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एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली सुचिका जमुई कांड पर बोलीं- आत्मरक्षा केवल तकनीक नहीं, आत्मविश्वास का माध्यम

Published: Sat, 26 Sep 2026 07:06 PM (IST)

एशियन गेम्स में कांस्य पदक विजेता सुचिका तारियाल हुड्डा ने महिलाओं की आत्मरक्षा व सशक्तिकरण पर कहा कि महिलाओं को खुद को भीतर से मजबूत महसूस करना होगा।

जापान में आयोजित एशियन गेम्स में देश के लिए ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद सुचिका शनिवार को दैनिक जागरण के गुरुग्राम कार्यालय पहुंचीं।

जापान में आयोजित एशियन गेम्स में देश के लिए ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद सुचिका शनिवार को दैनिक जागरण के गुरुग्राम कार्यालय पहुंचीं।

HighLights

  1. महिलाओं को भीतर से मजबूत महसूस करना सबसे जरूरी है।

  2. आत्मरक्षा केवल तकनीक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का माध्यम है।

  3. सुचिका ने 12 साल की उम्र के अनुभव से आत्मरक्षा सीखी।

आदित्य राज, गुरुग्राम। “महिलाओं और लड़कियों को सबसे पहले खुद यह महसूस करना होगा कि वे कमजोर नहीं हैं। जब तक यह विश्वास भीतर से नहीं आएगा, तब तक बाहर से कोई उन्हें मजबूत नहीं बना सकता।” एशियन गेम्स में मिश्रित मार्शल आर्ट्स में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारत की पहली महिला एथलीट सुचिका तारियाल हुड्डा ने यह बात दैनिक जागरण से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव जरूरी है, लेकिन इसके साथ महिलाओं को अपनी आत्मरक्षा के लिए भी स्वयं मजबूत होना होगा।

'दैनिक जागरण केवल अखबार नहीं, बल्कि एक मित्र भी है' 

जापान में आयोजित एशियन गेम्स में देश के लिए ऐतिहासिक पदक जीतने के बाद सुचिका शनिवार को दैनिक जागरण के गुरुग्राम कार्यालय पहुंचीं। पाठकों और दैनिक जागरण परिवार की ओर से उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी गईं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने दैनिक जागरण से अपने जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने कहा कि दैनिक जागरण केवल अखबार नहीं, बल्कि एक मित्र भी है। यह प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करता है।

'12 साल की उम्र में हुआ अशोभनीय व्यवहार'

अपने करियर के बारे में सुचिका ने कहा कि जब वह 12 साल की थीं तो उनके साथ अशोभनीय व्यवहार हुआ था। ऐसा अशोभनीय व्यवहार करने की हिम्मत करने वाले के ध्यान में था कि महिलाएं कमजोर होती हैं। वह विरोध नहीं करेंगी।

इसी को ध्यान में रखकर आत्मरक्षा की ओर ध्यान दिया। धीरे-धीरे खेल के प्रति रुचि बढ़ती गई और यही आत्मरक्षा का अभ्यास उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। उन्होंने मेहनत, अनुशासन और समर्पण को अपनी सफलता की सबसे बड़ी वजह बताया।

सफलता किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं होती। यदि व्यक्ति किसी भी क्षेत्र को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनाता है और लगातार बेहतर करने का प्रयास करता है तो सफलता मिलने की संभावना निश्चित रूप से बढ़ती है।

'खुद को मजबूत बनाना ही होगा'

बिहार के जमुई में सामने आई घटना को लेकर सुचिका का मानना है कि महिलाओं के प्रति गलत सोच रखने वाले लोगों का सामना करने के लिए समाज में बदलाव जरूरी है, लेकिन केवल व्यवस्था या माहौल बदलने से बात पूरी नहीं होगी। महिलाओं और लड़कियों को भी स्वयं को मजबूत बनाना होगा। हो सकता है एक जगह का माहौल बेहतर हो, लेकिन दूसरी जगह परिस्थितियां अलग हों।

ऐसे में आपका आत्मविश्वास और आत्मरक्षा के गुण ही आपके काम आएंगे। आत्मरक्षा केवल किसी खेल की तकनीक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास पैदा करने का माध्यम भी है। जब कोई लड़की खुद पर भरोसा करना सीखती है तो उसके भीतर परिस्थितियों का सामना करने का साहस भी पैदा होता है।