गुरुग्राम में स्टिल्ट प्लस चार मंजिल निर्माण पर रोक के संकेत, एफएआर खरीद पर हाईकोर्ट सख्त
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम में एफएआर खरीदकर स्टिल्ट प्लस चार मंजिल निर्माण पर सख्त टिप्पणी की है, जिससे शहरी अव्यवस्था बढ़ने की चिंता जताई।

एफएआर खरीद पर हाईकोर्ट सख्त ( एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
हाईकोर्ट ने एफएआर खरीदकर निर्माण पर जताई गंभीर चिंता।
गुरुग्राम में स्टिल्ट प्लस चार मंजिल निर्माण से अव्यवस्था बढ़ रही।
कोर्ट ने भविष्य में निर्माण अनुमति रोकने के दिए संकेत।
गौरव सिंगला, नया गुरुग्राम। स्टिल्ट पार्किंग प्लस चार मंजिल के निर्माण को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणियां कीं।
कोर्ट ने खरीदे जा सकने वाले फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के प्रविधानों के कारण गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों में शहरी अव्यवस्था और स्लम जैसी परिस्थितियां पैदा हो रही हैं। एफएआर खरीदकर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति देने की व्यवस्था केवल राजस्व जुटाने का माध्यम नहीं होनी चाहिए।
13 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष करीब डेढ़ घंटे तक सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया और अगली सुनवाई के लिए 13 नवंबर की तारीख निर्धारित की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निवेदिता शर्मा ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के 25 सितंबर 2026 के एक पत्र को कोर्ट के सामने रखा। यह पत्र निदेशालय की ओर से गुरुग्राम के जिला नगर योजनाकार (प्लानिंग) को जारी किया गया था।
इसमें सेक्टर-88बी की एक प्लाटेड एनआईएलपी श्रेणी की कॉलोनी में स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के निर्माण के लिए मैनुअल तरीके से बिल्डिंग प्लान स्वीकृत करने की दिशा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
पत्र में 10.075 एकड़ में विकसित की जा रही कॉलोनी का उल्लेख है। यह परियोजना लाइसेंस नंबर 109 ऑफ 2026 के तहत नीम सिक्योर प्राइवेट लिमिटेड विकसित कर रही है। विभाग ने एनआईएलपी नीति के प्रविधानों के तहत प्लाटों पर ग्लोबल एफएआर के उपयोग और सर्विस प्लान के अनुमान स्वीकृत होने का हवाला दिया था।
तत्काल कोर्ट में पेश हों अधिकारी
याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि जब हाईकोर्ट की ओर से स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के निर्माण पर रोक प्रभावी है, तो विभाग इस तरह के निर्देश कैसे जारी कर सकता है। इस पर पीठ ने संबंधित विभागीय अधिकारी को तत्काल कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए।
अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जानकारी के आधार पर पत्र जारी किया गया था, लेकिन बाद में दस्तावेजों और परियोजना की श्रेणी का अध्ययन करने के बाद नक्शे स्वीकृत नहीं किए गए।
पार्किंग और पड़ोसियों के विवाद पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान हरियाणा बिल्डिंग कोड के तहत 165 प्रतिशत एफएआर के अतिरिक्त 99 प्रतिशत एफएआर खरीदने यानी कुल 264 प्रतिशत तक निर्माण की व्यवस्था का मुद्दा उठा। कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि एफएआर खरीदने की व्यवस्था अनियंत्रित निर्माण को वैधता देने का जरिया नहीं बननी चाहिए।
स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के निर्माण से पार्किंग की समस्या और पड़ोसियों के बीच विवाद बढ़ने की आशंका पर भी कोर्ट ने चिंता जताई। कोर्ट ने भविष्य में अपने आदेशों में संशोधन कर खरीदे जा सकने वाले एफएआर के आधार पर निर्माण की अनुमति पर रोक लगाने की संभावना भी जताई।
साथ ही नए स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के नक्शे मैनुअल या ऑनलाइन किसी भी तरीके से स्वीकृत नहीं करने के निर्देश दिए। फ्लोर की बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लगाने जैसे संभावित कदमों पर भी चर्चा हुई।
हालांकि इन पर अभी कोई अंतिम आदेश नहीं हुआ है। अब 13 नवंबर की सुनवाई पर गुरुग्राम में इस निर्माण नीति का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।
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