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भारत के सामने तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में अध्यक्ष पद बरकरार रखने की बड़ी चुनौती, 122 सदस्य देशों की नजर

Published: Sun, 18 Oct 2026 06:25 PM (IST)

भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के अध्यक्ष पद पर तीसरी बार अपना नेतृत्व बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा ...और पढ़ें

भारत में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय, जागरण

भारत में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय, जागरण

HighLights

  1. भारत तीसरी बार ISA अध्यक्ष पद के लिए दावेदार।

  2. दिल्ली में 2-5 नवंबर को ISA सम्मेलन आयोजित।

  3. भारत की सौर कूटनीति और नेतृत्व की परीक्षा।

आदित्य राज, गुरुग्राम। वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा भारत अब अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आइएसए) के अध्यक्ष पद पर लगातार तीसरी बार अपना नेतृत्व बरकरार रखने की चुनौती का सामना करेगा।

दो से पांच नवंबर तक दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले आइएसए सम्मेलन में 122 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इस दौरान अध्यक्ष पद के चुनाव पर दुनिया की नजर रहेगी। भारत अब तक दो बार इस पद पर निर्विरोध चुना गया है।

तीन साल में होता है अध्यक्ष पद का चुनाव

आइएसए में प्रत्येक तीन वर्ष पर अध्यक्ष पद के चुनाव का प्रविधान है। अब तक भारत को इस पद के लिए किसी प्रतिद्वंद्वी का सामना नहीं करना पड़ा। पिछली बार फ्रांस के सह-अध्यक्ष पद के लिए ग्रेनेडा ने चुनौती पेश की थी। बाद में आपसी सहमति बनने पर फ्रांस के नेतृत्व को लेकर सहमति बनी।

इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि गठबंधन में किसी पद पर निरंतरता अपने आप सुनिश्चित नहीं होती। सदस्य देशों की अपनी प्राथमिकताएं और क्षेत्रीय हित भी नेतृत्व के चयन में भूमिका निभा सकते हैं।

भारत के सामने क्या है चुनौती?

भारत के सामने चुनौती केवल अध्यक्ष पद बरकरार रखने तक सीमित नहीं है। उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गठबंधन के सदस्य देश सौर ऊर्जा के विस्तार, तकनीक के आदान-प्रदान और विकासशील देशों में निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दों पर एक साझा एजेंडे के साथ आगे बढ़ें। यदि भारत तीसरी बार नेतृत्व हासिल करता है, तो इसे उसकी सौर कूटनीति और सदस्य देशों के बीच स्वीकार्यता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाएगा।

सौर ऊर्जा को वैश्विक अभियान बनाने की पहल

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना 30 नवंबर 2015 को पेरिस में आयोजित जलवायु सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की संयुक्त पहल से हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना, सौर परियोजनाओं के लिए सहयोग जुटाना और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता का विस्तार करना है।

भारत ने इस मंच के माध्यम से सौर ऊर्जा को केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के अवसर के रूप में भी प्रस्तुत किया है। जानकार बताते हैं कि नवंबर में होने वाला सम्मेलन भारत के लिए नेतृत्व की निरंतरता के साथ अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को मजबूत करने का अवसर भी होगा।

भारत में मुख्यालय

अध्यक्ष पद पर तीसरी बार चयन भारत की पहल को समर्थन का संकेत दे सकता है, जबकि चुनावी चुनौती सामने आने की स्थिति में सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की उसकी क्षमता की परीक्षा होगी।

बता दें कि दुनिया का यह पहला संगठन है जिसका मुख्यालय भारत में है। मुख्यालय गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के सूर्य भवन में संचालित हो रहा है। 

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