गुरुग्राम, जेएनएन। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब सीमा पार से आतंकियों को भेजना व जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करना आतंकी संगठनों के लिए मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में आतंकी संगठनों द्वारा ड्रोन के माध्यम से हमला करने की आशंका तेजी से बढ़ रही है। इसे लेकर भारत कितना सतर्क है, क्या हमला करने से पहले ही ड्रोन को निष्क्रिय किया जा सकता है, एनएसजी के सुरक्षा बेड़े में शामिल Rook गाड़ी को क्या कश्मीर में तैनात किया जाएगा? सहित कई सवालों को लेकर दैनिक जागरण गुरुग्राम के संवाददाता आदित्य राज ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के साथ ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के महानिदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे एसएस देसवाल से विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है मुख्य अंश :

कश्मीर से अनुच्छे 370 हटाए जाने के बाद कितना चुनौतियां बढ़ी हैं।

- पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियां को बंद करने से बाज नहीं आ रहा है। वह सीधी लड़ाई नहीं लड़ सकता इसलिए छोटी हरकत करता रहता है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की फसल उगाना पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठनों के लिए आसान था। अब ऐसा करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में वह ड्रोन के माध्यम से हमले करने की साजिश रच सकता है। कश्मीर में संभावित आतंकी हमले को देखते हुए वहां पर भी एनएसजी का एक रीजनल हब स्थापित किया गया है, ताकि कम से कम समय में आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। 26 नवंबर 2008 में मुंबई अटैक के बाद मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद एवं कोलकाता में रीजनल हब बनाए गए हैं।

क्या देश किसी भी स्तर पर ड्रोन हमले से निपटने में पूरी तरह सक्षम है?

- देश की सेना के साथ ही सभी अर्ध सैनिक बल हर स्थिति का सामना करने को तैयार हैं। जहां तक ड्रोन हमले का सवाल है तो देश हमला करने से पहले ही इसे निष्क्रिय करने में सक्षम है। हमला होने से पहले ही पता चल जाएगा। देश में तकनीकी इतनी विकसित हो चुकी है कि ड्रोन हमले का हर स्तर पर मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। एनएसजी के स्थापना दिवस समारोह मेंं ड्रोन हमले का डेमो भी प्रदर्शित कर यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि देश के पास सुरक्षा के संबंधित सभी तकनीक उपलब्ध हैं।

बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों को ध्यान में रखकर एनएसजी का किस स्तर पर तैयारी है?

- अब एनएसजी में विभिन्न बलों से मनोवैज्ञानिक जांच के बाद ही जवान लिए जाते हैं। वे मानसिक रूप से कितने सक्षम हैं, इसकी जांच की जाती है। मानसिक मजबूती आवश्यक है क्योंकि आतंकवाद का रूप तेजी से बदल रहा है। परिस्थिति के मुताबिक जवाब देना है, इसके लिए मानसिक रूप से मजबूत होना आवश्यक है। वीवीआइपी लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एनएसजी के पास है। ऐसी स्थिति में हर तरह के संभावित खतरों के प्रति सक्रिय रहना होता है।

ऐसा नहीं लगता है कि एनएसजी के ऊपर दिन प्रतिदिन दबाव बढ़ता जा रहा है?

- देखिए, सभी अर्ध सैनिक बल बेहतर कर रहे हैं। एनएसजी का गठन ही त्वरित कार्रवाई के लिए किया गया है। इस हिसाब से इसे सभी प्रकार के अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए गए हैं। हाल में रूक गाड़ी सुरक्षा बेड़े में शामिल हुई है। यदि आतंकवादी किसी इमारत में छिपे हों तो उनसे अपना बचाव करते हुए कमांडो बेहतर तरीके से ऑपरेशन चला सकेंगे। कश्मीर में इस गाड़ी का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। 35 साल के दौरान एनएसजी ने 115 आपरेशन में भाग लिया। 60 से अधिक आतंकवादियों को आपरेशन के दौरान मार गिराया है।

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Posted By: JP Yadav

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