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गुरुग्राम रोडरेज पर बाइक राइडर्स बोलीं- सड़क पर हर पल सताता है डर; NCR में 5000 से ज्यादा महिला बाइकर्स दहशत में

Published: Wed, 16 Sep 2026 07:00 AM (IST)

गुरुग्राम में महिला बाइकर शिवानी चौहान के साथ हुई रोडरेज की घटना ने शहर में महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल ...और पढ़ें

गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर शिवानी चौहान के साथ रोडरेज की घटना ने हाईटेक शहरों में शुमार गुरुग्राम में महिला सुरक्षा की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। वीडियो ग्रैब

गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर शिवानी चौहान के साथ रोडरेज की घटना ने हाईटेक शहरों में शुमार गुरुग्राम में महिला सुरक्षा की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। वीडियो ग्रैब

HighLights

  1. गुरुग्राम रोडरेज ने महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए।

  2. एनसीआर की महिला बाइकर्स में घटना से दहशत का माहौल।

  3. सुरक्षित सड़कों, पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने की महिला बाइकर्स की मांग।

विनय त्रिवेदी, गुरुग्राम। गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर शिवानी चौहान के साथ रोडरेज की घटना ने हाईटेक शहरों में शुमार गुरुग्राम में महिला सुरक्षा की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। ये मामला अब सिर्फ रोडरेज या ट्रैफिक नियम उल्लंघन का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षित मोबिलिटी और वुमन फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा सवाल बन गया है।

महिला बाइकिंग ग्रुपों में दहशत

दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा समेत पूरे एनसीआर में 50 से ज्यादा बाइक राइडर ग्रुप सक्रिय हैं, जिनमें पांच हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। इनमें मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाली युवतियों से लेकर उद्यमी, कलाकार और प्रोफेशनल तक हैं।

एनसीआर के बाइकर्स ग्रुप हर सप्ताह रविवार को गोल्फ कोर्स रोड, दिल्ली जयपुर हाईवे और अरावली की तलहटी में बसे लेपर्ड ट्रेल में राइडिंग करने जाते हैं। इस एक घटना के बाद महिला बाइकिंग ग्रुपों में दहशत है।

ग्रुप में चर्चा है कि क्या गुरुग्राम की सड़कें महिलाओं के लिए सेफ हैं। कई महिला राइडर्स ने मांग की है कि गोल्फ कोर्स रोड, सोहना रोड और लेपर्ड ट्रेल जैसे स्ट्रेच पर पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।

महिला राइडर्स को क्या होती है दिक्कत?

सड़कों पर रफ्तार भरने वाली महिलाओं को आज भी सामाजिक और सुरक्षा संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। भारी और स्पोर्ट्स बाइक्स चलाती महिलाओं को घूरना, नीचा दिखाना आम है।

कई राइडर्स छेड़छाड़ और पीछा किए जाने के डर से जैकेट और हेलमेट के पीछे पहचान छुपाने को मजबूर हैं। ग्रुप में चलने के बावजूद कार या पुरुष बाइकर्स द्वारा कट मारना, रेस के लिए उकसाना या अश्लील इशारे करना बड़ी चुनौती है।

क्या सोचती हैं महिला राइडर्स?

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यह घटना सिर्फ रोडरेज या यातायात उलंघन का मामला नहीं है, यह महिलाओं की सुरक्षित मोबिलिटी और वुमन फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंभीर सवाल उठाती है। आज की महिला सिर्फ आफिस नहीं जाती, उसे घर, बच्चों, परिवार और काम सभी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। इसलिए सुरक्षित सड़कें उसके लिए सुविधा नहीं, सशक्तिकरण की बुनियादी जरूरत हैं। हमें शहरों में जेंडर सेंसिटिव इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंभीरता से काम करना होगा। बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग, सुरक्षित जंक्शन, स्पष्ट लेन मार्किंग, सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम और मजबूत ट्रैफिक इन्फोर्समेंट होने से ही बात बनेगी। जब वे बिना डर घर से काम और काम से घर तक सुरक्षित पहुंच सकें।

