये का फटका लगा है। बुधवार रात से शुरू हुआ यह संकट शुक्रवार शाम तक चरम पर पहुंच गया था। दर्जनों शहरों और सैकड़ों गांवों में बिजली के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति ठप रही।

इनवर्टर व मोबाइल डिस्चार्ज हो गए और आवश्यक सेवाओं का पहिया पूरी तरह थम गया। अस्पतालों में गंभीर मरीजों की सर्जरी टालनी पड़ी, तो हिसार व फरीदाबाद में आक्रोशित जनता ने सड़कों पर उतरकर मंत्रियों-विधायकों के आवास घेरे। भले ही अब बिजली बहाली शुरू हो गई है, लेकिन इन 40 घंटों में आम आदमी ने जो बेबसी झेली, उसने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।

कारोबार पर चोट

ई-वे बिलिंग अटकी, फैक्ट्रियों में पसरा सन्नाटा भिवानी, पानीपत और यमुनानगर के औद्योगिक क्षेत्रों में 36 घंटे से बिजली न मिलने से उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। भिवानी में फैक्ट्रियां बंद होने से प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों की ओर लौटने लगे।

यमुनानगर की प्लाईवुड व मेटल इंडस्ट्री में त्योहारी सीजन के आर्डर अटक गए। झज्जर व हिसार में दवा होलसेलरों के कंप्यूटर-प्रिंटर बंद रहने से ई-वे बिल और चालान नहीं कट सके, जिससे दवाइयों की सप्लाई रुक गई। पेट्रोल पंपों पर जनरेटर चलाकर ईंधन की आपूर्ति की गई।

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कहीं 900 रु. घंटे में मिला जनरेटर, कहीं फेरी लगाकर काटा चारा

बिजली गुल रहने से बूस्टिंग स्टेशन और सरकारी ट्यूबवेल बंद रहे, जिससे पूरे प्रदेश में पानी के लिए हाहाकार मच गया। जींद में लोग 800 से 900 रुपये प्रति घंटे के किराये पर जनरेटर मंगवाकर टंकियां भरने को विवश हुए।

नए बस स्टैंड पर पानी खत्म होने के कारण यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा। पानीपत के ग्रामीण इलाकों में अनूठा नजारा दिखा; फल-सब्जी की तरह ट्रैक्टर पर जनरेटर बांधकर फेरी वाले घूमे ।

हजारों लीटर डीजल फूंका अल्ट्रासाउंड ठप रहे बिजली संकट की सबसे बड़ी मार स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ी। कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में 24 घंटे में जनरेटर चलाने के लिए 1000 लीटर से अधिक डीजल (करीब 1 लाख रुपये) खर्च हुआ।

इसके बावजूद लिफ्ट बंद रही, सीटी स्कैन-एमआरआइ बाधित हुए और अल्ट्रासाउंड मशीनें बंद रहने से 100 से अधिक मरीजों को बिना जांच लौटना पड़ा। विद्यार्थी अस्पताल परिसर में लैपटाप लेकर पढ़ाई करते और लोग मोबाइल चार्ज करते दिखे।

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पुलिस ने चालू किए सब-स्टेशन

रेवाड़ी के सूबासेडी सब-स्टेशन को एक पूर्व बिजली कर्मी रह चुके पुलिस जवान ने रिस्टोर कराया, जबकि गोहाना के रुखी गांव में दिल्ली से रिटायर्ड कर्मचारी की मदद से बिजली चालू करवाई गई।

रामलीला में जनरेटर: यमुनानगर के जगाधरी में बिजली गुल होने की आशंका के चलते श्रीराम के राजतिलक मंचन के लिए दो विशेष जनरेटर मंगवाने पड़े।

