फरीदाबाद [सुशील भाटिया]। न्यू इंडस्ट्रियल टाउन (एनआइटी) फरीदाबाद की स्थापना दिवस के अवसर पर दैनिक जागरण ने फरीदाबाद इंडस्ट्री एसोसिएशन के सहयोग से शनिवार शाम को वेबिनार आयोजित किया। वेबिनार में फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक नरेंद्र गुप्ता, बड़खल क्षेत्र की विधायक सीमा त्रिखा, पृथला क्षेत्र से विधायक व हरियाणा वेयरहाउस कार्पोरेशन के चेयरमैन नयनपाल रावत सहित औद्योगिक नगरी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले लखानी अरमान ग्रुप के चेयरमैन केसी लखानी, पूर्व वरिष्ठ आइएएस अधिकारी एनसी वधवा सहित शहर के नामी उद्योगपति, डाक्टर, समाजसेवी जुड़े और एनआइटी से जुड़ी यादों को ताजा किया। वेबिनार का संचालन फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान बीआर भाटिया ने किया। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने भी एनआइटी निवासियों को अपनी शुभकामनाएं दी।

एनआइटी के पुरुषार्थियों ने त्रासदी को अवसर में बदला : नरेंद्र गुप्ता

विधायक नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि देश विभाजन के समय उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत के छह जिलों बन्नू, कोहाट, मर्दान, पेशावर, हजारा, डेरा इस्माइल खान (अब पाकिस्तान में) से 50 हजार लोग शरणार्थी बन कर आए थे, उनके पास कुछ भी नहीं थी। इन शरणार्थियों ने अपने पुरुषार्थ से त्रासदी के दंश को एक तरफ रखते हुए इसे अवसर में बदला और धीरे-धीरे स्थिति को सामान्य करते हुए बाद में अपने उद्यम स्थापित करते हुए हरियाणा प्रदेश और भारत देश की प्रगति में भी अहम भूमिका निभाई।

न्यू इंडस्ट्रियल टाउन के बिना फरीदाबाद की पहचान नहीं : नयनपाल रावत

विधायक नयनपाल रावत ने कहा कि उन्हें याद है कि एनआइटी की मंडी में और यहां के घरों में अपने भाई के साथ दूध की आपूर्ति करने आते थे। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि एनआइटी के बुजुर्गों ने हरियाणा की तरक्की में योगदान दिया है और एनआइटी के बिना तो फरीदाबाद जिले की पहचान ही अधूरी है। उन्होंने शहर के बुजुर्गों को नमन किया।

शहर को बसाने में बुजुर्गों ने दूरदर्शिता से लिया काम : सीमा

बड़खल क्षेत्र की विधायक सीमा त्रिखा ने कहा कि एनआइटी के बुजुर्ग जब देश विभाजन के बाद फरीदाबाद आए, तो अपने साथ शहीदे आजम सरदार भगत सिंह के विचारों को साथ लिए, उनमें वही चेतना थी, जो भगत सिंह जी में थी। अपने पुरुषार्थ से एनआइटी को स्थापित किया और इसे पूरे विश्व में पहचान दिलाई।

वक्ताओं ने अपने शहर के लिए किए गए संघर्ष में अहम भूमिका निभाने वाले खुदाई खिदमतगारों स्व.कन्हैया लाल खट्टक, खामोश सरहदी पं.गोबिंद दास, सालार सुखराम, लक्खी चाचा, पंडित अनंत राम शौक, श्रीचंद मर्दानी, खुशी राम गणखेल, जेठा नंद, चौ.दयालागंद, दुली चौधरी, तोता राम, निहाल चंद, छत्तू राम गेरा, सरदार गुरबचन सिंह को भी याद किया, साथ ही आज एनआइटी के बुजुर्गों के रूप में सरताज डा.छबील दास भाटिया, मास्टर सुंदर दास खत्री, चौधरी केवल राम भाटिया, केसी बांगा की सेवाओं को भी याद किया। शिक्षा के क्षेत्र में आम आदमी के बच्चों के लिए स्कूलों का जाल फैलाने वाले महात्मा कन्हैया लाल मेहता की मुक्त कंठ से सराहना की।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय प्रताप सिंह ने भी फरीदाबाद निवासियों को शहर के जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।

'शहर के बुजुर्गों को जाता है श्रेय'

केसी लखानी (चेयरमैन, लखानी अरमान ग्रुप) का कहना है कि इस शहर को स्थापित करने वाले बुजुर्गों को नमन। आज लोग मुझे किशन चंद लखानी से अगर लखानी साहब कह कर बुलाते हैं, तो उसका बड़ा श्रेय शहर के बुजुर्गों को जाता है। शहर के युवाओं को नौकरी देने वाले एस्कार्ट्स समूह के संस्थापक एचपी नंदा को भी नमन।

