'मेरी आंखें तो गईं, अब बच्चों का भविष्य कैसे बचाऊं?', फरीदाबाद समाधान शिविर में छलका दिव्यांग पिता का दर्द
फरीदाबाद के समाधान शिविर में नागरिकों ने परिवार पहचान पत्र में आय संबंधी त्रुटियों और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होने की शिकायतें कीं।
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फरीदाबाद के समाधान शिविर में सुनवाई करते अधिकारी, जागरण।
HighLights
नेत्रहीन व्यक्ति को पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े।
PPP में आय त्रुटियों के कारण राशन कार्ड बंद हुए।
अधिकारियों ने त्वरित समाधान के लिए निर्देश जारी किए।
निभा रजक, फरीदाबाद। किसी पिता के लिए इससे बड़ा दर्द क्या होगा कि उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाए और घर में पांच बच्चों के भविष्य की चिंता हर पल उसे अंदर से तोड़ती रहे।
कभी नौकरी कर परिवार का पेट पालने वाले ऊंचा गांव निवासी अजरुद्दीन आज खुद दूसरों के सहारे हैं। दो साल पहले दिमागी बुखार ने उनकी आंखों की रोशनी छीन ली।
नौकरी छूटने के बाद बढ़ी परेशानी
बीमारी ने न केवल उन्हें नेत्रहीन बना दिया, बल्कि मानसिक रूप से भी कमजोर कर दिया। नौकरी छूट गई और परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई। अब पांच बच्चों का पालन-पोषण कैसे हो, यही सवाल उन्हें हर दिन परेशान करता है।
एम्स में उनका इलाज चल रहा है। परिवार को उम्मीद है कि पेंशन बन जाए तो कुछ आर्थिक सहारा मिल सके, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की राह आसान नहीं है।
समाधान तलाशने की कोशिश
पिता जमालुद्दीन के सहारे अजरुद्दीन सोमवर को सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर पहुंचे थे। सीटीएम अंकित कुमार की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में सुनवाई तो हुई, लेकिन समाधान नहीं हो सका।
अजरूद्दी को एसडीएम कार्यालय बल्लभगढ़ भेज दिया दया है। पीड़ित का दावा है कि पिछले दो वर्ष से इसी प्रकार दफ्तर-दफ्तर भटकाया जा रहा है।
दिव्यांग व्यक्ति को हो रही परेशानी
आजाद नगर निवासी सावित्री पिछले पांच साल से अधिकारियों के सामने गुहार लगा रही हैं। उनका 41 वर्षीय बेटा रवींद्र मानसिक रूप से दिव्यांग है। जिसकी वजह से नौकरी नहीं कर सकता है। पीपीपी में आक्यूपेशन बेरोजगार लिखा है, जबकि इनकम 1.40 लाख से 1.80 लाख दिखा दी गई है।
जिससे इनकम बढ़ गई है। सावित्री देवी के अनुसार पति दिल के मरीज हैं। पेंशन से गुजारा चलता है। फिर भी अधिकारियों ने पांच साल से इनकम तीन लाख दिखाकर निःशुल्क राशन की सुविधा बंद कर दी है।
परिवार की बढ़ा दी गई आय
डबुआ कॉलोनी निवासी धर्मपाल भी परिवार पहचान पत्र में दर्ज आय को लेकर परेशान हैं। उनका आरोप है कि पीपीपी में उनके नाम तीन एकड़ जमीन दिखाकर परिवार की आय बढ़ा दी गई है।
इस रिकार्ड को ठीक कराने के लिए वह करीब एक साल से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। धर्मपाल के मुताबिक अधिकारी उन्हें उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जाने की सलाह दे रहे हैं और कह रहे हैं कि वहीं से रिकार्ड ठीक होगा।
इनकम बढ़ने से किसान भी परेशान
जुन्हेड़ा निवासी जगवीर भी पीपीपी में अधिक दर्ज होने की समस्या से परेशान हैं। पीपीपी में उनकी खेती से होने वाली आय पांच लाख रुपये दर्शाई गई है। आय अधिक होने के कारण राशन की सुविधा भी बंद हो गई है।
पिछले एक साल से दस्तावेज लेकर अधिकारियों के दफ्तरों में गुहार लगा रहे हैं। आज भी उन्हें समाधान शिविर से सिर्फ आश्वासन लेकर लौटना पड़ा।
समाधान शिविर में सबसे अधिक शिकायतें पीपीपी में आय संबंधी त्रुटियों को ठीक करवाने से संबंधित प्राप्त हुई। इसके अलावा राशन कार्ड, अवैध अतिक्रमण, पुलिस तथा बिजली विभाग से संबंधित शिकायतें भी नागरिकों द्वारा रखी गईं। समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
-अंकित कुमार, सीटीएम।
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