बिल्डर की मनमानी पर HRERA का एक्शन, विपुल लि. के बायर को मिलेगा 7 साल की देरी का ब्याज; 90 दिन का अल्टीमेटम
हरेरा गुरुग्राम ने सेक्टर-81 स्थित विपुल लावण्या परियोजना में फ्लैट डिलीवरी में हुई देरी के मामले में विपुल लिमिटेड को खरीदार को ब्याज देने का आदेश दिया है।

विपुल लिमिटेड को हरेरा से झटका। फाइल फोटो
HighLights
हरेरा गुरुग्राम ने विपुल लिमिटेड को ब्याज देने का आदेश दिया।
फ्लैट डिलीवरी में 7 साल से अधिक की देरी के लिए मुआवजा।
बिल्डर को 90 दिन में 10.80% वार्षिक ब्याज चुकाना होगा।
संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) गुरुग्राम ने सेक्टर-81 स्थित विपुल लावण्या परियोजना में फ्लैट की डिलीवरी में हुई देरी के मामले में विपुल लिमिटेड को खरीदार को ब्याज देने का आदेश दिया है।
प्राधिकरण ने बिल्डर की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि फ्लैट का कब्जा देते समय हुए पूर्ण और अंतिम समझौते के बाद खरीदार कोई अतिरिक्त दावा नहीं कर सकता।
यह आदेश हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन अरुण कुमार ने 17 जुलाई 2026 को शिकायत संख्या 3510/2025 में दिया। शिकायतकर्ता राजेश खरबंदा और सुमन खरबंदा ने सितंबर 2010 में विपुल लावण्या के टावर-3 में 1780 वर्ग फुट का मकान बुक किया था।
दिसंबर 2010 में हुए खरीदार समझौते के अनुसार मकान का निर्माण 36 महीने में पूरा किया जाना था। 90 दिन की अतिरिक्त अवधि को मिलाकर कब्जा देने की अंतिम तारीख 5 मार्च 2014 तय थी।
अक्टूबर 2021 में केवल अनुमति के आधार पर दिया कब्जा
हालांकि, बिल्डर ने 7 अक्टूबर 2021 को खरीदार को केवल अनुमति के आधार पर कब्जा दिया। यानी तय समय से करीब सात साल से अधिक की देरी हुई। खास बात यह रही कि उस समय संबंधित टावर का ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी जारी नहीं हुआ था।
बिल्डर की ओर से दलील दी गई कि खरीदार ने कब्जा लेते समय पूर्ण और अंतिम समझौता किया था और उसे देरी के एवज में 1,30,698 रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। इसलिए अब दोबारा देरी का ब्याज मांगना उचित नहीं है।
बिल्डर ने मामले को समय-सीमा से बाहर बताते हुए पूर्व के कुछ मामलों का भी हवाला दिया। हरेरा ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण ने कहा कि बिल्डर अभी भी ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पाया है।
कब्जे की तय तारीख के करीब 12 साल बाद तक भी प्रमाण पत्र नहीं मिलने के संबंध में बिल्डर की ओर से कोई संतोषजनक कारण रिकार्ड पर नहीं रखा गया।
हरेरा का क्या है आदेश?
हरेरा ने आदेश दिया कि खरीदार को 5 मार्च 2014 से 7 अक्टूबर 2021 तक 10.80 प्रतिशत सालाना की दर से देरी का ब्याज दिया जाए।
बिल्डर द्वारा पहले से देरी के बदले भुगतान की गई राशि को इस रकम में समायोजित किया जाएगा। बाकी राशि का भुगतान 90 दिन के भीतर करना होगा।
इसके अलावा, हरेरा ने बिल्डर को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद तीन महीने के भीतर खरीदार के पक्ष में पंजीकृत हस्तांतरण दस्तावेज कराने का भी निर्देश दिया है। इसके लिए खरीदार को निर्धारित शुल्क और स्टांप शुल्क का भुगतान करना होगा।
