डॉग फीडिंग के विवाद को कुत्ता प्रेमी महिला ने बनाया छेड़छाड़ का झूठा मामला, सात साल बाद कोर्ट ने युवक को माना निर्दोष
कुत्तों को लेकर हुए विवाद के बाद एक कुत्ता प्रेमी महिला द्वारा छेड़छाड़ और पीछा करने के झूठे आरोप में ...और पढ़ें

कुत्ता प्रेमी महिला ने 21 नवंबर 2018 को अपने साथ छेड़छाड़ और स्टाकिंग को लेकर शिकायत दी थी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
महावीर यादव, बादशाहपुर। सात साल पहले पड़ोसी के साथ कुत्तों काे लेकर एक विवाद हो गया। इसके बाद नगर निगम में कुत्तों की शिकायत देने पर एक कुत्ता प्रेमी महिला ने उसे स्वयं के साथ हुए छेड़छाड़ और पीछा करने का आरोप बना दिया। युवक को सात साल तक मुकदमा झेलना पड़ा। अब अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। 2019 में जब मामला पहली बार अदालत पहुंचा, इसे संदिग्ध मानते हुए गैर जमानती धारा के बावजूद आरोपित को जमानत दे दी थी।
36 तारीखों से टूट गया परिवार
बावजूद इसके ये मामला सात साल तक चला, जिसमें 36 तारीखें लगीं। अदालती प्रक्रिया ने विवेक ग्रोवर और उसके परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया। आखिरकार न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हरि किशन की अदालत ने विवेक ग्रोवर को छेड़छा़ड, महिला का पीछा करने जैसी धाराओं सहित सभी पांच तरह के आरोपों से दोषमुक्त किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के आरोप संदेह से भरे थे। वह इसे साबित करने में विफल रहा।
कुत्तों के झुंड से लोग हो रहे थे परेशान
सेक्टर-10ए इलाके में रहने वाली कुत्ता प्रेमी महिला ने 21 नवंबर 2018 को अपने साथ छेड़छाड़ और स्टाकिंग को लेकर शिकायत दी थी। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 354-डी, 506 व 509 के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोपित की तरफ से अधिवक्ता विपिन गुप्ता ने अदालत के सामने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता महिला स्वयं को डाग लवर बताती है और सेक्टर में आवारा कुत्तों को नियमित रूप से खाना खिलाती थी।
दे दिया छेड़छाड़ का मोड़
आरोपित विवेक ग्रोवर सहित कई स्थानीय निवासी कुत्तों के झुंड और उनसे हो रही परेशानी को लेकर लगातार शिकायत कर रहे थे। अदालत में यह तथ्य सामने आया कि आरोपित ने आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर निगम गुरुग्राम में शिकायत दर्ज कराने के उद्देश्य से एक वीडियो बनाया था। शिकायतकर्ता ने इसी वीडियो को आधार बनाते हुए आरोप लगाया कि आरोपित उसका वीडियो बनाकर पीछा करता था।
अश्लील टिप्पणियां करता था और धमकियां देता था। हालांकि अदालत ने स्वयं वीडियो का अवलोकन किया, जिसमें महिला से छेड़छाड़ या स्टाकिंग से जुड़ा कोई स्पष्ट दृश्य नहीं पाया गया। वीडियो में मुख्य रूप से आवारा कुत्तों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियां ही दिखाई दीं।
अदालत ने यह भी गंभीरता से नोट किया कि शिकायतकर्ता और उसकी मां ने पहले वीडियो में कुत्तों की मौजूदगी से इनकार किया।
वीडियो में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला
आरोपित व्यक्ति के अधिवक्ता विपिन गुप्ता ने आरोप लगाने वाली महिला के दावों के विरुद्ध बहस की। अदालत में वीडियो चला कर दिखाई गई। इसमें कई कुत्ते स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि वीडियो में किसी प्रकार की दुर्भावनापूर्ण मंशा नजर नहीं आती।
इसके अलावा कथित घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताए गए किसी भी पड़ोसी को गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत रंजिश या आपसी विवाद के चलते लगाए गए आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार के बाद अदालत ने आरोपित को बरी करते हुए जमानत बांड समाप्त करने के आदेश दिए।
परिवार को मानसिक रूप से तोड़ा
महिला से छेड़छाड़ व जान से मारने की धमकी देने जैसे संगीन आरोपों में भी अदालत ने जमानत याचिका लगते ही स्वीकार कर ली थी। हालांकि, यह मामला गैर जमानती था। विवेक ग्रोवर को इस मामले में बेशक जेल न जाना पड़ा हो, पर सात साल में सुनवाई के लिए 36 तारीख लगीं।
शुगर, हार्ट और किडनी के मरीज हो गए
सात साल के दौरान कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए विवेक ग्रोवर का व्यापार भी पूरी तरह से प्रभावित हो गया। इस दौरान वह और उनका परिवार मानसिक रूप से टूट गया। परिवार में दो बेटियां और पत्नी आसपास के लोगों के सामने भी अपमानित महसूस करते थे। व्यक्ति की घर गृहस्थी भी काफी प्रभावित रही। अदालत ने विवेक ग्रोवर को संदेह का लाभ देखते हुए आरोपों से बरी कर दिया। पर इस दौरान वे शुगर, हार्ट और किडनी के मरीज हो गए।
