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गुरुग्राम में 10 महीने पहले बनी सड़क टूटी, बन गए गहरे गड्ढे; निगम के विकास पर उठे सवाल

Published: Thu, 10 Sep 2026 03:09 PM (GMT+05:30)

नगर निगम गुरुग्राम द्वारा सुशांत लोक-3 में 10 महीने पहले बनी सड़क टूट गई है, जिसमें गहरे गड्ढे बन गए ...और पढ़ें

10 महीने पहले बनी सड़क टूटी। जागरण

10 महीने पहले बनी सड़क टूटी। जागरण

HighLights

  1. सुशांत लोक-3 में 10 महीने में सड़क टूटी, गड्ढे बने।

  2. खराब निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी की कमी मुख्य कारण।

  3. निवासी मरम्मत और स्थायी जल निकासी समाधान की मांग कर रहे।

संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। नगर निगम गुरुग्राम की कार्यशैली और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाली तस्वीर सुशांत लोक-तीन की मुख्य सड़क पर साफ दिखाई दे रही है। करीब 10 महीने पहले नगर निगम की ओर से बनाई गई सड़क एक साल भी नहीं चल सकी।

बताया गया कि जगह-जगह से सड़क टूट चुकी है और एक से दो फुट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। वर्षा के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों की परेशानी और बढ़ गई है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क का निर्माण बिटुमिन से किया गया था, लेकिन निर्माण के समय जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। क्षेत्र में पहले से जलभराव की समस्या होने के बावजूद अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वर्षा का पानी सड़क पर जमा रहने से सड़क की परत कमजोर होती गई और कुछ ही महीनों में सड़क टूटने लगी।

एफ ब्लाक निवासी जोगिंदर सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण के समय ही स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को जलभराव की समस्या से अवगत कराया था। उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए सामान्य बिटुमिन सड़क के बजाय आरएमसी सड़क का निर्माण अधिक उपयुक्त रहेगा।

इसके बावजूद उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया और बिटुमिन सड़क बना दी गई। कई वर्षों तक शिकायत और गुहार लगाने के बाद करीब दस माह पहले सड़क का निर्माण कराया गया था। उम्मीद थी कि अब लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन एक साल पूरा होने से पहले ही सड़क की हालत फिर पहले जैसी हो गई।

गड्ढों में पानी, दुर्घटना का बढ़ा खतरा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। वर्षा के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।

निवासियों ने नगर निगम से सड़क की दोबारा मरम्मत कराने के साथ जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि जहां ड्रेनेज की व्यवस्था संभव नहीं है, वहां बार-बार बिटुमिन सड़क बनाने के बजाय आरएमसी जैसे टिकाऊ विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए।

लोगों का सवाल है कि जब निर्माण से पहले ही समस्या की जानकारी थी तो उसका समाधान किए बिना सड़क बनाने पर आखिर सरकारी धन खर्च क्यों किया गया।

इस बारे में इलाके के पार्षद प्रथम चंद्रा वशिष्ठ का कहना है कि उनकी तरफ से निगम आयुक्त के समक्ष यही प्रस्ताव रखा गया है कि जहां जहां ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं है, वहां सड़कें आरएमसी की बनाई जाए। अब इसी दिशा में एस्टीमेट भी तैयार करने शुरू कर दिए गए हैं।