किंगडम ऑफ ड्रीम्स जमीन विवाद: लोकायुक्त रिपोर्ट में 434 करोड़ के नुकसान का खुलासा
किंगडम ऑफ ड्रीम्स की जमीन लीज का मामला लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद फिर गरमा गया है, जिसमें सरकार को ₹434.02 करोड़ के नुकसान का उल्लेख है।
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किंगडम ऑफ ड्रीम्स की 5.66 एकड़ जमीन का मामला फिर गरमाया।
HighLights
लोकायुक्त रिपोर्ट में सरकार को ₹434.02 करोड़ का नुकसान।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और सीबीआई जांच की सिफारिश।
एचएसवीपी ने लीज रद्द कर परिसर का कब्जा लिया।
महावीर यादव, बादशाहपुर। सेक्टर-29 स्थित किंगडम ऑफ ड्रीम्स के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की 5.66 एकड़ जमीन लीज पर देने का मामला लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरि पाल वर्मा (सेवानिवृत्त) की रिपोर्ट में मामले में सरकार को 434.02 करोड़ रुपये के नुकसान का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में संबंधित कंपनी से राशि की वसूली के साथ जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की गई है। साथ ही मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंपने की जरूरत भी बताई गई है।
मामले में 12 जनवरी 2023 को वाणिज्यिक अदालत द्वारा दिए गए फैसले में भी जमीन की लीज और बकाया राशि को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे। ग्रेट इंडियन नौटंकी कंपनी ने अदालत में कहा था कि उसे वर्ष 2009 में 15 वर्ष के लिए जमीन लीज पर मिली थी।
जमीन पर किंगडम ऑफ ड्रीम्स विकसित किया गया
कंपनी के अनुसार, इसी जमीन पर किंगडम ऑफ ड्रीम्स विकसित किया गया और परियोजना में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया। कंपनी ने लीज समाप्त करने के एचएसवीपी के फैसले को चुनौती देते हुए प्राधिकरण की ओर से बताए गए 107.15 करोड़ रुपये के बकाये को गलत बताया था।
दूसरी ओर, एचएसवीपी ने अदालत में कहा था कि कंपनी ने लंबे समय से लीज किराये का भुगतान नहीं किया। जून 2022 तक किराया और ब्याज की राशि 107.15 करोड़ रुपये हो गई थी।
अतिरिक्त जमीन पर कब्जे का भी आरोप
एचएसवीपी ने कंपनी पर लीज क्षेत्र के अलावा 1.34 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर कब्जा करने का आरोप भी लगाया था। प्राधिकरण की ओर से इसके लिए 114.15 करोड़ रुपये की मांग का उल्लेख अदालत के रिकॉर्ड में किया गया था। जुलाई 2022 में एचएसवीपी द्वारा लीज समाप्त कर परिसर का कब्जा लेने की कार्रवाई किए जाने की बात भी अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज है।
लोकायुक्त की रिपोर्ट में वर्ष 2011 से किराया बकाया रहने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। बैंक गारंटी के नवीनीकरण और वर्ष 2014 में 3.92 करोड़ रुपये का चेक बाउंस होने के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। रिपोर्ट में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका और प्रकरण की निगरानी में कथित कमी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
लोकायुक्त ने रिपोर्ट में सरकार को वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की सिफारिश की है। साथ ही मामले की जांच सीबीआई से कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
