गुरुग्राम में सिग्नेचर ग्लोबल साइट पर मिट्टी धंसने के पीछे सुरक्षा की बड़ी खामी, नहीं था कोई भी रिटेनिंग सपोर्ट
गुरुग्राम के सिधरावली गांव में सिग्नेचर ग्लोबल प्रोजेक्ट में मिट्टी धंसने से सात श्रमिकों की मौत और चार घायल होने ...और पढ़ें

खोदाई के दौरान उचित सपोर्ट सिस्टम नहीं था।

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गौरव सिंगला, नया गुरुग्राम। बिलासपुर थाना क्षेत्र के सिधरावली गांव स्थित सिग्नेचर ग्लोबल के प्रोजेक्ट में मिट्टी धंसने से सात श्रमिकों की मौत और चार के घायल होने की घटना की जांच में प्रारंभिक स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है। सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। खोदाई के दौरान उचित सपोर्ट सिस्टम नहीं था।
जिला प्रशासन की ओर से मामले की जांच के लिए गठित की गई कमेटी में शामिल टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) एनफोर्समेंट की टीम ने बुधवार दोपहर साइट का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच के दौरान निर्माण कार्य में कांट्रेक्टर कंपनी और उनके इंजीनियर्स की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बताया गया है कि बेसमेंट की खोदाई के दौरान साइड में मिट्टी को रोकने के लिए आवश्यक सपोर्ट और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए थे। यदि खोदाई के दौरान उचित सपोर्ट सिस्टम और सुरक्षा उपाय किए जाते तो इस तरह की दुर्घटना को टाला जा सकता था।
प्रोजेक्ट की जमीन के साथ ही हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) की जमीन लगी हुई है, जिसकी चारदीवारी पहले से बनी हुई थी। इसी स्थान पर एसटीपी प्लांट के लिए करीब आठ मीटर गहरा पिट खोदा गया था और वहां रिटेनिंग वाल की नींव का काम किया जा रहा था।
खोदाई के दौरान मिट्टी को सहारा देने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, जिसके कारण अचानक मिट्टी खिसक गई और दीवार गिरने से सात श्रमिकों की मौत हो गई। इस दौरान चारदीवारी का भी कुछ हिस्सा गिर गया।
इस मामले की जांच के लिए उपायुक्त अजय कुमार ने एसडीएम मानेसर दर्शन यादव की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया हुआ है, जिसमें एसीपी पटौदी, जिला नगर योजनाकार (एनफोर्समेंट) गुरुग्राम और लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क) के कार्यकारी अभियंता को सदस्य बनाया गया है।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार विभिन्न विभागों से तथ्य जुटाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही एसडीएम मानेसर को सौंप दिया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यह भी सामने आया है कि प्रोजेक्ट का लाइसेंस बिल्डर कंपनी के नाम पर जारी है, ऐसे में केवल ठेकेदार की लापरवाही बताकर बिल्डर प्रबंधन इस हादसे की जिम्मेदारी से पूरी तरह बच नहीं सकता। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में बिल्डर प्रबंधन की भूमिका और जिम्मेदारी किस प्रकार तय करता है।
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