बरसात के तीन महीने की राहत के बाद अब फिर प्रदूषित होने लगी काशी की हवा
मानसून के तीन महीने बाद वाराणसी की हवा फिर प्रदूषित होने लगी है, अक्टूबर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 100 ...और पढ़ें

काशी की हवा फिर हुई खराब, मानसून के बाद बढ़ा प्रदूषण का स्तर
HighLights
मानसून के बाद वाराणसी की हवा फिर प्रदूषित।
अक्टूबर में AQI 100 से ऊपर, कई दिन 120 पार।
धूल, निर्माण कार्य, वाहनों से बढ़ रहा प्रदूषण।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। तीन महीने तक साफ हवा में सांस लेने के बाद बनारस की आबोहवा फिर बिगड़ने लगी है। जुलाई, अगस्त और सितंबर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 100 से नीचे रहने के बाद अक्टूबर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
अक्टूबर माह के पहले दिन 95 पर रहा एक्यूआइ जबकि 25 अक्टूबर को 123 तक पहुंच गया। इस दौरान केवल छह दिन ही एक्यूआइ 100 से नीचे रहा, जबकि कई दिनों तक यह 120 के पार बना रहा। बारिश के बाद धुल चुके वातावरण में अब शहर में एक बार फिर से धूल और प्रदूषक कणों का दबाव बढ़ने लगा है।
प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, एक अक्टूबर को एक्यूआइ 95 था। दो अक्टूबर को यह 143 और तीन अक्टूबर को 135 पर पहुंच गया। सात से 11 अक्टूबर के बीच कुछ राहत मिली और सूचकांक 51 से 89 के बीच रहा। हालांकि, 12 अक्टूबर से हवा फिर खराब होने लगी।
13 अक्टूबर को एक्यूआइ 126, 18 अक्टूबर को 119, 20 अक्टूबर को 126 और 24 अक्टूबर को 131 दर्ज किया गया। 25 अक्टूबर को भी यह 123 रहा। यानी महीने के शुरुआती दिनों से ही हवा की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव के साथ गिरावट का रुझान बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बारिश हवा में मौजूद धूल के कणों को जमीन पर बैठा देती है। बारिश थमने के बाद सड़क की धूल, निर्माण कार्यों से उड़ने वाले कण, वाहनों का धुआं और कचरा जलाने से निकलने वाले प्रदूषक फिर वातावरण में बढ़ने लगते हैं।
हवा की गति कम होने और तापमान में गिरावट के साथ प्रदूषकों का बिखराव भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में शहर में सड़कों की नियमित सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने पर रोक जरूरी है। मौजूदा एक्यूआइ मध्यम श्रेणी में है, लेकिन लगातार बढ़ता स्तर सतर्क रहने का संकेत दे रहा है।
