यमुना के दूषित भूजल से फरीदाबाद को मिलेगा छुटकारा, 21 करोड़ से होगी सफाई
फरीदाबाद में यमुना किनारे के रेनीवेल का पानी शुद्धता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है, जिसमें आर्सेनिक और मैंगनीज की मात्रा अधिक है।

फरीदाबाद में यमुना किनारे के रेनीवेल का पानी शुद्धता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। इमेज एआई
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। यमुना किनारे लगे हुए रेनीवेल का पानी पूरे शहर में आ रहा है। यहां कई रेनीवेल ऐसे हैं जिनका पानी मानकों के अनुसार शुद्ध नहीं रहा है। इसलिए अब फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण इन रेनीवेल के पानी को साफ करने की योजना बना रहा है।
इस योजना पर 21.24 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस पानी को साफ करने के लिए अलग से ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा। इसके बाद रेनीवेल लाइन में इसी साफ पानी को शहर भेजा जाएगा। तीनों रेनीवेल से 30 एमएलडी पानी सप्लाई होता है जो करीब पांच लाख लोगों तक पहुंचता है।
22 रेनीवेल और 1600 ट्यूबवेल से आ रहा पानी
फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण द्वारा 22 रेनीवेल संचालित किए जा रहे हैं। इनसे करीब 200 एमएलडी पानी प्रतिदिन लिया जा रहा है। इसके अलावा करीब 1600 ट्यूबवेल भी पेयजल सप्लाई करते हैं। प्राधिकरण द्वारा समय-समय पानी की गुणवत्ता और भूजल स्तर की भी जांच कराई जाती रहती है।
इसके लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड से अनुबंध किया हुआ है। इसके अलावा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भी समय-समय पर पानी के नमूने लेकर जांच करता रहता है। प्राधिकरण की सातवी बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि कई रेनीवेल से जो पानी शहर में आ रहा है, वह पर्याप्त गुणवत्ता का नहीं है।
इसमें आर्सेनिक और मैगनीज की मात्रा काफी अधिक है। यह बढ़ी हुई मात्रा आमजन के शरीर पर प्रतिकूल असर डालती है। वैसे इनकी मात्रा 0.01 से 0.5 मिलीग्राम तक होनी चाहिए लेकिन कई रेनीवेल ऐसे हैं जहां यह मात्रा 0.937 से 0.459 तक है। इनमें कबूलपुर से आने वाली रेनीवेल लाइन नंबर पांच, ददसिया से आनी वाली लाइन नंबर 20 और 22 में सबसे अधिक इस भारी धातु की मात्रा है।
इन गांव में लगे हुए हैं रेनीवेल
यमुना नदी किनारे बसे हुए ददसिया, कांवरा कलां, कबूलपुर, किड़ावली, मंझावली, मोठूका में रेनीवेल लगे हुए हैं। अभी मोठूका में दो और रेनीवेल चालू हो चुके हैं और तीसरा भी शुरू होने वाला है। पांच और रेनीवेल लगाए जा रहे हैं। चार अगले चरण में लगाए जाएंगे।
क्या है कारण
दरअसल मानसून में यमुना नदी में पानी भरपूर रहता है। लेकिन बाकी महीनों में यह केवल नाले का रूप ले लेती है। इसमें नालों का पानी बहता है। सीवर और केमिकलयुक्त पानी की वजह से यमुना नदी का भूजल भी दूषित हो रहा है। यही भूजल रेनीवेल के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंच रहा है।
शहरवासियों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति करना प्राथमिकता है। इसलिए समय-समय पर शुद्धता की जांच की जाती रहती है। अब तीन रेनीवेल के 30 एमएलडी पानी को साफ किया जाएगा।
- अंकित भारद्वाज, कार्यकारी अभियंता, प्राधिकरण
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