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ग्रेटर फरीदाबाद में करोड़ों की Master Road पर रात होते ही छा जाता है अंधेरा, बेसहारा पशु भी बढ़ा रहे खतरा

Published: Fri, 11 Sep 2026 03:55 PM (GMT+05:30)

ग्रेटर फरीदाबाद की मास्टर सड़कें शाम ढलते ही अंधेरे और जर्जर हालत के कारण जोखिम भरी हो जाती हैं, जिससे ...और पढ़ें

ग्रेटर फरीदाबाद का बुरा हाल।

ग्रेटर फरीदाबाद का बुरा हाल।

HighLights

  1. शाम ढलते ही ग्रेटर फरीदाबाद की सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं।

  2. बेसहारा पशु और गड्ढे वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा हैं।

  3. निवासी बेहतर रखरखाव और स्ट्रीट लाइट की मांग कर रहे हैं।

प्रवीन कौशिक, फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के दावे शाम ढलते ही खोखले नजर आने लगते हैं। ग्रेटर फरीदाबाद की कई मास्टर रोड पर दिन ढलते ही अंधेरा छा जाता है। कहीं सड़क की हालत जर्जर है तो कहीं बेसहारा पशु सड़क के बीचोंबीच डेरा जमाए बैठे रहते हैं।

ऐसे में इन सड़कों से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों के लिए सफर जोखिम भरा बन जाता है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु और जर्जर हिस्से दूर से दिखाई नहीं देते। अचानक सामने आए पशुओं को बचाने के प्रयास में वाहन चालक संतुलन खो सकते हैं।

वहीं, सड़क पर बने गड्ढे और टूटे हिस्से भी हादसों का कारण बन रहे हैं। दैनिक जागरण अपने अभियान वादे बनाम हकीकत के तहत आज जर्जर सड़क और अंधेरे के बारे में आपको बता रहा है।

तीन लाख लोग रह रहे सोसायटी में

ग्रेटर फरीदाबाद में इस समय 35 से अधिक सोसायटी में तीन लाख से अधिक लोग रह रहे हैं। लगातार रिहायश बढ़ रही है। आसपास 19 गांव भी हैं। अन्य गांव के लोग भी मास्टर रोड से आवागमन करते हैं। इसलिए यहां मास्टर रोड पर वाहनों का खूब दबाव रहता है।

WhatsApp Image 2026-09-11 at 15.29.22बेसहारा पशुओं से खतरा सड़कों पर अब बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ गई है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार रोज 10 हजार बेसहारा पशु सड़कों पर रहते हैं लेकिन इससे कहीं अधिक इनकी संख्या रहती है। अंधेरे में सबसे अधिक खबरात बेसहारा पशुुओं से ही रहता है। अचानक सामने आने से वाहन चालक संतुलन खो बैठता है। फिर या तो इससे टकराकर या फिर बचाव में कहीं और दुर्घटना को अनजाम दे देता है।

ग्रेटर फरीदाबाद में करोड़ों रुपये खर्च कर मास्टर रोड विकसित की जा रही हैं, लेकिन सड़क बनने के बाद उनके रखरखाव, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

- रामगोपाल शर्मा, पार्क गेंड्यूरा

शाम होते ही कई हिस्सों में ऐसा लगता है जैसे शहर की सारी व्यवस्था आफलाइन हो गई हो। प्रशासन को हादसा होने का इंतजार करने के बजाय पहले ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना चाहिए।

- निमिष पांडेय, बीपीटीपी विलास, सेक्टर-89

मास्टर रोड पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था, जर्जर हिस्सों की मरम्मत और बेसहारा पशुओं को हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। वरना विकास के नाम पर बनाई गई यही सड़कें वाहन चालकों के लिए खतरे का रास्ता बनती रहेंगी।

- बलराज सिंह, प्रधान, सेक्टर-85 इलीट फ्लोर बीपीटीपी

विभागीय अधिकारियों का काम है कि लोगों को सहूलियत प्रदान करना। लेकिन यहां तो मुसीबत बढ़ाई हुई है। मास्टर रोड पर ही सुरक्षित सफर नहीं बचा है।

- रवि चौधरी। प्रधान, इडन एस्टेट, सेक्टर-81

इस तरह की लापरवाही से यदि कोई हादसा होता है तो उसके जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज होने चाहिए। तभी अधिकारी सबक लेंगे।
- अमित कुमार। प्रधान, सेक्टर-75, ब्लाक एस

सड़क सुरक्षा के मुद्दे को लेकर कई बार बैठक में सुझाव दिए जाते हैं। यदि बैठक में मौजूद विभागीय अधिकारी सुझाव पर अमल करें तो काफी राहत मिल सकती है।

- अजीत सिंह। सेक्टर-88

महीनों से लाइटें खराब पड़ी हैं। कई बार शिकायत की है लेकिन समाधान नहीं हो सका है। अंधेरे की वजह से परेशान रहते हैं। वारदात होने का डर रहता है।
- सूरज जाखड़, सेक्टर-86, प्रिंसेस पार्क साेसायटी

सुरक्षा के लिहाज से सड़कों पर उजाला होना बेहद जरूरी है। अंधेरे में वारदात होने का डर रहता है। इस बारे में जरूरी कदम जल्द उठाए जाने चाहिए।

- रणबीर सिंह, सेक्टर-85

ग्रेटर फरीदाबाद में मास्टर रोड को बनाया जा रहा है। अधिकतर बन गई हैं, कहीं रह गई है तो उसे भी बनवा दिया जाएगा। यहां लाइटें भी लगवाई जा रही हैं।
- केएस पठानिया, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए

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