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IMT मानेसर के पास फिर भी विकास से दूर 4 गांव, 2004 में लगा कृषि जोन अब किसानों के लिए बना परेशानी

Published: Sat, 12 Sep 2026 04:14 PM (IST)

गुरुग्राम के मानेसर क्षेत्र के चार गांवों के किसान अपनी ज़मीन पर लगे कृषि ज़ोन की बंदिशों को हटाने की ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. मानेसर के चार गांवों में कृषि ज़ोन हटाने की मांग।

  2. 2004 से लागू प्रतिबंध विकास और व्यावसायिक गतिविधियों में बाधा।

  3. किसानों ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर गुहार लगाई।

जागरण संवाददाता, मानेसर (गुरुग्राम)। गुरुग्राम के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के बीच मानेसर क्षेत्र के चार गांवों के किसान वर्षों पुरानी कृषि जोन की बंदिशों से परेशान हैं। दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित पचगांव चौक से जमालपुर के बीच बसे मोकलवास, खरखड़ी, पुखरपुर और बासलांबी की जमीन को वर्ष 2004 में कृषि जोन में शामिल किया गया था। ग्रामीण अब इस जोन को हटाने की मांग कर रहे हैं, ताकि क्षेत्र में बदलते समय के साथ विकास और व्यावसायिक गतिविधियों का रास्ता खुल सके।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2004 में इन गांवों की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही थी। किसानों के विरोध के बाद अधिग्रहण से बचाने के लिए जमीन को कृषि जोन में शामिल कर दिया गया था। उस समय परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन अब गुरुग्राम और मानेसर का तेजी से विस्तार हो चुका है।

इसके बावजूद इन गांवों की जमीन पर आज भी कृषि के अलावा अन्य गतिविधियों को अनुमति नहीं मिल पा रही है। वहीं, आसपास के गांवों में बड़े-बड़े वेयरहाउस और व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो चुके हैं। इससे इन चार गांवों के किसानों को अपनी जमीन का उचित उपयोग करने और उससे आर्थिक लाभ लेने का अवसर नहीं मिल रहा है।

कई बार दे चुके हैं पत्र

ग्रामीणों का तर्क है कि चारों गांव आइएमटी मानेसर के नजदीक हैं और केएमपी एक्सप्रेसवे भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। क्षेत्र में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में इन गांवों को कृषि जोन में बनाए रखना विकास की संभावनाओं को सीमित कर रहा है।

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कृषि जोन हटाने की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र दे चुके हैं। अब एक बार फिर किसानों ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और पटौदी विधायक बिमला चौधरी को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी है।

ग्रामीणों का कहना है कि गुरुग्राम के लगातार विस्तार और क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को कृषि जोन की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए।

पचगांव चौक से जमालपुर तक बनी सड़क किनारे बसे चार गांवों को कृषि जोन में शामिल किया गया है। इन गांवों कृषि से अलावा किसी अन्य कार्य को मंजूरी नहीं मिल रही है। आसपास के गांवों में लोगों के पास रोजगार के साधन उपलब्ध हो गए हैं। यहां कृषि जोन को हटाना चाहिए।

- सतीश यादव, पूर्व सरपंच, खरखड़ी

आइएमटी मानेसर के नजदीक के सभी गांवों में काफी विकास हो चुका है। रोजगार के साधन भी उपलब्ध होने लगे हैं लेकिन इन गांवों में कुछ नहीं हो रहा है। इन चारों गांवों को कृषि जोन से बाहर निकाला जाना चाहिए ताकि यहां के लोग भी अपनी जमीन पर व्यावसायिक कार्य कर सकें।

- दुर्गा, किसान, मोकलवास

इन चारों गांवों की जमीन को 2004 में कृषि जोन के शामिल किया गया था। उस समय से इन गांवों में केवल कृषि से संबंधित कार्य ही किए जा रहे हैं। अन्य कार्यों को मंजूरी मिलने से यहां वेयरहाउस या अन्य व्यवसायिक कार्य किए जा सकेंगे।

- वेद प्रकाश, मोकलवास

बिलासपुर, जमालपुर, मानेसर और पचगांव के दूसरी तरफ सभी गांवों में निजी उद्योग लग चुके हैं। सभी गांवों के लोग संपन्न होने लगे हैं। हमारे गांवों को कृषि जोन में डालकर किसानों पर ऊपर बोझ डाल दिया गया है। यहां किसी भी कार्य को मंजूरी नहीं मिल रही है। इन गांवों को कृषि जोन को हटाया जाना चाहिए।

- मनोज यादव, चेयरमैन, मार्केट कमेटी, पटौदी मंडी