100 करोड़ के कारोबार का खुलासा, गुरुग्राम में मिडविजन प्राइवेट लिमिटेड पर एफडीए का छापा
गुरुग्राम में मिडविजन प्राइवेट लिमिटेड के निरीक्षण में एफडीए को 100 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के साक्ष्य मिले ...और पढ़ें
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मिडविजन के 100 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के साक्ष्य मिले। AI जनरेटेड इमेज
HighLights
मिडविजन के 100 करोड़ से अधिक कारोबार के साक्ष्य।
केंद्रीय एफएसएसएआई लाइसेंस की पुष्टि नहीं हुई।
नौ खाद्य उत्पादों की लेबलिंग पर मिसब्रांडिंग का संदेह।
वरुण त्रिवेदी, गुरुग्राम। फाजिलपुर झाड़सा स्थित मिडविजन प्राइवेट लिमिटेड के निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को 100 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के साक्ष्य मिले हैं।
वहीं, निरीक्षण के दौरान कंपनी के पास हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लाइसेंस संबंधी दस्तावेज मिले, लेकिन गुरुग्राम से जारी केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के लाइसेंस की पुष्टि नहीं हो सकी।
इसके बाद विभाग ने कंपनी के वास्तविक खाद्य कारोबार, लाइसेंस की श्रेणी और उत्पादों की लेबलिंग से जुड़े मामलों की जांच तेज कर दी है।
केंद्रीय लाइसेंस अनिवार्य
एफएसएसएआइ के निर्धारित मानदंडों के अनुसार, सालाना 50 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाले खाद्य कारोबारियों के लिए केंद्रीय लाइसेंस अनिवार्य है। ऐसे में कंपनी के दस्तावेजों में सामने आए कारोबार के आंकड़े और उपलब्ध लाइसेंस की स्थिति जांच के दायरे में हैं।
विभाग यह भी पता लगाएगा कि कंपनी का वास्तविक खाद्य उत्पाद कारोबार कितना है और उसके लिए किस श्रेणी का लाइसेंस आवश्यक है। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर 10 देशों में कारोबार होने का दावा भी किया है।
9 खाद्य उत्पादों की लेबलिंग पर संदेह
निरीक्षण के दौरान कंपनी के नौ खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और उन पर किए गए दावों को लेकर प्रथम दृष्टया गलत ब्रांडिंग (मिसब्रांडिंग) का संदेह सामने आया है। वेबसाइट पर उत्पादों से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी दावों के समर्थन में अपेक्षित दस्तावेज भी निरीक्षण के समय प्रस्तुत नहीं किए गए।
विभाग ने नौ खाद्य और नौ सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। खाद्य उत्पादों के नमूने चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। विभागीय अधिकारी अब कंपनी के परिसर से जब्त दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं।
जांच के निष्कर्षों और दस्तावेजों के आधार पर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने में करीब 45 दिन लग सकते हैं। रिपोर्ट और लाइसेंस संबंधी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

विभाग जल्द ही कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब तलब करेगा। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने में लगभग 45 दिन लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, केंद्रीय लाइसेंस की अनिवार्यता और उत्पादों की लेबलिंग से जुड़े मामलों की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कंपनी की लाइसेंस संबंधी स्थिति और अन्य अनियमितताओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। - डॉ. सुरेश कुमार, औषधि नियंत्रण अधिकारी, गुरुग्राम-2
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