'विदेशी जमीन, लोकल शूटर और 400 कॉल्स', अमेरिका से ऐसे ऑपरेट हो रहा था हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया का गैंग
कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी से हरियाणा, दिल्ली पुलिस को राहत मिली है। यह गैंग विदेश से रंगदारी समेत अन्य वारदातों को अंजाम देता था।

कुख्यात गैंग्सटर हिमांशु भाऊ, जागरण आर्काइव।
HighLights
अमेरिका में कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया गिरफ्तार।
विदेश से रंगदारी, वारदातें कराकर दक्षिण हरियाणा में फैलाते थे दहशत।
नाबालिगों को मोहरा बनाकर गैंग में शामिल करते थे अपराधी।
विनय त्रिवेदी, गुरुग्राम। अमेरिका में कुख्यात गैंग्सटर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी हरियाणा, दिल्ली एवं अन्य राज्यों की पुलिस के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
दोनों खासकर हिमांशु भाऊ विदेश में बैठकर आए दिन एनसीआर में बड़ी वारदात करा रहा था और वर्षों से कई राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था।
कारोबारियों की बढ़ गई थी मुसीबत
दक्षिण हरियाणा में छह साल तक इस गैंग ने अपना ऐसा काकस बनाया कि बिना रंगदारी दिए कारोबार करना किसी भी कारोबारी के लिए मुश्किल हो गया। बीते डेढ़ साल में 400 से ज्यादा लोगों को रंगदारी के लिए विदेश से धमकी दी गई, जिनमें 100 से ज्यादा कॉल दक्षिण हरियाणा के कारोबारियों, प्रापर्टी डीलरों और शोरूम मालिकों को की गईं।
कैसे बना हिमांशु भाऊ का पूरा गैंग?
इन वारदात में हिमांशु, नीरज व अन्य गैंग्सटरों के नाम भी सामने आए। हिमांशु भाऊ गैंग बनने की कहानी अक्टूबर 2020 से शुरू होती है। हिसार की बास्टल जेल से हिमांशु 17 कैदियों के साथ दीवार फांदकर फरार हो गया। तीन पकड़े गए, बाकी को उसने अपनी गैंग में शामिल कर लिया। फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाकर वह विदेश फरार हो गया।
विदेशों से चलाता था पूरा गैंग
इसके बाद कई देशों से होकर अमेरिका पहुंचा और वहीं से गैंग चलाने लगा। दूसरी तरफ नीरज फरीदपुरिया 2012 में हत्या के मामले में गिरफ्तार हुआ था, 2015 में उम्रकैद हुई और 2019 में हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर आते ही वह भी विदेश भाग गया।
बाद में वह कौशल गैंग और पंजाब के बंबीहा गैंग का मास्टरमाइंड बन गया। उस पर एनआइए ने एक लाख और हरियाणा पुलिस ने 25 हजार का इनाम रखा था।
दक्षिण हरियाणा में बनाया लोकल गैंगों से गठजोड़
विदेश में बैठकर एनसीआर में वारदात कराने के लिए उसने कई गैंग से लोकल सपोर्ट लिया। उसने दक्षिण हरियाणा में कौशल, झज्जर में रोहित छपार, सोनीपत में कुल्लू बुसानिया और हिसार में साजिद खान से हाथ मिलाया। लारेंस गैंग से टक्कर लेने के लिए बंबीहा गैंग से भी दोस्ती कर ली। वारदात का तरीका एक ही था।
विदेश से टारगेट तय करना, लोकल लड़कों को हथियार एवं फोटो भेजना और फिर फायरिंग कराकर इंटरनेट मीडिया पर जिम्मेदारी लेना। यह भी सामने आया कि दूसरे देशों के गैंगों से भी सेटिंग कर चाइनीज हथियार पाकिस्तान और नेपाल के रास्ते भारत भिजवाए जा रहे थे। उनसे दहशत फैलाई गई।
नाबालिगों को बनाता था मोहरा
भाऊ गैंग की सबसे शातिर चाल थी नाबालिगों की भर्ती। रोहतक, सोनीपत, फरीदाबाद, पानीपत के 16-17 साल के लड़के इंटरनेट मीडिया पर गैंग्सटरों की रील देखकर जुड़ते थे। जल्दी पैसा और नाम का लालच। पकड़े भी गए तो नाबालिग होने से कम सजा और जल्दी जमानत।
पुलिस के मुताबिक हाल की वारदात में पकड़े गए 30 फीसदी से ज्यादा शूटर नाबालिग थे। गुरुग्राम में एल्विश यादव के घर पर फायरिंग, सोनीपत में मातूराम हलवाई के यहां फायरिंग और फरीदाबाद में कांग्रेस नेता विकास चौधरी की हत्या इसी गठजोड़ की बड़ी वारदात हैं।
