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फरीदाबाद में चार रेलवे पुलों की सड़कें बदहाल, रोजाना पांच लाख वाहन झेल रहे गड्ढों और झटकों का सफर

Published: Sat, 12 Sep 2026 06:13 PM (IST)

फरीदाबाद में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाले रेलवे पुलों की सड़कें गड्ढों से भरी हैं, जिससे वाहन चालकों को ...और पढ़ें

गड्ढों में सड़कें, खामोशी में जिम्मेदार।

गड्ढों में सड़कें, खामोशी में जिम्मेदार।

HighLights

  1. फरीदाबाद के रेलवे पुलों की सड़कें गड्ढों से भरी हैं।

  2. करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद मरम्मत कार्य की गुणवत्ता खराब।

  3. जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण और रखरखाव में लापरवाही बरत रहे हैं।

प्रवीन कौशिक, फरीदाबाद। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाले रेलवे पुलों पर सफर अब वाहन चालकों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि झटकों का सफर बन गया है। बल्लभगढ़-सोहना, बाटा, नीलम और बड़खल रेलवे पुलों की सड़कों पर जगह-जगह छोटे-बड़े गड्ढे उभर आए हैं।

इन गड्ढों से गुजरते समय वाहन चालकों को जोरदार झटका लग रहा है। विडंबना यह है कि इन सड़कों की हालत लंबे समय से खराब है, लेकिन जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों पर मानो खामोशी सवार है।

वर्षा के बाद तो हालत अधिक खराब हो गई है। अब न निरीक्षण हो रहा है और न ही मरम्मत की कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है। सभी पुल दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी महत्वपूर्ण लिंक सड़कों का हिस्सा हैं। इन पुलों पर प्रतिदिन पांच लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है।

दो करोड़ खर्च, फिर उखड़ने लगी सड़क

नीलम रेलवे पुल की सड़क पर तो कुछ समय पहले ही करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर मरम्मत कराई गई थी। मरम्मत को अभी करीब एक साल ही हुआ है, लेकिन सड़क की हालत फिर खराब होने लगी है। जगह-जगह सड़क की सतह टूटने और गड्ढे बनने से सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद भी सड़क टिक क्यों नहीं पाई।

60 लाख मरम्मत कई पानी में

बाटा रेलवे पुल की सड़क पर भी करीब 60 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद यहां वाहन चालकों को अब भी खराब सड़क और झटकों का सामना करना पड़ रहा है। इससे सड़क निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बल्लभगढ़-सोहना पुल पर महीनों से परेशानी

बल्लभगढ़-सोहना रेलवे पुल की सड़क भी कई महीनों से जर्जर हालत में है। पुल से गुजरने वाले वाहन चालक खराब सड़क के कारण गति कम करने को मजबूर हैं। कई जगह सड़क पर बने गड्ढों को बचाने के लिए वाहन चालक अचानक दिशा बदलते हैं, जिससे दूसरे वाहनों से टकराने का खतरा बना रहता है।

बड़खल रेलवे पुल की सड़क की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। प्रमुख मार्ग होने के बावजूद सड़क की नियमित देखरेख नहीं हो रही है। सवाल यह है कि जब रोजाना लाखों वाहन इन पुलों से गुजरते हैं तो संबंधित विभाग इनके रखरखाव को लेकर इतना बेपरवाह क्यों है।

निरीक्षण तक नहीं, फिर कैसे सुधरेगी सड़क

विभागीय अधिकारियों को समय-समय पर इन पुलों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि सड़क की स्थिति खराब होने से पहले ही मरम्मत कराई जा सके। लेकिन लंबे समय से हालात देखकर ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जाकर सड़क की स्थिति देखने की जहमत तक नहीं उठा रहे हैं।

एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच का परिणाम नहीं

समाजसेवी अजय सैनी द्वारा नीलम रेलवे पुल की सड़क मरम्मत कार्य को लेकर शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो को दी थी। करीब तीन माह पहले सड़क के सैंपल भर लिए गए लेकिन अभी तक परिणाम नहीं आया है।

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अजय सैनी के अनुसार इस मामले को लेकर प्रथम अपील हो चुकी है लेकिन जब सैंपल का परिणाम नहीं आया तो सुनवाई का क्या फायदा। सैनी का आरोप है कि निर्माण कार्य में उचित गुणवत्ता का प्रयोग नहीं किया गया है।


करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि सड़कें कुछ समय में फिर गड्ढों में तब्दील हो जाएं तो सवाल सिर्फ मरम्मत का नहीं, बल्कि निगरानी और गुणवत्ता का भी है।

- अजय जुनेजा

शहर के लाखों वाहन चालकों को रोज इन पुलों से गुजरना पड़ता है। सड़कों का निरीक्षण कर गड्ढों को भरवाएं और जहां सड़क की हालत ज्यादा खराब है, वहां स्थायी मरम्मत कराएं।

- श्याम सुंदर कपूर

नीलम और बड़खल रेलवे पुल का निरीक्षण कराया जाएगा। अभी रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की ही है। उससे कहकर दोनों पुलों की सड़कों को दुरुस्त करा दिया जाएगा।

- प्रवीण चौधरी, मुख्य अभियंता, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण