कृषि जोन की बंदिशें बनीं विकास में बाधा, मानेसर के चार गांवों की मांग
गुरुग्राम-मानेसर के चार गांव (मोकलवास, खरखड़ी, पुखरपुर, बासलांबी) 2004 से कृषि जोन की बंदिशों के कारण विकास से वंचित हैं, ...और पढ़ें

कृषि जोन की बंदिशें बनीं विकास में बाधा ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
मानेसर के चार गांव कृषि जोन में फंसे।
2004 से व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगी।
ग्रामीणों ने जोन हटाने की मांग की।
जागरण संवाददाता, मानेसर। गुरुग्राम और मानेसर के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के बीच पचगांव चौक से जमालपुर के बीच बसे चार गांवों के किसान करीब दो दशक पुरानी कृषि जोन की बंदिशों से परेशान हैं।
मोकलवास, खरखड़ी, पुखरपुर और बासलांबी की जमीन वर्ष 2004 में कृषि जोन में शामिल की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय की परिस्थितियों में लिया गया निर्णय अब क्षेत्र के विकास में बाधा बन रहा है। किसानों ने कृषि जोन की दोबारा समीक्षा कर इसे हटाने की मांग की है।
जमीन अधीग्रहण की प्रक्रिया जारी
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2004 में इन गांवों की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही थी। किसानों के विरोध के बाद जमीन को अधिग्रहण से बचाने के लिए कृषि जोन में शामिल कर दिया गया। उस समय गुरुग्राम और मानेसर का विस्तार आज की तरह नहीं था।
अब आइएमटी मानेसर, केएमपी एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे के आसपास तेजी से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी हैं। इसके बावजूद इन चार गांवों में कृषि के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए अनुमति नहीं मिल पा रही है।
आसपास के गांवों में बढ़े रोजगार के अवसर
किसानों का कहना है कि आसपास के गांवों में वेयरहाउस, निजी उद्योग और व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो चुके हैं। इससे वहां रोजगार और आय के नए साधन बने हैं।
वहीं, कृषि जोन में शामिल चार गांवों के किसान अपनी जमीन का व्यावसायिक उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को पुराने प्रावधानों की समीक्षा करनी चाहिए।
कृषि जोन हटाने की मांग को लेकर ग्रामीण पहले भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र दे चुके हैं। अब किसानों ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और पटौदी विधायक बिमला चौधरी को पत्र भेजकर फिर मांग उठाई है।
आसपास के गांवों में रोजगार के साधन उपलब्ध हो गए हैं। लेकिन, हमारे गांवों में कृषि के अलावा किसी अन्य कार्य की अनुमति नहीं मिल रही है। कृषि जोन हटाया जाना चाहिए।— सतीश यादव, पूर्व सरपंच, खरखड़ी
आइएमटी मानेसर के आसपास काफी विकास हो चुका है। इन चारों गांवों को भी कृषि जोन से बाहर किया जाए, ताकि किसान अपनी जमीन का व्यावसायिक उपयोग कर सकें।— दुर्गा, किसान, मोकलवास
2004 से जमीन कृषि जोन में है। यदि अन्य गतिविधियों को मंजूरी मिले तो यहां वेयरहाउस और दूसरे व्यवसाय विकसित हो सकते हैं।—वेद प्रकाश, मोकलवास
बिलासपुर, जमालपुर, मानेसर और पचगांव की दूसरी तरफ के गांवों में उद्योग विकसित हो चुके हैं। इन चार गांवों के किसानों पर कृषि जोन की बंदिश का बोझ है। सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए।— मनोज यादव, चेयरमैन, मार्केट कमेटी, पटौदी मंडीयह भी पढ़ें- बरसात के तीन महीने की राहत के बाद अब फिर प्रदूषित होने लगी काशी की हवा