  • ब्रह्मसरोवर बंद: कुरुक्षेत्र में सुरक्षा कारणों से रात 11 बजे ही ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर में प्रवेश बंद कर दिया गया।
  • महेंद्रगढ़ : नारनौल में डीसी और एसपी खुद कर्मचारियों के बीच पहुंचे और व्यवस्था चलाने के लिए हाथ जोड़कर 15 कर्मी उपलब्ध कराने की मिन्नतें कीं।
  • करनाल: असंध और निसिंग में बिजली किल्लत से परेशान जनता ने मुख्य मार्गों पर जाम लगाया; कंट्रोल रूम में 10 हजार शिकायतें बिना समाधान के अटकी रहीं।
  • रेवाड़ी: चार्जिंग न होने से बावल रूट की ई-बसें डिपो में खड़ी रहीं; एक पुलिसकर्मी ने सूबासेडी सब-स्टेशन रिस्टोर कर 22 गांवों की बत्ती जलाई।
  • गुरुग्राम व नूंह: आधी रात तक नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की; मोमबत्ती की रोशनी में दुकानें खुलीं और आनलाइन पेमेंट ठप रही।
  • झज्जर: सासरोली 33 केवी पंप हाउस बंद होने से दर्जनभर गांव प्यासे रहे; शहर में सीएनजी पंप बंद होने और रातभर ब्लैकआउट से हाहाकार मचा रहा।
  • फतेहाबाद: टोहाना, भूना व जाखल में सड़कों पर प्रदर्शन हुए; भिरड़ाना गांव में सप्लाई ठप होने से गुस्साए ग्रामीणों ने डीसी कार्यालय पर धरना दे दिया।
  • पानीपत: किसानों-कर्मचारियों का प्रदर्शन हुआ; कालोनियों व बाजारों में ब्लैकआउट रहा और 460 मेगावाट थर्मल उत्पादन ठप हो गया।
  • यमुनानगर: जगाधरी बस स्टैंड पर जाम के दौरान पुलिस लाठीचार्ज; हिरासत में लिए युवक को छुड़ाने के लिए महिलाएं दुधमुंहे बच्चों समेत पुलिस वाहन के आगे अड़ गईं।
  • हिसार-हांसी: व्यापारियों ने रास्ता रोका, कैमरी रोड पर कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा का घेराव हुआ; हांसी के जिला सचिवालय व अस्पताल जनरेटर के सहारे चले।
  • जींद: पटियाला चौक पर दुकानदारों ने चक्का जाम कर नारेबाजी की, नए बस स्टैंड पर पानी खत्म होने से अंधेरे में टार्च जलाकर काम करना पड़ा।
  • फरीदाबाद: मस्जिद चौक पर एनआइटी-3 की सैकड़ों महिलाओं ने हाथ पकड़कर सड़क रोकी और पूर्व मंत्री व विधायक मूलचंद शर्मा के आवास का घेराव किया।
  • सोनीपत-गोहाना: सुभाष चौक व दिल्ली रोड पर दुकानदारों ने जाम लगाया; गोहाना के रुखी गांव में दिल्ली से रिटायर्ड कर्मी की मदद से पुलिस ने सप्लाई चालू कराई।

बिजली-पानी संकट पर हाहाकार को लेकर हमलावर हुए ढांडा

हड़ताल से बिजली-पानी संकट पर मचे को हाहाकार लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा हमलावर हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नूंह और गुरुग्राम में जिस निजी कंपनी को बिजली वितरण का पैरलल लाइसेंस दिया गया है, उसके पास न कोई अनुभव है और न कंपनी वित्तीय क्षमता मानकों पर खरी उतर रही है।

ढांडा ने कहा कि पिछले 36 घंटे से गुरुग्राम, अंबाला, रोहतक, हिसार, करनाल, कुरुक्षेत्र समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से बिजली-पानी की किल्लत की शिकायतें आ रही हैं।

सवाल यह है कि सरकार इलेवन पावर्स प्राइवेट लि. पर मेहरमान क्यों है। कंपनी की पेड-अप कैपिटल एक करोड़ रुपये बताई जा रही है, कंपनी लगभग 4700 करोड़ के निवेश की बात कर रही है। कंपनी को 25 साल के लिए बिजली वितरण की जिम्मेदारी दिया जाना हैरान कर देने वाला है।

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