-हिमानी आनंद, बाइक राइडर, गुरुग्राम।

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मेरे लिए सबसे परेशान करने वाला पहलू यही है, एक महिला को सड़क पर बाइक चलाते समय यह क्यों सोचना पड़े कि क्या यह गाड़ी मेरा पीछा कर रही है, मेरे करीब क्यों आ रही है, मुझे रुकना चाहिए या नहीं, मदद कौन करेगा। यह सड़क सुरक्षा नहीं, डर के साथ जीना है। पुरुष भी रोडरेज के शिकार होते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए स्थिति और डरावनी हो सकती है, क्योंकि आक्रामकता बहुत जल्दी धमकी या उत्पीड़न में बदल सकती है।

-दिव्या भल्ला, बाइक राइडर, गुरुग्राम

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हमें महिलाओं से बार-बार यही क्यों कहा जाता है कि अकेले मत जाओ, रात में मत निकलो, अकेले बाइक मत चलाओ। असली सवाल यह होना चाहिए- हम पुरुषों को यह क्यों नहीं सिखाते कि किसी महिला को डराना, पीछा करना गलत है। रोडरेज को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता। वह बाइक क्यों चला रही थी, वह अकेली क्यों थी, ये सवाल नहीं होने चाहिए। किसी महिला का बाइक चलाना, अकेले यात्रा करना उसे डराने का अधिकार नहीं देता।

-शिवानी चौधरी, बाइक राइडर, गुरुग्राम

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28 वर्षों से बाइक चला रहीं हूं। 14 देशों में 850000 किमी तक बाइक से सफर किया है। एनसीआर में हम आज भी पहचान छुपाकर बाइक चलाते हैं। सड़क पर कोई महिला बाइकर्स को पहचान लेता है तो घूरता है। कई बार तो तस्वीरें लेने के लिए मुझे बीच सड़क पर रोक गया। ऐसा नहीं होना चाहिए।

-दिव्या संधु, बाइक राइडर, नोएडा

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गुरुग्राम में घटना करने वाला ही कैमरे के आगे आकर सफाई दे रहा है मतलब उसको डर नहीं है। सख्त और दंडात्मक कानून होना चाहिए। बाइक सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं है। महिलाएं भी चला सकतीं हैं। महिला बाइकर्स की इंटरनेट मीडिया पर आज भी गलत छवि बनाई जाती है। नोएडा में भी कई बाइक राइडर ग्रुप हैं। इसमें शामिल महिलाओं का बाइक चलाना शौक है, लेकिन सड़कों पर असुरक्षा चिंता बनती है।

-सोनिया जैन, बाइक राइडर, नोएडा।

बाइक की रफ्तार के साथ सपनों को पंख लगा रही महिलाओं के लिए सफर आसान नहीं है। ट्रैफिक अव्यवस्था के साथ घूरने, फब्तियां कसने और जानबूझकर बाइक के करीब वाहन चलाने तक की घटनाएं मुश्किल बनाती हैं। इसीलिए कई महिलाएं अकेले की बजाय ग्रुप में राइड पसंद करती हैं। दिल्ली में महिला बाइक राइडिंग का चलन दो दशक पुराना है, अब सोलो ट्रिप का चलन भी बढ़ रहा है। ग्रुप में 10 महिलाएं हैं। राइड के दौरान तेज रफ्तार बस, ट्रक और कार अचानक पास से निकल जाएं तो दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार सड़क पर लोग महिला को बाइक चलाते देखकर अनावश्यक टिप्पणी या फब्तियां कसते हैं।

-ममता यादव, शी राइड ग्रुप।

ग्रुप राइडिंग के दौरान सुरक्षा के लिए जरूरी टिप्स

  • हर राइड में फुल प्रोटेक्टिव गियर - हेलमेट, जैकेट, ग्लव्स, नी गार्ड अनिवार्य पहनें।
  • हेलमेट और बाइक पर एक्शन कैमरा/डैशकैम जरूर लगाएं, फुटेज सबूत बनेगा।
  • लाइव लोकेशन और इमरजेंसी मैपिंग आन रखें, ग्रुप में एक लीड और एक स्वीप राइडर तय करें।
  • रात में हाई-विजिबिलिटी जैकेट और रिफ्लेक्टर स्ट्रिप का इस्तेमाल करें।
  • किसी अनजान वाहन द्वारा पीछा करने या उकसाने पर रुकें नहीं, नजदीकी पेट्रोल पंप या पुलिस पिकेट पर रुकें, 112 डायल करें।

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