'सामाजिक संस्थाओं ने दिलाई शहर का खास पहचान'

सतीश भाटिया (कोषाध्यक्ष, फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) ने बताया कि मैंने अपने एक नंबर डी ब्लाक स्थित उस पुराने निवास स्थान की ईंट आज भी संभाल कर रखी है, जिस मकान को हमारे बुजुर्गों ने बनाया था। शहर की सामाजिक संस्थाओं की अहम भूमिका है एनआइटी को पहचान दिलाने में।

'बेहद सामाजिक हैं यहां के बुजुर्ग'

एनसी वधवा (पूर्व वरिष्ठ आइएएस अधिकारी) का कहना है कि मुझे 1994 में एनआइटी में स्थित नगर निगम के मुख्यालय में मुख्य प्रशासक के रूप में काम करने का मौका मिला और शहरवासियों के साथ नजदीकी संपर्क रहा। एनआइटी के बुजुर्ग व लोग सभी बेहद सामाजिक हैं। एनआइटी के जन्मदिन की बधाई।

'बिना दरवाजों के रहते थे अपने घरों में'

केसी बांगा (वरिष्ठ समाजसेवी) बताते हैं- 'मेरी उम्र 13 साल थी, जब देश का विभाजन हुआ। हमें भी अपने बुजुर्गों के साथ त्रिमूर्ति चौक पर दिए गए धरने में शामिल होने का मौका मिला। जब शहर स्थापित हुआ, तो हम अपने घरों में बिना दरवाजे के ही रहने लगे थे।'

'अपनी मेहनत से लोगों ने कमाया नाम'

श्याम सुंदर कपूर (उद्योगपति) बताते हैं कि इस शहर के लोगों ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया और अपनी मेहनत से आत्मनिर्भर बने और हरियाणा प्रदेश की तरक्की में योगदान दिया। जन्मदिन की ढेर सारी बधाई। बुजुर्गों को शत-शत नमन।

'लोगों में भरी है सामाजिकता'

 एचएल भूटानी (उद्योगपति) कहते है कि मुझे एनआइटी की पहली आइटीआइ में प्राचार्य के रूप में काम करने का मौका मिला। यहां के निवासियों में सामाजिकता कूट-कूट कर भरी हुई है। बुजुर्गों से मिले संस्कारों को यहां के युवा आत्मसात कर रहे हैं।

'ऐसी मिसाल देश में कहीं नहीं मिलती'

मोहन सिंह भाटिया (प्रधान भाटिया, सेवक समाज) की मानें तो एनआइटी के बुजुर्गाें ने जो किया है, उसकी मिसाल पूरे देश में कहीं नहीं मिलती। उन्होंने इस शहर को बसाने में निस्वार्थ भाव से काम किया और मेहनत कर स्वयं ही आगे बढ़े। सामाजिकता यहां की पहचान है।

'गर्व है शहर का हिस्सा हूं'

डॉ. सुरेश अरोड़ा (पूर्व प्रधान, आइएमए) बताते हैं कि मुझे गर्व है कि मैं एनआइटी फरीदाबाद का हिस्सा हूं और यहां का निवासी हूं। इस शहर के स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई और दैनिक जागरण ने जो आयोजन कर लोगों को जोड़ा, बेहद सराहनीय कदम।

'नहीं उतार सकते अपने बुजुर्गों का कर्ज'

महेश बांगा  (मैनेजिंग ट्रस्टी, समन्वय मंदिर) कहते हैं कि हमारे बुजुर्गों ने समाजसेवा के जो संस्कार दिए, उन्हें ही हमने अपने जीवन में उतारा है। एनआइटी निवासी अपने बुजुर्गों का कर्ज नहीं उतार सकते। शत-शत नमन। 

उद्योग धंधों के मामले में यह शहर आज भी देश-दुनिया में अपना परचम लहरा रहा है।

बुजुर्गों के एहसानमंद रहेंगे शहरवासी: बीआर भाटिया

एनआईटी के निवासी हमेशा इस शहर के बुजुर्गों के एहसानमंद रहेंगे। मैंने अपने पिता डॉ.छबीलदास भाटिया से शहर के बुजुर्गों की मेहनत, समर्पण भाव और इमानदारी से शहर को बसाने में दिए गए योगदान के बारे में सुना है। मुझे गर्व है कि एनआईटी मेरी जन्मभूमि भी है और कर्म भूमि भी।

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