7000 करोड़ के गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक, फेज-2 के सेक्टर-9 से साइबर हब तक का कॉरिडोर अटका
गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण का टेंडर प्रबंध निदेशक के तबादले के कारण अटक गया है, जिससे परियोजना की रफ्तार ...और पढ़ें

ग्रुरुग्राम मेट्रो फेज-2 का प्रोजेक्ट अटक गया है। फोटो: आर्काइव
HighLights
प्रबंध निदेशक के तबादले से गुरुग्राम मेट्रो टेंडर अटका
नए एमडी मुकुल कुमार को परियोजना समझने में समय लगेगा
सेक्टर-9 से साइबर हब तक मेट्रो विस्तार में देरी होगी
आदित्य राज, गुरुग्राम। गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे फेज की रफ्तार को प्रबंध निदेशक के तबादले ने झटका दिया है। अगले सप्ताह जिस टेंडर को जारी किया जाना था, वह अब नए प्रबंध निदेशक के कार्यभार संभालने के बाद प्रक्रिया समझने तक अटक गया है।
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) के प्रबंध निदेशक डाॅ. चंद्रशेखर खरे का पिछले सप्ताह तबादला हो गया और उनकी जगह मुकुल कुमार को जिम्मेदारी दी गई है।
दूसरे फेज में सेक्टर-9 से साइबर हब तक मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाना है। शहर में बढ़ते यातायात दबाव के बीच इस विस्तार को सार्वजनिक परिवहन के लिए अहम माना जा रहा है। ऐसे में टेंडर में होने वाली देरी आगे की समयसीमा पर भी असर डाल सकती है।
नए एमडी को पहले प्रक्रिया समझनी होगी
डाॅ. चंद्रशेखर खरे के तबादले के बाद नए प्रबंध निदेशक मुकुल कुमार के सामने जीएमआरएल की कार्यप्रणाली और परियोजना की मौजूदा स्थिति समझने की चुनौती है।
टेंडर से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी पहलू, वित्तीय प्रक्रिया और जरूरी औपचारिकताओं की जानकारी लेने के बाद ही वह आगे की प्रक्रिया पर हस्ताक्षर कर सकेंगे। ऐसे में पिछले सप्ताह आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया में अब कुछ दिन और लगने की संभावना है।
बड़े प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों और निर्णयों को समझे बिना नए अधिकारी के लिए जल्दबाजी में हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा। पहले से लिए गए निर्णयों, तकनीकी प्रक्रियाओं और परियोजना की प्रगति से परिचित होने में समय लगता है।
अधिकारियों की निरंतरता जरूरी है
लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता जेएस सुहाग के अनुसार, बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में अधिकारियों की निरंतरता बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी महत्वपूर्ण परियोजना के निर्णायक चरण तक पहुंचने से पहले उसके प्रमुख अधिकारियों को बार-बार बदलने से बचना चाहिए।
उनका कहना है कि अधिकारी बदलने पर नए अधिकारी को व्यवस्था समझने और निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में समय लगता है। गुरुग्राम में मेट्रो विस्तार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। आबादी, कार्यालयों और वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ मेट्रो का विस्तार शहर के भविष्य की जरूरत बन गया है।
सेक्टर-9 से साइबर हब तक विस्तार
फिलहाल पहले फेज के तहत मिलेनियम सिटी गुरुग्राम मेट्रो स्टेशन से सेक्टर-9 तक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इसके आगे दूसरे फेज में सेक्टर-9 से साइबर हब तक मेट्रो पहुंचाने की योजना है।
नए कॉरिडोर में गुरुग्राम के कई प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने का प्रस्ताव है। इनमें साइबर पार्क, सुभाष चौक, हीरो होंडा चौक, उद्योग विहार, सेक्टर-9, पालम विहार, सेक्टर-22 और बजघेड़ा रोड शामिल हैं।
रिंगमैन सिस्टम जैसा दिखेगा नेटवर्क
मिलेनियम सिटी सेंटर से आगे बढ़ने वाला मेट्रो कॉरिडोर शहर के बड़े हिस्से को आपस में जोड़ने वाला नेटवर्क तैयार करेगा। करीब 28.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर सेक्टर-45 से साइबर हब तक कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
परियोजना को दो हिस्सों में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले हिस्से में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक करीब 15.5 किलोमीटर मेट्रो विस्तार का काम शुरू हो चुका है। इसके आगे सेक्टर-9 से साइबर हब तक का हिस्सा दूसरे चरण में विकसित किया जाएगा।
पूरा कॉरिडोर तैयार होने के बाद इसकी बनावट कुछ हद तक रिंगमैन सिस्टम जैसी होगी। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन आसान होने और लोगों को मेट्रो पकड़ने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़ेगी।
सात हजार करोड़ से बनेगा पूरा कॉरिडोर
| परियोजना | प्रस्तावित व्यवस्था |
|---|---|
| कुल लंबाई | 28.5 किलोमीटर |
| स्टेशन | 27 |
| माॅडल स्टेशन | 8 |
| अनुमानित लागत | 7,098.70 करोड़ रुपये |
| ट्रेनों की संख्या | 35 |
| शुरुआत में कोच | 3 |
| भविष्य में कोच | 6 |
| अधिकतम रफ्तार | 80 किमी प्रति घंटा |
| अनुमानित दैनिक यात्री | लगभग 10 लाख |
यह भी पढ़ें- दिल्ली-सहारनपुर हाईवे और लोनी मार्ग पर बनेंगे 3 कल्वर्ट, जलभराव रोकने के लिए गाजियाबाद PWD की बड़ी योजना
