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वाटिका ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग केस: गुरुग्राम में अदालत ने भल्ला बंधुओं को 3 दिन और ED कस्टडी में भेजा

By Mahavir YadavEdited By: Kapil Kumar
Published: Sun, 04 Oct 2026 11:22 AM (IST)

वाटिका ग्रुप के निदेशक अनिल और गौतम भल्ला को चार दिन की ईडी रिमांड पूरी होने के बाद गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया।

वाटिका ग्रुप के निदेशक अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को 3 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा। AI जनरेटेड

वाटिका ग्रुप के निदेशक अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को 3 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा। AI जनरेटेड

HighLights

  1. वाटिका निदेशकों को चार दिन बाद पीएमएलए अदालत में पेश किया।

  2. ईडी ने सात दिन की अतिरिक्त रिमांड मांगी, तीन दिन मिली।

  3. आरोपियों से 5 अक्टूबर को शाम 4 बजे फिर पेशी होगी।

महावीर यादव, बादशाहपुर (गुरुग्राम)। गुरुग्राम में वाटिका ग्रुप के निदेशक अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को चार दिन की ईडी रिमांड पूरी होने के बाद विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दोनों आरोपियों की 7 दिन की अतिरिक्त कस्टडी मांगी थी। अदालत ने ईडी की जांच की प्रगति और आगे की पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए दोनों को 3-3 दिन की अतिरिक्त ईडी कस्टडी में भेज दिया। अब दोनों आरोपियों को 5 अक्टूबर को शाम 4 बजे अदालत में पेश करना होगा।

कई लोगों से पूछताछ बाकी

ईडी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि 4 दिन की कस्टडी के दौरान आरोपियों से पूछताछ की गई और पीएमएलए की धारा 50 के तहत कई लोगों के बयान दर्ज किए गए। ईडी के मुताबिक, मामले से संबंधित दस्तावेजों और लेन-देन का रिकॉर्ड काफी बड़ा है। अभी आरोपितों से दस्तावेजों के आधार पर और पूछताछ करनी है।

ईडी ने यह भी बताया कि मामले से जुड़े करीब 10 अन्य लोगों को नोटिस देकर बुलाया गया है। इन लोगों के धारा 50 के तहत बयान दर्ज किए जाने हैं। ईडी का कहना था कि इन बयानों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों से दोबारा पूछताछ कर उन्हें संबंधित व्यक्तियों और दस्तावेजों से आमना-सामना कराया जाना जरूरी है।

जांच एजेंसी ने अदालत से कहा कि इससे कथित अपराध से अर्जित राशि का पता लगाने और मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सत्यापित करने में मदद मिलेगी।

अदालत ने 7 दिन की मांग पूरी तरह नहीं मानी

ईडी ने दोनों आरोपियों की 7 दिन की अतिरिक्त कस्टडी मांगी थी। बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच मुख्य रूप से दस्तावेजों पर आधारित है और ईडी के पास पहले से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि 4 दिन की कस्टडी के दौरान आरोपियों से पर्याप्त पूछताछ हो चुकी है और आगे की हिरासत की जरूरत नहीं है।

विशेष न्यायाधीश एवं पीएमएलए अदालत के जज नरेंद्र सुरा ने जांच अधिकारी की ओर से पेश की गई केस फाइल और पिछले चार दिनों की जांच की प्रगति का अवलोकन किया।

अदालत ने माना कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए कुछ अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाने हैं और उनके बयानों को आरोपियों के सामने रखकर तथ्यों की पुष्टि के लिए पूछताछ की जरूरत हो सकती है। हालांकि, अदालत ने ईडी की 7 दिन की मांग को स्वीकार नहीं किया और दोनों आरोपियों को केवल 3 दिन की अतिरिक्त ईडी कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।

वकील और परिजनों से मुलाकात की अनुमति

अदालत ने ईडी को निर्देश दिया कि पूछताछ शुरू करने से पहले आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया जाए। आरोपियों की कस्टडी किसी अन्य एजेंसी को अदालत की अनुमति के बिना नहीं सौंपी जाएगी। साथ ही वकील और परिवार के सदस्यों को रोजाना सुबह 9 से 10 बजे तक मुलाकात की अनुमति देने के निर्देश दिए गए हैं। किसी मेडिकल आवश्यकता की स्थिति में दवा और उपचार उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया गया है।

ईडी ने दोनों को 28 सितंबर को गिरफ्तार किया था। 29 सितंबर को पहली पेशी पर अदालत ने 4 दिन की ईडी रिमांड मंजूर की थी। अवधि पूरी होने के बाद दोनों को दोबारा अदालत में पेश किया गया।

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