चेहरे पर जेलीफिश के डंक, फिर भी तैरती रहीं गुरुग्राम की काम्या भारद्वाज; 14 घंटे 19 मिनट में पार किया इंग्लिश चैनल
गुरुग्राम की युवा तैराक काम्या भारद्वाज ने 14 घंटे 19 मिनट में इंग्लिश चैनल पार कर देश और हरियाणा का ...और पढ़ें
HighLights
काम्या भारद्वाज ने 14 घंटे 19 मिनट में इंग्लिश चैनल पार किया।
जेलीफिश के हमलों के बावजूद नहीं छोड़ी तैराकी, लक्ष्य हासिल किया।
हरियाणा की पहली तैराक बनीं, सेवन ओशियन्स का लक्ष्य है।
आदित्य राज, गुरुग्राम। जनपद की युवा ओपन वाटर तैराक काम्या भारद्वाज ने इंग्लिश चैनल पार कर देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है। 22 सितंबर को उन्होंने 14 घंटे 19 मिनट में अकेले इंग्लिश चैनल पार किया। फ्रांस के तट के करीब पहुंचने पर जेलीफिश के लगातार हमले के बावजूद उन्होंने तैरना नहीं छोड़ा। चेहरे और हाथों पर तेज जलन और दर्द के बीच उन्होंने अपनी गति बनाए रखी और लक्ष्य हासिल किया।
इसके महज दो दिन बाद 24 सितंबर को वह भारतीय पैरा तैराकों के साथ रिले टीम का हिस्सा बनकर फिर इंग्लिश चैनल में उतरीं और 20 घंटे 20 मिनट में रिले पूरी की। मंगलवार को दैनिक जागरण कार्यालय पहुंचीं काम्या भारद्वाज का स्वागत किया गया। स्वागत के बाद दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता आदित्य राज ने काम्या भारद्वाज से खास बातचीत की...
इंग्लिश चैनल पार करने के दौरान सबसे मुश्किल पल कौन सा था?
सबसे मुश्किल पल फ्रांस के किनारे पहुंचने से ठीक पहले आया। उस समय मुझे जेलीफिश ने कई बार डंक मारा। चेहरे और हाथों पर तेज जलन और दर्द हो रहा था। पानी में तैरते हुए अचानक शरीर पर जलन महसूस होना बहुत परेशान करने वाला था। लेकिन उस समय मन में सिर्फ एक बात थी कि अब मंजिल बहुत करीब है और किसी भी हालत में रुकना नहीं है। मैंने दर्द को सहन किया और तैरती रही।
जेलीफिश के हमले के बाद आपके मन में डर नहीं आया?
डर तो लगा, लेकिन उससे ज्यादा चिंता इस बात की थी कि कहीं मेरी गति कम न हो जाए। इंग्लिश चैनल में आप अकेले नहीं तैर रहे होते, आपके सामने ठंडा पानी, तेज धाराएं और समुद्री जीव जैसी कई चुनौतियां होती हैं। जब जेलीफिश ने डंक मारा तो कुछ सेकंड के लिए बहुत तेज जलन हुई, लेकिन मैंने खुद को संभाला। टीम की आवाज और मंजिल का ध्यान मुझे लगातार आगे बढ़ाता रहा।
उस समय क्या आपको लगा कि तैरना रोक देना चाहिए?
- नहीं। अगर उस समय रुक जाती तो शायद सबसे ज्यादा निराशा खुद से होती। मैं कई वर्षों से इस चुनौती के लिए तैयारी कर रही थी। जब फ्रांस का किनारा सामने दिखाई दे रहा हो तो सिर्फ दर्द की वजह से रुकना मेरे लिए विकल्प नहीं था। मैंने सोचा कि दर्द कुछ समय का है, लेकिन अगर मैंने तैरना छोड़ दिया तो यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा।
14 घंटे 19 मिनट का समय कैसे हासिल हुआ?
शुरुआत से ही मैंने अपनी गति और ऊर्जा को संतुलित रखा। इंग्लिश चैनल की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं। अंतिम चरण में पायलट ने बताया कि अगर गति नहीं बढ़ाई तो समय 17 घंटे से ज्यादा हो सकता है। इसके बाद मैंने अपनी गति बढ़ाने पर ध्यान दिया। मैंने करीब 4.5 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक खुद को पुश किया। उस समय शरीर थक चुका था, लेकिन दिमाग में सिर्फ फिनिश लाइन थी।
जब फ्रांस का किनारा दिखाई दिया तो पहला ख्याल क्या आया?
