गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में दवाओं की किल्लत, घंटों लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल रही पूरी दवा
गुरुग्राम के जिला अस्पताल में मरीजों को पर्चे पर लिखी सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे उन्हें बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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पर्चे पर दवा लिखती हुई डॉक्टर की तस्वीर, जागरण।
HighLights
जिला अस्पताल में मरीजों को पूरी दवाएं नहीं मिल रहीं।
मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
अधूरी दवाओं से स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा बढ़ रहा है।
वरुण त्रिवेदी, गुरुग्राम। विश्वकर्मा कॉलोनी के संजीव कुमार कई दिन से बीमार थे, इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे। उम्मीद थी कि डाक्टर को दिखाने के बाद दवाएं मिल जाएंगी और काम पर लौट सकेंगे।
पंजीकरण, ओपीडी और फिर दवा काउंटर पर करीब दो घंटे कतार में खड़े रहने के बाद पर्चे पर लिखी तीन दवाओं में से दो ही मिलीं। तीसरी के लिए बाजार जाने की सलाह मिली। यानी बीमारी ने शरीर को परेशान किया और व्यवस्था ने जेब पर चोट कर दी।
बाहर से दवा खरीदना मुश्किल
ऐसे ही मानसिक स्वास्थ्य विभाग की ओपीडी में एक मरीज को चार में से दो दवाएं मिलीं, जबकि आर्थो ओपीडी में एक मरीज को सात में से केवल चार दवाएं दी गईं। आर्थिक तंगी के कारण महिला बाकी दवाएं बाजार से नहीं खरीद सकी और आधी दवाएं लेकर घर लौट गई।
शुक्रवार को सेक्टर-10 स्थित जिला नागरिक अस्पताल में जागरण पड़ताल के दौरान अस्पताल की फार्मेसी से पर्चे में लिखी गईं कई जरूरी दवाओं का स्टाक नहीं होने की बात कहकर कई मरीजों को लौटा दिया गया।
दवा छूटने से स्थिति बिगड़ने का खतरा
मरीजों ने बताया कि यह स्थित पिछले कई दिनों से है, जिससे आर्थो, मानसिक स्वास्थ्य और मेडिसिन समेत अन्य विभाग के मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मानसिक स्वास्थ्य के मरीजों के लिए दवाओं का नियमित सेवन जरूरी है। मरीज की दवा बीच में छूटने से स्थिति बिगड़ने का खतरा रहता है।
क्या है लोगों की समस्या?
जिला अस्पताल में रोज 2300 से अधिक मरीजों का पंजीकरण होता है। यहां डाक्टर पूरी बीमारी समझकर दवा लिख रहे हैं, लेकिन काउंटर पर पहुंचते ही इलाज का आधा हिस्सा बाजार के हवाले हो जाता है।
मरीज अस्पताल में समय गंवाता है, दिहाड़ी खोता है और फिर अपनी जेब से दवा खरीदता है। कई शिकायतों के बाद नई व्यवस्था के तहत ओपीडी में चिकित्सकों को फार्मेसी में उपलब्ध दवाओं की अपडेट सूची दी जा रही है। इसके बावजूद मरीजों को पर्चे के अनुसार पूरी दवा नहीं मिल रही है।
पिता को कमर में दर्द की गंभीर समस्या है। उन्हें आर्थो ओपीडी में डाक्टर ने पर्चे पर सात दवाएं लिखी थीं, लेकिन दवा काउंटर से सिर्फ चार दवाएं ही मिलीं। कर्मचारी ने बाकी दवाएं बाहर से लेने की सलाह दी है।
- कृष्णकांत तिवारी, तीमारदार
ओपीडी में डाक्टर ने पर्चे में तीन दवाएं लिखी थीं, दवां काउंटर से सिर्फ दो ही मिलीं। तीसरी दवा ही महंगी है। आज काम से छुट्टी लेकर आया था। लाइन में खड़े-खड़े दोपहर हो गई है। अब दिहाड़ी भी मारी गई और जेब से रुपये भी खर्च हो गए। - संजीव कुमार, मरीजशासन स्तर से सरकारी डाक्टरों को बाहर की दवाएं लिखने पर रोक है। अस्पताल की फार्मेसी में दवाओं को पर्याप्त स्टाक है। मरीजों को अगर बाहर से दवाएं लेने के लिए कहा जा रहा है तो गंभीर मामला है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
- डा. मनीष राठी, डीएमएस, जिला नागरिक अस्पताल
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