अमेरिका से पढ़कर लौटी बेटी सहेज रही एक-एक बूंद, अब तक 80 तालाबों को दे चुकी हैं नया जीवन
शुभी केसरवानी ने गुरुजल संस्था के माध्यम से गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी में 80 तालाबों के पुनरुद्धार के लिए डीपीआर तैयार कर प्रशासन को सौंपी है।
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शुभी केसरवानी, गुरुजल की सीईओ, जागरण।
HighLights
गुरुग्राम की शुभी केसरवानी जल संरक्षण की प्रेरणा बनीं।
गुरुजल ने 80 तालाबों के पुनरुद्धार की डीपीआर सौंपी।
वर्षाजल संचयन और अपशिष्ट जल उपचार पर जोर।
आदित्य राज, गुरुग्राम। पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझना और उसे बचाने के लिए जमीन पर काम करना, यही सोच गुरुग्राम की शुभी केसरवानी की पहचान बन गई है।
तेजी से बढ़ते शहरों में गिरता भूजल स्तर, सिमटते तालाब और वर्षा के दौरान जलभराव जैसी चुनौतियों के बीच उन्होंने जल संरक्षण को अपने कार्य का केंद्र बनाया।
तालाबों के पुनर्जीवन पर जोर
गुरुजल संस्था की सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में वह तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षाजल संचयन और अपशिष्ट जल के उपचार एवं पुनः उपयोग के माध्यम से जल संकट का स्थायी समाधान तलाश रही हैं। उनका उद्देश्य केवल तालाबों से गाद और कचरा हटाना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के योग्य बनाना है।
उनकी पहल बताती है कि पानी बचाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, प्रशासनिक सहयोग और समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
सरकार के प्रोजेक्ट के साथ कर चुकी हैं काम
शुभी बताती हैं कि हरियाणा सरकार के गुड गवर्नेंस प्रोजेक्ट के साथ वह 2017 में जुड़ गई थीं। उन्हें इसके लिए जींद भेजा गया था। वहां पर उन्होंने पानी की कमी और उसके चलते उपजी समस्याओं को महसूस किया।

साथ ही पता चला कि पानी की कमी की समस्या गुरुग्राम में भी अधिक है। फिर मन में विचार आया कि अब पूरा जीवन जल संरक्षण के ऊपर काम करने में लगाना है।
तालाबों के पुनर्जीवन के लिए प्राकृतिक उपचार
इसी विचार के साथ उन्होंने गुरुजल संस्था की शुरुआत 2019 में गुरुग्राम जिला प्रशासन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी की पहल के रूप में हुई। संस्था ने तालाबों के पुनर्जीवन के लिए प्राकृतिक जल उपचार तकनीक और स्थानीय वनस्पतियों के उपयोग जैसे उपायों पर काम शुरू किया। इस बीच विचार किया कि इसके ऊपर और बेहतर कार्य कैसे किया जा सकता है।
अमेरिका से लौटने के बाद काम में तेजी
इसी सोच के साथ उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित कोलंबिया विश्वविद्यालय में सतत विकास प्रबंधन विषय में दाखिला लिया। 2021 में इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया और 2022 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान भारतीय विद्यार्थियों के संगठन की चेयरपर्सन के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

वहां से लौटकर पर्यावरण संबंधी चुनौतियों को प्रशासन और समुदाय की भागीदारी से हल करने के विचार के साथ गुरुजल के काम को नई दिशा दी। जब वह अमेरिका में पढ़ाई कर रहीं थीं तो उनकी संस्था का काम उनकी टीम ने जारी रखा। लौटने के बाद काम में और तेजी आई। इसी कड़ी में अब तक गुरुग्राम में 30 तालाबों को पुनर्जीवित किया जा चुका है।
अब तक 80 तालाबों को किया पुनर्जीवित
यही नहीं गुरुग्राम के 30, फरीदाबाद के 40 एवं रेवाड़ी के 10 तालाबों को यानी 80 तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए डीपीआर तैयार कर संस्था संबंधित प्रशासन को सौंप चुकी है। जल संरक्षण के उनके कार्य में आम लोगों की भी भागीदारी होती है।
हालांकि, इसके लिए वह किसी को कहनी नहीं हैं, लेकिन स्वेच्छा से लोग सहयोग करते हैं। हां, जल संरक्षण को लेकर वह और उनकी टीम लोगों को जागरूक जरूर करती। इसके लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं।
इस मुहिम में लोगों को जोड़ने की कोशिश
शुभी की पहल का दायरा जल संरचनाओं के विकास तक सीमित नहीं है। छतों और खुले क्षेत्रों से बारिश के पानी को एकत्र करना, उसे जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करना और उपचारित अपशिष्ट जल का गैर-पेय कार्यों में दोबारा उपयोग बढ़ाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
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इसके साथ ही युवाओं और स्थानीय समुदायों को जल संरक्षण से जोड़ने के लिए जल साक्षरता कार्यक्रम तथा ‘वी फार वाटर फेलोशिप’ के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।
शुभी के कार्य को मिला सम्मान
शुभी के काम को विभिन्न स्तरों पर पहचान भी मिली है। वर्ष 2022 में उनको हीरो समूह सामाजिक प्रभाव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संस्था को वर्ष 2019 में शासन एवं प्रशासन से जुड़े कार्यों के लिए स्काच स्वर्ण पुरस्कार, वर्ष 2024 में कलाग्राम हरित प्रभाव पुरस्कार मिला है। विश्व जल दिवस 2025 के अवसर पर, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गुरुजल को जल क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ गैर-सरकारी संगठन के रूप में सम्मानित किया गया।
हरियाणा से बाहर भी संस्था कर रही है काम
गुरुजल ने जुलाई 2023 में हरियाणा से बाहर भी काम का विस्तार किया। संस्था राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम कर चुकी है। संस्था की रिपोर्ट में प्रतिवर्ष 42.36 करोड़ लीटर भूजल पुनर्भरण, 6.39 करोड़ लीटर अपशिष्ट जल के उपचार एवं पुनः उपयोग और 54 लाख लीटर वर्षाजल प्रबंधन से जुड़ी क्षमता का उल्लेख है। फिलहाल आगरा, जयपुर, गुरुग्राम एवं नोएडा में 15 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
मैं मूलरूप से प्रयागराज की रहने वाली हूं, जोकि एक आध्यात्मिक स्थल है। वहां के माहौल से यह सीख मिली कि आपकी उपलब्धि इस बात में नहीं है कि आप कितने खुश हैं, आपकी उपलब्धि इस बात में है कि आपसे कितने लोग खुश हैं। यानी आप दूसरों की खुशियों के लिए क्या प्रयास कर रहे हैं। राष्ट्र ने हमें बहुत कुछ दिया है।
हम राष्ट्र को क्या दे रहे हैं, इस विषय पर चिंतन ने मुझे जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने को प्रेरित किया। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में पानी को लेकर ही युद्ध होगा। ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए सभी लोगों को जल संरक्षण के ऊपर काम करना होगा। इसके लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता नहीं है, केवल बरसात के पानी को सहेज लिया जाए तो यह भी बड़ी उपलब्धि होगी।
शुभी केसरवानी, सीईओ, गुरुजल
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