गुरुग्राम: एफडीए की रेड में फंसी 'मिड्यूटी' कंपनी, वेबसाइट पर किए जा रहे बड़े दावों के नहीं मिले सबूत
गुरुग्राम में मिडविजन प्राइवेट लिमिटेड के मिड्यूटी ब्रांड के उत्पादों पर वेबसाइट पर किए गए बड़े-बड़े स्वास्थ्य दावों की एफडीए ...और पढ़ें
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जांच में प्रमाण के पन्ने गायब। जागरण
HighLights
मिड्यूटी उत्पादों के बड़े स्वास्थ्य दावों की एफडीए जांच।
कंपनी वैज्ञानिक प्रमाण, नियामकीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी।
नौ खाद्य उत्पादों पर मिसब्रांडिंग का संदेह, नमूने लिए।
वरुण त्रिवेदी, गुरुग्राम। वेबसाइट पर उत्पादों के ऐसे-ऐसे फायदे कि नसों और जोड़ों के दर्द से राहत मिले, फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधरे, लिवर डिटाक्स हो और रक्त में शुगर भी नियंत्रित रहे। दावे सेहत सुधारने के थे, लेकिन जब इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण और नियामकीय दस्तावेज मांगे गए तो निरीक्षण के दौरान अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
अब गुरुग्राम के फाजिलपुर झाड़सा स्थित मिडविजन प्राइवेट लिमिटेड के मिड्यूटी ब्रांड के उत्पाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की जांच के दायरे में हैं।
एफडीए गुरुग्राम की टीम ने कंपनी की वेबसाइट www.miduty.in पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी दावों की पड़ताल के लिए कंपनी परिसर का निरीक्षण किया। जांच में नौ खाद्य उत्पादों के मिसब्रांडिंग से संबंधित होने का संदेह जताया गया है। यानी मामला केवल उत्पाद बेचने का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के सामने पेश किए जा रहे दावों की सत्यता और नियामकीय नियमों के पालन का भी है।
दावों की लंबी फेहरिस्त
कंपनी की वेबसाइट पर कुछ उत्पादों को कब्ज से राहत, फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार, लिवर डिटाक्स, रक्त में शुगर नियंत्रण और त्वचा की रंजकता कम करने में सहायक बताया गया था। कुछ दावे नसों और जोड़ों के दर्द में राहत से भी जुड़े थे।
एफडीए अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कुछ दावे सामान्य पोषण संबंधी लाभ से आगे बढ़कर बीमारियों की रोकथाम, उपचार या लक्षणों में राहत का संकेत देते प्रतीत हुए। ऐसे में अधिकारियों ने कंपनी के प्रतिनिधि से दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण और संबंधित नियामकीय दस्तावेज मांगे।
वहीं, निरीक्षण के समय अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके। अब जांच में यह परखा जाएगा कि उत्पादों के बारे में किए गए दावों का वैज्ञानिक आधार क्या है और वे निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
नौ खाद्य, नौ कास्मेटिक उत्पादों के नमूने लिए
एफडीए गुरुग्राम के आयुक्त डॉ. मनोज यादव के निर्देश पर की गई कार्रवाई में पांच अधिकारी शामिल रहे। टीम में एफडीए गुरुग्राम के वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी गुरचरण सिंह, औषधि नियंत्रण अधिकारी डॉ. अमनदीप चौहान, डॉ. सुरेश कुमार, मुकेश कुमार और खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. दीपक शामिल थे। नौ खाद्य और नौ कास्मेटिक उत्पादों के नमूने जांच के लिए लिए।
कंपनी का एफएसएसएआइ लाइसेंस, जीएसटी प्रमाणपत्र, पंजीकरण प्रमाणपत्र और वर्तमान निदेशकों से संबंधित विवरण भी एकत्र किया गया। खाद्य उत्पादों की जांच खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत की जा रही है। साथ ही, खाद्य और कास्मेटिक उत्पादों तथा उनसे जुड़े विज्ञापनों के नियामकीय अनुपालन की भी पड़ताल होगी।
अब नोटिस से खुलेगा दावों का हिसाब
औषधि नियंत्रण अधिकारी, गुरुग्राम -2 डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि एफडीए की ओर से कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। उसके जवाब और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सवाल छोड़ता है यह मामला
ई-कॉमर्स वेबसाइट और इंटरनेट मीडिया पर किसी उत्पाद के विज्ञापन में बीमारी से राहत का दावा देखकर भरोसा करने से पहले उपभोक्ता के लिए यह जानना जरूरी है कि उसके पीछे पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण हैं या नहीं। फिलहाल, मिड्यूटी के उत्पादों के बारे में अंतिम निष्कर्ष नमूनों की जांच और विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
