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कर्नाटक की नई राज्यपाल डॉ. सुधा यादव का हरियाणा से है खास नाता, पति की शहादत के बाद राजनीति में रखा कदम

Published: Mon, 12 Oct 2026 10:37 PM (IST)

भाजपा की वरिष्ठ नेता और संसदीय बोर्ड की सदस्य डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। ...और पढ़ें

कनार्टक की राज्यपाल बनीं डॉ. सुधा यादव। फोटो: आर्काइव

कनार्टक की राज्यपाल बनीं डॉ. सुधा यादव। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. डॉ. सुधा यादव कर्नाटक की राज्यपाल नियुक्त

  2. कारगिल शहीद की पत्नी, भाजपा की वरिष्ठ नेता

  3. संगठन में सक्रियता का मिला बड़ा दायित्व

आदित्य राज, गुरुग्राम। चुनावी राजनीति में टिकट मिलना और जीत हासिल करना किसी भी नेता के राजनीतिक सफर का अहम हिस्सा होता है, लेकिन संगठन में लगातार सक्रिय बने रहना भी नेतृत्व के भरोसे की कसौटी माना जाता है।

भाजपा की वरिष्ठ नेता, संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य डॉ. सुधा यादव का राजनीतिक सफर इसी पहलू को सामने लाता है।

सांसद से राज्यपाल तक पहुंचा राजनीतिक सफर

महेंद्रगढ़ से सांसद रह चुकीं डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ हरियाणा की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाली नेता की भूमिका अब संवैधानिक पद तक पहुंच गई है।

पति की शहादत के बाद राजनीति में रखा कदम

सेक्टर-10ए में रह रहीं डॉ. सुधा यादव का राजनीतिक जीवन व्यक्तिगत त्रासदी के बाद एक नए मोड़ पर पहुंचा। उनके पति सुखबीर सिंह यादव कारगिल युद्ध में बलिदान हो गए थे।

वह सीमा सुरक्षा बल में डिप्टी कमांडेंट थे। पति की शहादत के बाद डॉ. सुधा यादव ने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और भाजपा ने वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें महेंद्रगढ़ से उम्मीदवार बनाया।

उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह को पराजित कर संसद में जगह बनाई। यह जीत उनके राजनीतिक जीवन का निर्णायक पड़ाव साबित हुई। राव इंद्रजीत सिंह अब भाजपा में हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

चुनावी हार के बाद भी नहीं छोड़ा संगठन

वर्ष 2004 में महेंद्रगढ़ और 2009 में गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के बाद भी डॉ. सुधा यादव को दोबारा संसद पहुंचने का अवसर नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी से दूरी नहीं बनाई।

चुनाव में टिकट नहीं मिलने या चुनावी सफलता नहीं मिलने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के प्रति नाराजगी नहीं जताई।

वह संगठन के कार्यक्रमों और जिम्मेदारियों में सक्रिय रहीं। भाजपा ने भी समय के साथ उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं सौंपीं।

भाजपा के शीर्ष निर्णयकारी निकायों तक पहुंचीं

वह राष्ट्रीय सचिव और अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने के बाद पार्टी के शीर्ष निर्णयकारी निकायों तक पहुंचीं। वर्ष 2022 में उन्हें भाजपा संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया।

केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य के रूप में भी वह चुनावी उम्मीदवारों के चयन से जुड़ी प्रक्रिया का हिस्सा रही हैं।

उनकी नियुक्ति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भाजपा पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं के ऊपर नजर रखती है। मौका मिलते ही उसे उसकी योग्यता के हिसाब से बेहतर जगह प्रदान कर देती है।

बेटे सिद्धार्थ यादव भी भाजपा में सक्रिय

बता दें कि डॉ. सुधा यादव के बेटे सिद्धार्थ यादव भी भाजपा में सक्रिय हैं। उन्हें हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में मीडिया सह संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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