उस पल को शब्दों में बताना मुश्किल है। इतने घंटे तैरने के बाद जब आपको पता चलता है कि अब लक्ष्य सामने है तो शरीर की थकान कुछ देर के लिए भूल जाती है। जेलीफिश के डंक से दर्द हो रहा था, लेकिन जैसे ही मुझे लगा कि अब कुछ ही दूरी बाकी है, मैंने पूरी ताकत लगा दी। जब मैंने किनारा छुआ तो सबसे पहले भगवान और अपने परिवार को याद किया।
इसके दो दिन बाद ही फिर इंग्लिश चैनल में उतरने का फैसला कैसे किया?
यह चुनौती मेरे लिए सिर्फ अपनी उपलब्धि तक सीमित नहीं थी। 24 सितंबर को भारतीय ओपन वाटर रिले टीम में मुझे पैरा तैराकों के साथ तैरना था। मैं इसे छोड़ना नहीं चाहती थी। शरीर पर सोलो स्विम का असर था, लेकिन टीम के बाकी तैराकों का उत्साह देखकर ऊर्जा मिलती रही। हमने मिलकर 20 घंटे 20 मिनट में रिले पूरी की।
पैरा तैराकों के साथ तैरने का अनुभव कैसा रहा?
यह मेरे लिए बहुत भावुक अनुभव था। हर तैराक की अपनी चुनौती थी, लेकिन किसी के चेहरे पर हार मानने का भाव नहीं था। हम एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे थे। मेरे लिए यह सिर्फ एक और स्विम नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि शारीरिक सीमाएं आपके सपनों की सीमा तय नहीं करतीं।
इंग्लिश चैनल पार करने के बाद जब पता चला कि आप हरियाणा की पहली तैराक बनी हैं, कैसा लगा?
यह मेरे लिए बहुत गर्व का क्षण है। मैं चाहती हूं कि हरियाणा और देश के ज्यादा से ज्यादा बच्चे ओपन वाटर स्विमिंग को खेल के रूप में अपनाएं। मेरे लिए यह उपलब्धि अंत नहीं है। यह आगे की चुनौतियों की शुरुआत है।
इससे पहले पाक स्ट्रेट की डबल-वे स्विम भी आपने की थी। दोनों चुनौतियों में क्या अंतर महसूस हुआ?
दोनों की परिस्थितियां अलग थीं। पाक स्ट्रेट की डबल-वे स्विम में भी शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की बहुत जरूरत थी। वहां मैंने 18 घंटे 15 मिनट में डबल-वे पूरा कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इंग्लिश चैनल में ठंडे पानी, धाराओं और समुद्री परिस्थितियों ने अलग तरह की चुनौती दी। दोनों अनुभवों ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत किया।
अब अगला लक्ष्य क्या है?
मेरा सपना सेवन ओशियन्स पूरा करना है। इसके लिए कुक स्ट्रेट और नॉर्थ चैनल जैसी चुनौतियां सामने हैं। अभी तैयारी जारी रखनी है। इंग्लिश चैनल ने मुझे एक बात सिखाई है कि मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी हो, अगर आप आखिरी क्षण तक लड़ते रहें तो मंजिल हासिल की जा सकती है।
युवाओं के लिए आपका संदेश?
सपने बड़े रखिए, लेकिन उनके लिए मेहनत करने की तैयारी भी रखिए। सफलता एक दिन में नहीं मिलती। कई बार रास्ते में दर्द होगा, डर लगेगा और लगेगा कि अब नहीं हो पाएगा। ऐसे समय में अपने लक्ष्य को याद रखिए। मेरे चेहरे और हाथों पर जेलीफिश के डंक का दर्द था, लेकिन मैंने तैरना नहीं छोड़ा। जीवन में भी यही बात लागू होती है। मुश्किलें आपको रोकने के लिए नहीं, बल्कि आपकी क्षमता को पहचानने के लिए आती हैं।
