सैटेलाइट सर्वे में फंसा 1.20 लाख एकड़ का फसल रिकॉर्ड, 80 हजार एकड़ सुधरा; हरियाणा के हजारों किसान परेशान
फतेहाबाद में 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल और सैटेलाइट सर्वे के मिलान में 1.20 लाख एकड़ से अधिक फसल क्षेत्र ...और पढ़ें
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मेरी फसल, मेरा ब्योरा के तहत रिकॉर्ड फंसा (फाइल फोटो)
HighLights
फतेहाबाद में 1.20 लाख एकड़ फसल रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी
'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर किला नंबर, रकबा गलत दर्ज
किसानों को एमएसपी पर फसल बेचने में हो रही भारी परेशानी
जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। खेत में फसल किसान की, जमीन किसान की और मेहनत भी किसान की, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में किला नंबर की गड़बड़ी ने अपनी ही उपज बेचने का रास्ता मुश्किल कर दिया है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल और सैटेलाइट सर्वे के मिलान में जिले के 1.20 लाख एकड़ से अधिक फसल क्षेत्र का रिकॉर्ड मेल नहीं खाया। यानी खरीफ सीजन में पंजीकृत 3 लाख 96 हजार 824 एकड़ क्षेत्र का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा मिसमैच मिला।
इनमें से करीब 80 हजार एकड़ का रिकॉर्ड दुरुस्त किया जा चुका है, लेकिन बाकी किसानों की परेशानी पूरी तरह दूर नहीं हुई है। कहीं खेत में फसल सही है, मगर पोर्टल पर किला नंबर गलत दर्ज है तो कहीं किसान के दावे के अनुसार सही पंजीकरण होने के बावजूद रकबा कम दिख रहा है। इसका सीधा असर मंडियों में गेट पास बनवाने और फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेचने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
पटवारियों की हड़ताल की वजह से हुई सैटेलाइट से गिरदावरी
इस बार पटवारियों की हड़ताल के चलते सरकार ने सैटेलाइट के माध्यम से फसलों की गिरदावरी करवाई। सैटेलाइट से मिली रिपोर्ट का कृषि विभाग, राजस्व विभाग व नहरी विभाग के पटवारियों ने सत्यापन किया। इसी दौरान पोर्टल पर दर्ज फसल और खेत की वास्तविक स्थिति के बीच बड़े पैमाने पर अंतर सामने आया।
करीब 1.20 लाख एकड़ का रिकॉर्ड मिसमैच मिलने के बाद सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई। करीब 80 हजार एकड़ का विवरण ठीक किया गया, लेकिन जिन किसानों के रिकॉर्ड में अब भी त्रुटि है, उन्हें शिकायत देकर समाधान करवाना पड़ रहा है। किसानों के सामने चिंता यह है कि फसल तैयार होने के बाद बिक्री के समय रिकॉर्ड की गड़बड़ी उनके लिए परेशानी खड़ी कर रही है।
31 एकड़ का पंजीकरण, रिकॉर्ड में बचा 20 एकड़
गड़बड़ी का असर केवल किला नंबर तक सीमित नहीं है। कुछ किसान रकबा घटाए जाने की शिकायत भी कर रहे हैं। भूना के किसान सुरेंद्र के अनुसार, उसने 31 एकड़ जमीन का पंजीकरण करवाया था, लेकिन अब पोर्टल पर केवल 20 एकड़ क्षेत्र दिखाई दे रहा है।
भूना के ही संदीप का दो एकड़ का पंजीकरण था, उसे ही हटा दिया गया। अधिकारी बताते है कि पंजीकरण में मिसमैच की एक प्रमुख वजह किसानों को अपने खेत के किला नंबर की सही जानकारी नहीं होना बताई जा रही है।
कई किसानों ने फसल तो सही बोई, लेकिन पंजीकरण करवाते समय दूसरे किला नंबर में फसल दर्ज हो गई। इसका असर परमल धान की बिक्री और बाजरा उत्पादकों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ मिलने पर भी पड़ सकता है। इसलिए किसानों को फसल बेचने से पहले अपना पंजीकरण, किला नंबर और दर्ज रकबे की जांच करनी चाहिए।
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शिकायत पर गठित टीम करेगी जांच
जिन किसानों के पंजीकरण में अब भी गलत जानकारी दिखाई दे रही है, वे एसडीएम को लिखित शिकायत दे सकते हैं। एसडीएम शिकायत संबंधित अधिकारी को भेजेंगे और गठित टीम मामले की जांच करेगी। किसान शिकायत के साथ जमीन के दस्तावेज, किला नंबर और फसल से जुड़े उपलब्ध साक्ष्य दें, ताकि रिकॉर्ड का सत्यापन कर सुधार किया जा सके।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत फसल का विवरण (पिछले 3 वर्ष)
| फसल का नाम | फसल वर्ष 2024 (एकड़ में) | फसल वर्ष 2025 (एकड़ में) | फसल वर्ष 2026 (एकड़ में) |
| परमल धान | 3,24,106 | 3,23,832 | 2,97,729 |
| धान बासमती | 33,596 | 37,542 | 37,228 |
| कपास | 70,262 | 88,207 | 48,302 |
| बाजरा | 6,630 | 10,756 | 8,289 |
| गन्ना | 2,425 | 3,253 | 4,577 |
| मक्का | 3,896 | 239 | 699 |
| कुल पंजीकृत | 4,40,915 | 4,63,829 | 3,96,824 |
नोट: तालिका में दर्शाए गए सभी आंकड़े एकड़ में हैं।
रबी सत्र के लिए किसान रखें सावधानी
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आगामी गेहूं और सरसों के रबी सत्र से पहले अपने रिकॉर्ड जांचने की सलाह दी है। हरियाणा सरकार के डिजिटल लेंड रिकॉर्ड पोर्टल की साइट hsac.in पर जाकर अपने खेत का खसरा नंबर देखे।
इस पोर्टल पर गुगल मेप की तरह खेत का रिकॉर्ड दिखाई देता है। सीएससी केंद्र पर पंजीकरण कराते समय सुनिश्चित करें कि बोआई वाले खेत का सही किला नंबर दर्ज हो। फसल बड़ी होने पर मोबाइल से जीपीएस युक्त फोटो लेकर सुरक्षित रखें, ताकि मिसमैच होने पर साक्ष्य के आधार पर रिकॉर्ड में सुधार कराया जा सके।
