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हाइब्रिड बीज से दोगुनी बड़ी हो गई मूली, कंपनी अब किसान को देगी ₹50,000 का हर्जाना

Published: Thu, 15 Oct 2026 02:28 PM (IST)

उपभोक्ता आयोग ने हाइब्रिड मूली के बीज से असामान्य आकार की फसल मिलने पर बीज कंपनी को किसान को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

किसान को मिलेगा 50 हजार हर्जाना। (AI-Generated image)

किसान को मिलेगा 50 हजार हर्जाना। (AI-Generated image)

HighLights

  1. किसान को हाइब्रिड मूली के बीज से नुकसान

  2. उपभोक्ता आयोग ने बीज कंपनी को दोषी माना

  3. कंपनी देगी किसान को 50 हजार रुपये हर्जाना

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। खेत में मूली की फसल तैयार हुई तो उसका आकार देखकर किसान को शायद अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन जब मूली का आकार सामान्य से लगभग दोगुना मिला तो किसान को अच्छा बाजार भाव पहीं मिला।

मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीज कंपनी को किसान को 50 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है।

एक पैकेट की कीमत 300 रुपये

गांव अरुआ निवासी रामेश्वर ने 3 नवंबर 2023 को बल्लभगढ़ स्थित भारत बीज भंडार से मूली के एफ वन हाइब्रिड एवोरी व्हाइट बीज के 8 पैकेट खरीदे थे। एक पैकेट की कीमत 300 रुपये थी। किसान के अनुसार, उसने कंपनी के दावों के आधार पर बीज खरीदे, लेकिन फसल की गुणवत्ता अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।

इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत देकर दो लाख रुपये मुआवजा, मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपये और 22 हजार रुपये मुकदमे के खर्च की मांग की।

सर्वे रिपोर्ट में सामने आया मूली का असामान्य आकार

मामले में पेश सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, मूली के पौधों की लंबाई 60 से 100 सेंटीमीटर, जड़ों की लंबाई 40 से 50 सेंटीमीटर और मोटाई आठ से 10 सेंटीमीटर दर्ज की गई। आयोग ने माना कि मूली का यह आकार सामान्य बाजार में बिकने वाली मूली की तुलना में लगभग दोगुना था। इससे बाजार में उसकी बिक्री और मिलने वाले भाव पर असर पड़ा।

बीज की गुणवत्ता पर संदेह, कंपनी पर मुआवजे की जिम्मेदारी

आयोग ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर बीज की गुणवत्ता ठीक न होने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर बीज निर्माता कंपनी टाइकून सीडटेक प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया गया कि वह आदेश की प्रति मिलने के 30 दिन के भीतर किसान को एकमुश्त 50 हजार रुपये का भुगतान करे। आयोग ने अलग से मुकदमे का खर्च देने का आदेश नहीं दिया।

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