प्रदूषण पर सीएम का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, गुरुग्राम के दोनों क्षेत्रीय अधिकारी निलंबित
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही बरतने पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के ...और पढ़ें

समीक्षा बैठक के दौरान सीएम सैनी ने तेवर सख्त। फोटो: आर्काइव
HighLights
सीएम सैनी ने गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण पर सख्त कार्रवाई की।
एचएसपीसीबी के दो क्षेत्रीय अधिकारी लापरवाही के आरोप में निलंबित।
आकांक्षा तंवर और मुकेश कुमार पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। प्रदूषण के लिए दुनिया भर में बदनाम हो रही साइबर सिटी में अब अधिकारियों की जवाबदेही तय होने लगी है। गुरुग्राम के विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के गुरुग्राम में तैनात दोनों क्षेत्रीय अधिकारियों (आरओ) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबित अधिकारियों में आकांक्षा तंवर और मुकेश कुमार शामिल हैं। दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्यों में लापरवाही बरतने की शिकायतें सामने आई थीं।
मुख्यमंत्री की इस कार्रवाई को गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि संभवत: पहली बार गुरुग्राम में तैनात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दोनों आरओ पर एक साथ कार्रवाई हुई है। इससे उन अधिकारियों में भी खलबली मच गई है, जिनकी जिम्मेदारी प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की है।
गुरुग्राम में प्रदूषण की समस्या नई नहीं है। हर साल सर्दी शुरू होते ही साइबर सिटी की हवा की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय बन जाती है। धूल, सड़क किनारे उड़ती मिट्टी, निर्माण गतिविधियां, खुले में कचरा जलाना और वाहनों से होने वाला प्रदूषण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार बैठकें होती हैं। विभागों को निर्देश दिए जाते हैं और कार्रवाई की रिपोर्ट भी तैयार होती है, लेकिन जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखता।
हालात यह हैं कि अक्टूबर की शुरुआत से पहले ही प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। ऐसे समय में जब सर्दियों में प्रदूषण और बढ़ने की आशंका रहती है, मुख्यमंत्री की कार्रवाई ने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सिर्फ आदेश नहीं, कार्रवाई भी दिखानी होगी
गुरुग्राम को देश के सबसे विकसित और आधुनिक शहरों में गिना जाता है। यहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय हैं, लाखों लोग काम करते हैं और देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। इसके बावजूद प्रदूषण साइबर सिटी की पहचान पर लगातार दाग लगा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रदूषण के कारण हर साल हालात बिगड़ते हैं तो जिम्मेदार विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पाते? मुख्यमंत्री की कार्रवाई से साफ संकेत गया है कि अब केवल बैठक करने और कागजों पर निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा।
अधिकारियों को मौके पर उतरकर प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई करनी होगी और उसकी प्रभावी निगरानी भी करनी होगी। दोनों आरओ का निलंबन इसी जवाबदेही की दिशा में उठाया गया सख्त कदम माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि इस कार्रवाई के बाद गुरुग्राम की हवा सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाई देता है।
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