33 मंजिल तक ऊंची इमारतें, लेकिन 10वीं मंजिल तक भी नहीं पहुंचता दमकल का इंतजाम; ग्रेटर फरीदाबाद में खतरा
ग्रेटर फरीदाबाद की आसमान छूती इमारतों में आग से बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं, जिससे हजारों लोगों की जान खतरे ...और पढ़ें

आसमां छूती इमारतें, जमीन पर दम तोड़ती फायर सेफ्टी।
HighLights
ग्रेटर फरीदाबाद की ऊंची इमारतों में हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की कमी।
फायर स्टेशन दूर होने से आग बुझाने में 25-30 मिनट की देरी।
बिल्डरों और अधिकारियों की फायर सेफ्टी में लापरवाही उजागर।
निभा रजक, फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद में इमारतें आसमान छू रही हैं, लेकिन आग से बचाव के लिए किए गए इंतजाम जमीन पर ही दम तोड़ रहे हैं। 30 से 35 मंजिला हाइराइज सोसायटी में आग लगने पर सांसत में हजारों लोगों की जान आ जाती है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिले में एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं है, जबकि मांग पिछले दो दशकों से की जा रही है। मौजूदा उपकरण 10वीं मंजिल तक भी मुश्किल से पहुंच पाते हैं। कई बार तो ऐसी स्थिति बन जाती है कि लोगों को बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझानी पड़ी है।
नवंबर 2021 में सेक्टर-70 स्थित रायल हेरिटेज सोसायटी में भीषण आग लगी थी, जिसे बुझाने के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम फेल होने के कारण स्थानीय लोगों और गार्डों ने बाल्टियों से पानी डालकर मदद की थी। करोड़ों के फ्लैट्स में रहने वाले लोग बदइंतजामी में स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

ग्रेटर फरीदाबाद में हाइराइज सोसायटी की संख्या अधिक है। गर्मी में दिनों में आगजनी की सबसे अधिक घटनाएं ग्रेटर फरीदाबाद की अलग-अलग सोसायटी से सामने आती हैं। लोगों ने बताया कि अधिकांश सोसायटी में फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जाती है।
अग्निशमन विभाग के अधिकारी फायर एनओसी और उपकरणों के जांच को लेकर गंभीर नहीं है। बिल्डरों की ओर से अधिकांश सोसायटी में आग से बचाव के कोई खास प्रबंध नहीं है। कई सोसायटी में तो फायर एक्सटिंग्विशर खराब पड़े हैं और फायर अलार्म बजते ही नहीं हैं।
लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए ने ली है, अपने स्तर उपकरणों की जांच तथा मरम्मत कराई जाती है।
दस किमी दूर है अग्निशमन केंद्र
ग्रेटर फरीदाबाद से फायर स्टेशन आठ से 10 किलोमीटर दूर है, जिससे पहुंचने में 25-30 मिनट लग जाते हैं। आग की स्थिति में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। सूचना देने के बाद जब तक दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंचती है, लोग आग बुझा चुके होते हैं। कई बार तो आग की चपेट में आने से लोगों का लाखों का नुकसान भी हो जाता है।
कब खत्म होगा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म का इंतजार
ग्रेटर फरीदाबाद में विकास की रफ्तार लगातार बढ़ी, लेकिन अग्निशमन व्यवस्था उसी गति से मजबूत नहीं हो सकी। शहर में बन रही बहुमंजिला इमारतों की संख्या को देखते हुए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की आवश्यकता है। इसकी क्षमता 70 मीटर तक पानी पहुंचाने की होती है।
फरीदाबाद में कोई हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं है। ग्रेटर फरीदाबाद की अलग-अलग आरडब्ल्यूए ने स्थानीय मंत्रियों और विधायकों हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मांग की है, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय अभी से तैयारी करनी चाहिए।
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ऊंची इमारतों की संख्या और आबादी के हिसाब से दमकल संसाधनों का आकलन कर नई व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है।
इंफो
50 से अधिक सोसायटी
03 लाख से अधिक परिवार
33-35 मंजिल तक है टावर
06अग्निशमन केंद्र
24 दमकल गाड़ी
12 बाइक
115 स्टाफ
ग्रेटर फरीदाबाद में आग लगने की घटनाएं.....
-28 मार्च: सेक्टर-78 में स्थित हैबिटेट रेजिडेंट्स सोसायटी में 12वें फ्लोर पर लगी थी आग
-24 अप्रैल: सेक्टर-82 स्थित फ्लोरिडा सोसायटी की पांचवी मंजिल पर लगी थी आग
-30 दिसंबर: ग्रेटर फरीदाबाद स्थित पुरी अमन विलास सोसायटी में लगी थी आग।
-12 अगस्त: सेक्टर-77 स्थित बीपीटीपी प्राइड सोसायटी के एक फ्लैट में लग गई थी आग।
ग्रेटर फरीदाबाद की अलग-अलग सोसायटी के आगजनी की घटनाएं कई बार सामने आ चुकी हैं। आग लगने पर समय पर मदद नहीं मिल पाती है। ग्रेटर फरीदाबाद अलग से फायर स्टेशन होना चाहिए।
-निर्मल कुलश्रेष्ठ, पूर्व प्रधान, पार्क ग्रेड्यूरा सोसायटी।फायर सेफ्टी के नाम पर सिर्फ खानापूरी होती है। सरकार को हाइड्रोलिक मशीन देनी चाहिए। ग्रेटर फरीदाबाद में बहुमंजिला इमारतों और लोगों की संख्या बढ़ रही है, लाखों लोगों के सुरक्षा का सवाल है।
-राजू वर्मा।ग्रेटर फरीदाबाद की आबादी के अनुसार फायर स्टेशन की मांग अधिकारियों और सरकार से की गई है, लेकिन घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।
-डा. संजय गर्ग।फायर स्टेशन भी ग्रेटर फरीदाबाद से करीब 10 किलोमीटर दूर हैं, ऐसे में आपातकालीन स्थिति में जब तक मदद के लिए दमकल की गाड़ियां पहुंचती हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
-दीपा सक्सेना।फायर सेफ्टी उपकरणों की आडिट को लेकर भी अधिकारी गंभीर नहीं है। फायर सेफ्टी विभाग के अधिकारी आते हैं और जांच के नाम पर खानापूरी करते चले जाते हैं। लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
- एडवोकेट ज्ञानेंद्र खटाना।सोसायटी में सुरक्षा के प्रबंध आरडब्ल्यूए की ओर से किए गए हैं। हर महीने फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच से लेकर जरूरत अनुसार मरम्मत कराई जाती है। निवासियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, अधिकारियों से समय पर मदद नहीं मिल पाती है।
-आकाशदीप पटेल, आरपीएस सवाना।मार्च में हैबिटेट सोसायटी में आग के कारण पांच फ्लैटों को नुकसान हुआ था। फायर सेफ्टी की टीम पहुंचने से पहले ही लोगों ने आग पर काबू पा लिया था। विभाग की ओर से समय पर मदद नहीं मिलती है।
-राधेश्याम गर्ग, सेक्टर-88।ग्रेटर फरीदाबाद में आगजनी से बचाव के प्रबंध बेहद चिंताजनक है। शहर की एक बड़ी आबादी डर के साये में रह रही है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।
-पंकज शर्मा, आरपीएस सवाना।हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के लिए टेंडर लगा दिया है। इसके बाद कार्रवाई बढ़ेगी। पूरी कोशिश है कि अगले साल में यह प्लेटफार्म यहां आ जाए।
- यादवेंद्र शर्मा, अग्निशमन अधिकारी
