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शुभि केसरीवानी की जल संरक्षण मुहिम: गुरुग्राम में बदली सोच, बनीं प्रेरणा

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:32 AM (IST)

गुरुग्राम की शुभि केसरीवानी ने गुरुजल संस्था के माध्यम से जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वह तालाबों के ...और पढ़ें

जल संरक्षण की मुहिम से बदली सोच, शुभि केसरीवानी बनीं पानी बचाने की मिसाल ( फोटो स्रोत : जागरण )

जल संरक्षण की मुहिम से बदली सोच, शुभि केसरीवानी बनीं पानी बचाने की मिसाल ( फोटो स्रोत : जागरण )

HighLights

  1. शुभि केसरीवानी जल संरक्षण की मुहिम में गुरुग्राम की मिसाल बनीं।

  2. गुरुजल संस्था तालाबों के पुनर्जीवन और वर्षाजल संचयन पर केंद्रित है।

  3. भूजल पुनर्भरण और अपशिष्ट जल उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आदित्य राज, गुरुग्राम। पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझना और उसे बचाने के लिए जमीन पर काम करना, यही सोच गुरुग्राम की शुभि केसरीवानी की पहचान बन गई है।

तेजी से बढ़ते शहरों में गिरता भूजल स्तर, सिमटते तालाब और वर्षा के दौरान जलभराव जैसी चुनौतियों के बीच उन्होंने जल संरक्षण को अपने कार्य का केंद्र बनाया।

गुरुजल संस्था की सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में वह तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षाजल संचयन और अपशिष्ट जल के उपचार एवं पुनः उपयोग के माध्यम से जल संकट का स्थायी समाधान तलाश रही हैं।

समाज की भागीदारी जरूरी

उनकी पहल बताती है कि पानी बचाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, प्रशासनिक सहयोग और समाज की भागीदारी भी जरूरी है।

शुभि ने अमेरिका के प्रतिष्ठित कोलंबिया विश्वविद्यालय से सतत विकास प्रबंधन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने वर्ष 2021 में इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया और 2022 में शिक्षा पूरी की। पढ़ाई के दौरान भारतीय विद्यार्थियों के संगठन की अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

पर्यावरण संबंधी चुनौतियों को प्रशासन, वित्तीय संसाधनों और समुदाय की भागीदारी से हल करने की उनकी सोच ने आगे चलकर गुरुजल के काम को दिशा दी। गुरुजल की शुरुआत वर्ष 2019 में गुरुग्राम जिला प्रशासन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी की पहल के रूप में हुई।

पुनर्जीवन से संबंधित प्रस्ताव तैयार किए गए

संस्था ने तालाबों के पुनर्जीवन के लिए प्राकृतिक जल उपचार तकनीकों और स्थानीय वनस्पतियों के उपयोग जैसे उपायों पर काम किया। गुरुग्राम और फरीदाबाद में 80 से अधिक तालाबों के पुनर्जीवन से संबंधित प्रस्ताव तैयार किए गए।

उद्देश्य केवल तालाबों से गाद और कचरा हटाना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के योग्य बनाना था। जुलाई 2023 में गुरुजल स्वतंत्र संस्था के रूप में विकसित हुई और हरियाणा से बाहर भी काम का विस्तार किया।

संस्था की वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 18 सक्रिय परियोजनाओं पर काम किया गया। रिपोर्ट में प्रतिवर्ष 2.526 करोड़ लीटर भूजल पुनर्भरण, 6.39 करोड़ लीटर अपशिष्ट जल के उपचार एवं पुनः उपयोग और 54 लाख लीटर वर्षाजल प्रबंधन से जुड़ी क्षमता का उल्लेख है।

आंकड़ों से आगे जल संरक्षण की सोच बदलने पर जोर

शुभि की पहल का दायरा जल संरचनाओं के विकास तक सीमित नहीं है। छतों और खुले क्षेत्रों से बारिश के पानी को एकत्र करना, उसे जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करना और उपचारित अपशिष्ट जल का गैर-पेय कार्यों में दोबारा उपयोग बढ़ाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

इसके साथ ही युवाओं और स्थानीय समुदायों को जल संरक्षण से जोड़ने के लिए जल साक्षरता कार्यक्रम तथा ‘वी फार वाटर फेलोशिप’ के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। उनके काम को विभिन्न स्तरों पर पहचान भी मिली है। वर्ष 2022 में शुभि केसरीवानी को हीरो समूह सामाजिक प्रभाव पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

संस्था को वर्ष 2019 में शासन एवं प्रशासन से जुड़े कार्यों के लिए स्काच स्वर्ण पुरस्कार और वर्ष 2024 में कलाग्राम हरित प्रभाव पुरस्कार मिला।

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