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सोहना में अंधेरा: हजारों स्ट्रीट लाइटें स्टोर रूम में कैद, जनता परेशान

Published: Thu, 29 Oct 2026 04:15 PM (IST)

सोहना नगरपरिषद द्वारा खरीदी गईं करीब दो हजार स्ट्रीट लाइटें स्टोर रूम में धूल फांक रही हैं, जबकि शहर के ...और पढ़ें

सोहना में अंधेरा ( एआई जेनरेटेड इमेज )

सोहना में अंधेरा ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. 2000 स्ट्रीट लाइटें सोहना स्टोर में धूल फांक रही हैं।

  2. शहर के कई इलाकों में रात में अंधेरा रहता है।

  3. भुगतान मंजूरी लंबित होने से लाइटें नहीं लग पा रही हैं।

सतीश राघव, सोहना। शहर की गलियों और चौक-चौराहों को रोशन करने के लिए खरीदी गई करीब दो हजार स्ट्रीट लाइटें नगरपरिषद के स्टोर रूम में धूल फांक रही हैं, जबकि शहर के कई हिस्सों में रात होते ही अंधेरा छा जाता है।

नई लाइटें लगाने के बजाय उन्हें महीनों से स्टोर में रखने के मामले ने नगरपरिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जनता के पैसे से खरीदी गई लाइटें उपयोग में आने के बजाय खराब होने के कगार पर पहुंच रही हैं।

स्ट्रीट लाइटें खरीदने का प्रस्ताव जारी

कई माह पहले नगरपरिषद की बोर्ड बैठक में पांच हजार स्ट्रीट लाइटें खरीदने का प्रस्ताव पारित हुआ था। डीएमसी गुरुग्राम से मंजूरी मिलने के बाद परिषद ने निर्धारित एजेंसी से लाइटें खरीद लीं। बाद में टेंडर प्रक्रिया के जरिए इन्हें शहर के विभिन्न वार्डों में लगाने का काम भी एजेंसी को सौंपा गया।

एजेंसी ने कुछ लाइटें लगाईं, लेकिन काम पूरा नहीं किया। इसके बाद करीब दो हजार लाइटें अब भी स्टोर रूम में पड़ी हैं। दूसरी ओर नगरपरिषद क्षेत्र के कई इलाकों में खराब अथवा अपर्याप्त स्ट्रीट लाइटों के कारण रात में अंधेरा रहता है। सुनसान गलियों और रास्तों से गुजरने वाले लोगों को परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बनी रहती हैं।

भुगतान की मंजूरी लंबित, खरीद पर उठे सवाल

शहरवासियों विकास गुप्ता, ओमप्रकाश ओमी, पूर्व पार्षद रोहतास जैन, दिनेश गुप्ता, विनोद राघव, संजय गर्ग, हरपाल पहलवान, सरदार अवतार सिंह, अजीत सिंह, पप्पी खट्टर और विनोद गर्ग ने मामले की जांच की मांग की है।

उनका सवाल है कि जब शहर में लाइटों की जरूरत थी तो खरीदी गई लाइटों को स्टोर में रखने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये की लाइटें खराब होकर कबाड़ बनने से पहले इन्हें लगाया जाना चाहिए। बताया जाता है कि 50 लाख रुपये से अधिक के खर्च के भुगतान की मंजूरी शहरी स्थानीय निकाय विभाग से और 50 लाख रुपये तक के खर्च की मंजूरी डीएमसी गुरुग्राम स्तर से होती है।

अब खरीद और भुगतान से संबंधित आवश्यक मंजूरी शहरी स्थानीय निकाय विभाग से लंबित बताई जा रही है। इस बारे में नगरपरिषद के कार्यकारी अभियंता महेंद्र सिंह का कहना है कि स्ट्रीट लाइटों की खरीद से संबंधित मंजूरी शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा से मिलनी है। अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलते ही स्टोर में रखी लाइटों को शहर में स्थापित करा दिया जाएगा।

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