शहर अंधेरे में और स्टोर रूम में बंद हैं दो हजार स्ट्रीट लाइटें, सोहना नगरपरिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल
सोहना नगरपरिषद द्वारा खरीदी गई लगभग दो हजार स्ट्रीट लाइटें स्टोर रूम में धूल चाट रही हैं, जिससे शहर के ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
सोहना में दो हजार स्ट्रीट लाइटें स्टोर रूम में धूल फांक रही हैं।
शहर की गलियां अंधेरे में डूबी, आपराधिक घटनाओं का खतरा।
लाइटें लगाने की मंजूरी शहरी स्थानीय निकाय विभाग से लंबित।
सतीश राघव, सोहना (सोहना)। शहर की गलियों और चौक-चौराहों को रोशन करने के लिए खरीदी गई करीब दो हजार स्ट्रीट लाइटें सोहना नगरपरिषद के स्टोर रूम में धूल चाट रही हैं। दूसरी ओर शहर के कई हिस्सों में रात के समय स्ट्रीट लाइटें नहीं जलने के कारण अंधेरा पसरा रहता है।
ऐसे में नगरपरिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण जनता के पैसे से खरीदी गई लाइटें उपयोग में आने के बजाय स्टोर रूम में पड़ी हैं।
कई माह पहले नगरपरिषद की बोर्ड बैठक में पांच हजार स्ट्रीट लाइटें खरीदने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसकी मंजूरी डीएमसी गुरुग्राम की ओर से दी गई थी। इसके बाद परिषद अधिकारियों ने निर्धारित एजेंसी से लाइटें खरीद लीं।
लाइटों को शहर के विभिन्न वार्डों में लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से एजेंसी को काम भी सौंपा गया। एजेंसी ने कुछ लाइटें लगाने के बाद काम पूरा नहीं किया। इसके चलते करीब दो हजार लाइटें अब भी स्टोर रूम में पड़ी हैं।
कई इलाकों में रात के समय पसरा रहता है अंधेरा
नगरपरिषद क्षेत्र के कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें नहीं होने अथवा खराब होने के कारण रात में अंधेरा रहता है। लोगों को अंधेरे में आवागमन करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुनसान गलियों और रास्तों पर अंधेरे के कारण आपराधिक घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।

इसके बावजूद स्टोर में रखी नई लाइटों को लगाने की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का सवाल है कि जब लाइटों की खरीद और भुगतान के लिए जिला स्तर पर पूरी अनुमति उपलब्ध नहीं थी, तो इन्हें पहले ही क्यों खरीद लिया गया।
अब इन लाइटों को लगाने की अनुमति कब मिलेगी और इसकी जिम्मेदारी किसकी है, इसका जवाब भी नगरपरिषद को देना चाहिए।
लाखों रुपये की लाइटें कबाड़ बनने पर उठे सवाल
शहरवासियों विकास गुप्ता, ओमप्रकाश ओमी, पूर्व पार्षद रोहतास जैन, दिनेश गुप्ता, विनोद राघव, संजय गर्ग, हरपाल पहलवान, सरदार अवतार सिंह, अजीत सिंह, पप्पी खट्टर और विनोद गर्ग ने परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि जब शहर को लाइटों की जरूरत है तो खरीदी गई लाइटों को स्टोर रूम में रखना समझ से परे है। लाखों रुपये की लाइटें खराब होने या कबाड़ बनने से पहले उन्हें शहर में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
बताया जाता है कि 50 लाख रुपये से अधिक के खर्च के भुगतान की मंजूरी शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से दी जाती है, जबकि डीएमसी गुरुग्राम को 50 लाख रुपये तक के खर्च के भुगतान का अधिकार है।
नगरपरिषद की ओर से लाइटें खरीदे जाने के बाद अब भुगतान और खरीद संबंधी आवश्यक अनुमति शहरी स्थानीय निकाय विभाग से लंबित बताई जा रही है। इस बारे मे नगरपरिषद के कार्यकारी अभियंता महेंद्र सिंह का कहना है कि स्ट्रीट लाइटों की खरीद से संबंधित मंजूरी शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा की ओर से दी जानी है।
अभी तक यह मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलते ही स्टोर में रखी लाइटों को शहर में स्थापित करा दिया जाएगा।
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