260 करोड़ लेने के बाद भी नहीं दिए प्लॉट, लेआउट बदलकर बदले नंबर और लोकेशन; ED की जांच में खुलासा
ईडी की जांच में सामने आया है कि वाटिका ग्रुप ने प्लॉट के नाम पर खरीदारों से करोड़ों रुपये लेने ...और पढ़ें
-1763721703220-1763722876218-1763722884523_m-1790858291621_m.webp)
वाटिका ग्रुप पर ईडी का शिकंजा: 260 करोड़ लेकर भी नहीं दिए प्लॉट।
HighLights
वाटिका ग्रुप ने करोड़ों रुपये लेकर भी प्लाट नहीं दिए।
ईडी जांच में 260 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ।
वाटिका के एमडी और प्रमोटर को गिरफ्तार किया गया।
संवाद सहयोगी, बादशाहपुर। वाटिका ग्रुप की परियोजनाओं में प्लॉट के नाम पर करोड़ों रुपये लेने के बावजूद खरीदारों को जमीन की डिलीवरी नहीं किए जाने का मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया है।
ईडी के अनुसार, वर्ष 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने वाटिका लिमिटेड को करीब 260 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इनमें एसईएच रियलटर्स, एचए रियलटर्स, एएचपी, स्पैन इंडिया और पाजिटिव बिल्डवेल से जुड़े सौदे शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार ये सौदे सेक्टर-84-85 स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट और सेक्टर-88ए स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 परियोजनाओं से संबंधित हैं। प्लॉट आवंटन को लेकर वर्ष 2014-15 में अलग-अलग समझौते किए गए थे।
ईडी के मुताबिक बाद में परियोजनाओं के लेआउट में बदलाव किया गया और पहले आवंटित प्लॉट के नंबर और लोकेशन बदल दिए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ प्लॉट से जुड़ी जमीन बाद में दूसरे खरीदारों को भी आवंटित या बेच दी गई।
1.10 लाख वर्ग गज जमीन, 90 करोड़ रुपये और अब तक डिलीवरी नहीं
ईडी की जांच में वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 का मामला सबसे गंभीर बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यहां करीब 1.10 लाख वर्ग गज जमीन के लिए खरीदारों से 90 करोड़ रुपये लिए गए थे। करीब 14 वर्ष बीतने के बावजूद एक भी प्लॉट की डिलीवरी नहीं होने का दावा ईडी ने किया है।
एक अन्य सौदे में कुल 88,835 वर्ग गज जमीन में से 65,117 वर्ग गज की डिलीवरी वर्ष 2019 से 2023 के बीच किए जाने की बात सामने आई है। वहीं 23,718 वर्ग गज जमीन अभी लंबित बताई गई है। वाटिका इंडिया नेक्स्ट परियोजना में भी करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट की डिलीवरी लंबित होने का ईडी ने दावा किया है।
परियोजनाओं से रकम दूसरी कंपनियों में भेजने का आरोप
ईडी की जांच में खरीदारों से प्राप्त रकम को संबंधित परियोजनाओं में लगाने के बजाय समूह की अन्य कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में स्थानांतरित किए जाने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी ने ऐसी रकम करीब 154.4 करोड़ रुपये आंकी है।
इसी मामले में वाटिका के प्रबंध निदेशक अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया गया है। दोनों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है। ईडी की कार्रवाई और जांच में सामने आए तथ्यों पर आरोपित पक्ष का अंतिम पक्ष अदालत की कार्यवाही में स्पष्ट होगा।
