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सूरजकुंड दीवाली मेले में नहीं पहुंच रहे लोग, खरीदारों के इंतजार में बैठे शिल्पकारों की बढ़ी चिंता

Published: Sat, 24 Oct 2026 05:04 PM (IST)

सूरजकुंड दीवाली मेले का शुक्रवार को उद्घाटन किया गया। हालांकि इस मेले में कम लोग पहुंच रहे हैं, जिससे हस्तशिल्पी ...और पढ़ें

HighLights

  1. सूरजकुंड दीवाली मेले में दर्शकों की संख्या बेहद कम रही।

  2. हस्तशिल्पी और स्टाल संचालक बिक्री न होने से परेशान हैं।

  3. मुख्य चौपाल पर बिजली कटौती ने कलाकारों को बाधित किया।

निभा रजक, फरीदाबाद। सूरजकुंड दीवाली मेले में दर्शकों का रुझान कम देखने को मिल रहा है। मेले के दूसरे दिन उम्मीद थी कि दर्शक अधिक संख्या में पहुंचेंगे। लेकिन मेला परिसर में दर्शकों की संख्या बेहद कम दिखी।

मुख्य चौपाल की आधी से अधिक कुर्सियां भी खाली नजर आईं। स्टाल संचालकों का कहना है कि स्थिति को देखकर लगता है जैसे मेला में किराया तक नहीं निकल पाएगा। कुछ हस्तशिल्पियों की अभी तक स्टाल भी नहीं लग पाई है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया था उद्घाटन

23 से 26 अक्टूबर तक सूरजकुंड में आयोजित हो रहे दिवाली मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को किया। साथ में पर्यटन एवं विरासत मंत्री डा. अरविंद शर्मा भी उपस्थित रहे।

सरकार और पर्यटन विभाग की ओर से आत्मनिर्भर भारत तथा स्वदेशी के संकल्प को साकार करने वाले श्रम साधकों, कारीगरों और कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए तीसरी बार यह मेला आयोजित किया गया है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से कलाकार और हस्तशिल्पी मेला में पहुंचे हैं। लेकिन दर्शकों की कम संख्या मेला को फीका कर रही है। मेले में प्रवेश निशुल्क होने के बावजूद लोगों में खास उत्साह नजर नहीं आ रहा है।

मुख्य चौपाल की कुर्सियां खाली

मुख्य चौपाल पर प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कलाकार लोकगीत और नृत्य की प्रस्तुति दे रहे हैं। भव्य प्रस्तुति में देश की संस्कृति और समृद्ध विरासत की झलक साफ नजर आ रही है। लेकिन इन कलाकारों की प्रशंसा करने तथा प्रस्तुतियों को देखने वाले दर्शकों की कमी है।

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मेला का क्रेज बहुत ज्यादा दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्य चौपाल की अधिकांश कुर्सियां खाली पड़ी हैं। मुख्य चौपाल पर कलाकारों को शनिवार को बिजली कटौती की समस्या से जूझना पड़ा।

सुबह करीब 12 बजे चौपाल पर हरियाणा की धाकड़ छोरियां प्रस्तुति दे रही थी, इसी बीच अचानक म्यूजिक बंद हो गया। जिससे कलाकारों को नृत्य बीच में रोकना पड़ा और फिर दोबारा से प्रस्तुति दी। बार-बार कलाकारों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा।

बीन-नगाड़े की गूंज सुनने वाले नहीं

मेले में बीन और नगाड़ा बजाने वाले कलाकार भी खाली बैठे दिखाई दिए। जिस धुन पर मेले में दर्शक थिकरने के लिए मजबूर हो जाते हैं। उस धुन पर बजाने वाले खाली और मायूस नजर आए।

बंचारी से पहुंचे टीम धर्मेंद्र नगाड़ा पार्टी के धर्मेंद्र ने बताया कि मेला में दर्शकों की प्रतिक्रिया बहुत अच्छी देखने को नहीं मिल रही है। रविवार को अधिक संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।

अब तक खरीदारी की स्थिति बेहद कमजोर है और खर्च निकालना भी मुश्किल लग रहा है। उम्मीद थी कि दिवाली के अवसर पर मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे तथा हस्तशिल्प, सजावटी सामान तथा अन्य उत्पादों की खरीदारी करेंगे। लेकिन रूझान बहुत ज्यादा नजर नहीं आ रहा है।

-सोनिया, स्टाल संचालक।

हमने भी इसी उम्मीद में सामान तैयार किया और स्टाल लगाया था कि दिवाली के समय खरीदारी होगी।लेकिन यहां खरीदार कम आ रहे हैं। लोग स्टाल तक पहुंचेंगे, तभी सामान की खरीदारी होगी। अभी तक कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ है।

श्लोक, स्टाल संचालक।

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